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उझी घाटी में नए बगीचों को तैयार करने में जुटे बागवान
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ऊझी घाटी में नए बगीचे तैयार करने में जुटे बागवान
माघ संक्रांति से घाटी के नौ गांवों में नहीं होंगे कृषि कार्य
अमर उजाला ब्यूरो
मनाली (कुल्लू)। ऊझी घाटी में इन दिनों बागवान नए बगीचों को तैयार करने में जुट गए हैं। बागवानों ने सेब, पलम, आडू, नाशपाती के पेड़ लगाने का काम तेज कर दिया है। बागवानी के लिए मौसम अनुकूल रहने से किसान-बागवान गदगद हैं।
माघ माह में ऊझी घाटी में देव परंपरा के अनुसार मिट्टी में खुदाई नहीं की जाती है, जिसके चलते घाटी के बागवानों ने 14 जनवरी से पहले ही सेब के बगीचों में पेड़ लगाने का काम आरंभ कर दिया है। जगतसुख के देवता जमदग्नि ऋषि के बगीचे में इन दिनों सेब और पलम के पेड़ लगाने का काम जोरों से चल रहा है, इसमें देवता के देवलु श्रम दान दे रहे हैं।
पलचान गांव के पंचायत समिति सदस्य फतेह चंद ठाकुर और नारायण सिंह ने बताया कि 14 जनवरी को ऊझी घाटी में अगले 45 दिन तक न तो खेत खलिहानों का कामकाज होगा और न ही ग्रामीण रेडियो और टीवी देख सकेंगे। इस परंपरा के निर्वहन घाटी के नौ गांव गौशाल, बुरूआ, शनाग, मझाच, कुलंग, पलचान, कोठी, रोआड और सोलंग करेंगे। बुध राम शर्मा ने बताया कि इन दिनों ऊझी घाटी में देव परंपरा के अनुसार माघ संक्रांति के बाद कोई भी कृषि कार्य नहीं होगा।
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माघ संक्रांति से घाटी के नौ गांवों में नहीं होंगे कृषि कार्य
अमर उजाला ब्यूरो
मनाली (कुल्लू)। ऊझी घाटी में इन दिनों बागवान नए बगीचों को तैयार करने में जुट गए हैं। बागवानों ने सेब, पलम, आडू, नाशपाती के पेड़ लगाने का काम तेज कर दिया है। बागवानी के लिए मौसम अनुकूल रहने से किसान-बागवान गदगद हैं।
माघ माह में ऊझी घाटी में देव परंपरा के अनुसार मिट्टी में खुदाई नहीं की जाती है, जिसके चलते घाटी के बागवानों ने 14 जनवरी से पहले ही सेब के बगीचों में पेड़ लगाने का काम आरंभ कर दिया है। जगतसुख के देवता जमदग्नि ऋषि के बगीचे में इन दिनों सेब और पलम के पेड़ लगाने का काम जोरों से चल रहा है, इसमें देवता के देवलु श्रम दान दे रहे हैं।
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पलचान गांव के पंचायत समिति सदस्य फतेह चंद ठाकुर और नारायण सिंह ने बताया कि 14 जनवरी को ऊझी घाटी में अगले 45 दिन तक न तो खेत खलिहानों का कामकाज होगा और न ही ग्रामीण रेडियो और टीवी देख सकेंगे। इस परंपरा के निर्वहन घाटी के नौ गांव गौशाल, बुरूआ, शनाग, मझाच, कुलंग, पलचान, कोठी, रोआड और सोलंग करेंगे। बुध राम शर्मा ने बताया कि इन दिनों ऊझी घाटी में देव परंपरा के अनुसार माघ संक्रांति के बाद कोई भी कृषि कार्य नहीं होगा।
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