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स्कूल बसों व टैक्सियों में ओवरलोडिंग का सिलसिला जारी
Updated Thu, 26 Apr 2018 09:47 PM IST
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- फोटो : amarujala
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कुल्लू। कांगड़ा जिला के नुरपुर में हुए सड़क हादसे के बाद बच्चों की सुरक्षा के लिए जारी गाइडलाइन का कुल्लू में पालन होता नजर नहीं आ रहा है। निजी स्कूल की बसों और छोटे वाहनों में ओवरलोडिंग का सिलसिला बदस्तूर जारी है।
स्कूल बसों व बच्चों को लाने व ले जाने के लिए छोटे वाहनों में बच्चों को ठूंस-ठूंस कर भरा जा रहा है। ‘अमर उजाला’ की टीम करीब तीन बजे क्षेत्रीय अस्पताल के साथ लगते एक निजी स्कूल पहुंची। तो पाया कि कुछ निजी वाहन स्कूल के बाहर बच्चों के आने का इंतजार कर रहे हैं। तीन बजे छुट्टी के बाद एक वैन में बच्चों को ठूंठ-ठूस कर भरा गया। इसके साथ स्कूल की बस में यही हाल पाया गया। इसके बाद टीम ने शहर के एक स्कूल का रूख किया। ढालपुर के इस निजी स्कूल की मारूति ट्रैक्स में 12 बच्चों के बैठने की सुविधा है लेकिन इसमें करीब डेढ़ दर्जन विद्यार्थी बिठाए गए थे।
निजी स्कूलों की बसों को चलाने वाले चालक व परिचालक बिना वर्दी के ही सड़कों पर दौड़ रहे हैं। गाइडलाइन के मुताबिक बस कंडक्टर के साथ महिला अटेंडेंट भी तैनात होगी। अटेंडेंट बच्चों को बस से उतारने व चढ़ाने का काम करेगी। जिसे अब निजी स्कूलों ने फॉलो नहीं किया है। कुल्लू शहर व अन्य क्षेत्रों में यही हाल है। वहीं निजी स्कूल की अधिकतर बसों में स्पीड गर्वनर गायब है। स्कूल बसों में सीसीटीवी कैमरे व जीपीएस सिस्टम भी नहीं लगाए हैं। परिवहन विभाग व प्रशासन भी निजी स्कूलों की मनमानी पर शिकंजा नहीं लगा पा रहा है। ऐसे में अभिभावकों में गाइडलाइन फॉलो न किए जाने को लेकर रोष है। ऐसे में अगर हादसा होता है तो उसकी जिम्मेवारी किसकी होगी।
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इधर आरटीओ डॉ सुरेश जसवाल ने कहा कि सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन में जनता से एक मई तक सुझाव मांगे गए हैं। 16 से 22 अप्रैल के निजी स्कूल वाहनों की चेकिंग अभियान चलाया गया। इस दौरान स्कूलों को पैैरामीटर फॉलो करने को कहा गया है। नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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स्कूल बसों व बच्चों को लाने व ले जाने के लिए छोटे वाहनों में बच्चों को ठूंस-ठूंस कर भरा जा रहा है। ‘अमर उजाला’ की टीम करीब तीन बजे क्षेत्रीय अस्पताल के साथ लगते एक निजी स्कूल पहुंची। तो पाया कि कुछ निजी वाहन स्कूल के बाहर बच्चों के आने का इंतजार कर रहे हैं। तीन बजे छुट्टी के बाद एक वैन में बच्चों को ठूंठ-ठूस कर भरा गया। इसके साथ स्कूल की बस में यही हाल पाया गया। इसके बाद टीम ने शहर के एक स्कूल का रूख किया। ढालपुर के इस निजी स्कूल की मारूति ट्रैक्स में 12 बच्चों के बैठने की सुविधा है लेकिन इसमें करीब डेढ़ दर्जन विद्यार्थी बिठाए गए थे।
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निजी स्कूलों की बसों को चलाने वाले चालक व परिचालक बिना वर्दी के ही सड़कों पर दौड़ रहे हैं। गाइडलाइन के मुताबिक बस कंडक्टर के साथ महिला अटेंडेंट भी तैनात होगी। अटेंडेंट बच्चों को बस से उतारने व चढ़ाने का काम करेगी। जिसे अब निजी स्कूलों ने फॉलो नहीं किया है। कुल्लू शहर व अन्य क्षेत्रों में यही हाल है। वहीं निजी स्कूल की अधिकतर बसों में स्पीड गर्वनर गायब है। स्कूल बसों में सीसीटीवी कैमरे व जीपीएस सिस्टम भी नहीं लगाए हैं। परिवहन विभाग व प्रशासन भी निजी स्कूलों की मनमानी पर शिकंजा नहीं लगा पा रहा है। ऐसे में अभिभावकों में गाइडलाइन फॉलो न किए जाने को लेकर रोष है। ऐसे में अगर हादसा होता है तो उसकी जिम्मेवारी किसकी होगी।
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इधर आरटीओ डॉ सुरेश जसवाल ने कहा कि सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन में जनता से एक मई तक सुझाव मांगे गए हैं। 16 से 22 अप्रैल के निजी स्कूल वाहनों की चेकिंग अभियान चलाया गया। इस दौरान स्कूलों को पैैरामीटर फॉलो करने को कहा गया है। नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।