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दहकते अंगारों पर नाचे गुर और चेलियां
Updated Fri, 27 Jul 2018 10:16 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
भुंतर (कुल्लू)। जिला कुल्लू के प्रवेश द्वार भुंतर के पिपलागे में दैवीय शक्तियां देखने को मिली। माता नैणा के गुर व चेलियां दहकते अंगारों पर चले। लेकिन इस दौरान किसी को भी चोट तक नहीं आई। आखिर में माता के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा। इस दृश्य को देखने के लिए सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचे थे। इस जाग महोत्सव में माता भद्रकाली, माता कोयला, माता शीतला, माता छत्रेश्वरी अपने कारकूनों ओर हारियानों सहित विशेष रूप से पहुंचे।
वीरवार रात्रि करीब एक बजे माता नैणा, भद्रकाली ने अपने कारकूनों, हारियानों सहित ढोल-नगाड़ों के साथ मंदिर में प्रवेश किया। इसके बाद माता ने गुर व चेलियों के साथ दहकते अंगारों के चारों ओर परिक्रमा की। वाद्य यंत्रों की धुनों पर वे दहकते अंगारों पर चले। भद्रकाली माता के पुजारी अमित महंत ने कहा कि माता नैणा की 18वीं जाग बड़ी धूमधाम से मनाई गई। इस जाग की अद्भुत बात यह रही कि माता के गुर, चेलियों ने माता के रथ के साथ दहकते अंगारों की परिक्रमा की। लेकिन माता की कृपा से किसी के भी पैर में आंच तक नहीं आई। यह सब माता की शक्ति से ही संभव हो पाया है। जाग के दिन माता ने गुर के माध्यम से भक्तों के दुखों का निवारण किया। उन्होंने कहा कि माता इस दिन सभी को मनचाहा फल प्रदान करती है। सभी भक्त नारियल लेकर आते हैं। माता नैणा नारियल से सभी भक्तों के ग्रहों का निवारण करती है। माता भद्रकाली व माता नैणा के गुर अश्वनी कुमार ने कहा कि यह प्रथा तब से चली आ रही है, जब से भगवान इस धरती पर आए हैं। त्रिनेत्रा मंदिर कमेटी के सभी सदस्यों ने जाग को सफल बनाने के लिए सहयोग किया। इस जाग को देखने के लिए प्रदेश के दूसरे जिलों से भी लोग यहां पहुंचे थे।
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भुंतर (कुल्लू)। जिला कुल्लू के प्रवेश द्वार भुंतर के पिपलागे में दैवीय शक्तियां देखने को मिली। माता नैणा के गुर व चेलियां दहकते अंगारों पर चले। लेकिन इस दौरान किसी को भी चोट तक नहीं आई। आखिर में माता के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा। इस दृश्य को देखने के लिए सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचे थे। इस जाग महोत्सव में माता भद्रकाली, माता कोयला, माता शीतला, माता छत्रेश्वरी अपने कारकूनों ओर हारियानों सहित विशेष रूप से पहुंचे।
वीरवार रात्रि करीब एक बजे माता नैणा, भद्रकाली ने अपने कारकूनों, हारियानों सहित ढोल-नगाड़ों के साथ मंदिर में प्रवेश किया। इसके बाद माता ने गुर व चेलियों के साथ दहकते अंगारों के चारों ओर परिक्रमा की। वाद्य यंत्रों की धुनों पर वे दहकते अंगारों पर चले। भद्रकाली माता के पुजारी अमित महंत ने कहा कि माता नैणा की 18वीं जाग बड़ी धूमधाम से मनाई गई। इस जाग की अद्भुत बात यह रही कि माता के गुर, चेलियों ने माता के रथ के साथ दहकते अंगारों की परिक्रमा की। लेकिन माता की कृपा से किसी के भी पैर में आंच तक नहीं आई। यह सब माता की शक्ति से ही संभव हो पाया है। जाग के दिन माता ने गुर के माध्यम से भक्तों के दुखों का निवारण किया। उन्होंने कहा कि माता इस दिन सभी को मनचाहा फल प्रदान करती है। सभी भक्त नारियल लेकर आते हैं। माता नैणा नारियल से सभी भक्तों के ग्रहों का निवारण करती है। माता भद्रकाली व माता नैणा के गुर अश्वनी कुमार ने कहा कि यह प्रथा तब से चली आ रही है, जब से भगवान इस धरती पर आए हैं। त्रिनेत्रा मंदिर कमेटी के सभी सदस्यों ने जाग को सफल बनाने के लिए सहयोग किया। इस जाग को देखने के लिए प्रदेश के दूसरे जिलों से भी लोग यहां पहुंचे थे।
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