{"_id":"5aae95024f1c1bbf758b60db","slug":"151521390850-kullu-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दवा का छिड़काव कर बचाएं सेब के पौधे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दवा का छिड़काव कर बचाएं सेब के पौधे
Updated Sun, 18 Mar 2018 10:07 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दवा छिड़काव कर बचाएं सेब के पौधे
कीट से निजात पाने के लिए ट्री ऑयल स्प्रे की सलाह
अमर उजाला ब्यूरो
खराहल (कुल्लू)। सेब के पौधों में जैसे ही रस आना शुरू हो जाता है, वैसे ही सेन होज स्केल नामक कीट का हमला भी तेज होने लगता है। इन दिनों सेब के पौधों में रस आने की प्रक्रिया आरंभ हो गई। ऐसे में यह कीट भी सक्रिय हो गया है। अमूमन मार्च और अप्रैल माह में कीट का हमला सेब के पौधों पर शुरू हो जाता है। कीट पौधों का रस चूस कर अपना भोजन ग्रहण करता है।
इस संबंध में बागवानी विभाग की सलाह के मुताबिक घाटी के बागवान इन दिनों इस कीट से निजात पाने के लिए ट्री ऑयल की स्प्रे करने में अपने बगीचों में जुटे हुए हैं। घाटी के बागवान अमित कुमार, ज्ञान ठाकुर, मोहर सिंह, चमन ठाकुर, जयचंद, अशोक ठाकुर, युवराज ठाकुर और बुद्धि प्रकाश शर्मा आदि के अनुसार सेन होज स्केल कीट के पनपने से पौधों को काफी नुकसान झेलना पड़ता है और सेब की गुणवत्ता पर भी इस का प्रभाव पड़ता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जिस पौधे पर इस कीट का अधिक प्रकोप होता है। उसकी छाल पर पपड़ियां जमी रहती हैं। ऐसा ज्ञात होता है कि तने और टहनियों पर राख बिखेरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि कीट के अधिक प्रकोप से पौधा सूख भी जाता है। समय पर इस दवा का छिड़काव करना अति आवश्यक है। वहीं इस संबंध में फलोत्पादक मंडल कुल्लू के अध्यक्ष राजगीर महंत के अनुसार इस कीट के नियंत्रण के लिए फलोत्पादक मंडल हर साल ट्री ऑयल नामक दवा बागवानों बाजार से किफायती दरों पर मुहैया करता है।
विज्ञापन
गरम और सूखे मौसम में एक मादा कीट तीन करोड़ कीड़े पैदा करती हैं। इस कीट को मारने के लिए विभाग की ओर से बागवानों को अनुमोदित ट्री ऑयल की स्प्रे करने की सलाह दी है।- डॉ. आरके शर्मा उपनिदेशक बागवानी विभाग, कुल्लू
विज्ञापन
कीट से निजात पाने के लिए ट्री ऑयल स्प्रे की सलाह
अमर उजाला ब्यूरो
खराहल (कुल्लू)। सेब के पौधों में जैसे ही रस आना शुरू हो जाता है, वैसे ही सेन होज स्केल नामक कीट का हमला भी तेज होने लगता है। इन दिनों सेब के पौधों में रस आने की प्रक्रिया आरंभ हो गई। ऐसे में यह कीट भी सक्रिय हो गया है। अमूमन मार्च और अप्रैल माह में कीट का हमला सेब के पौधों पर शुरू हो जाता है। कीट पौधों का रस चूस कर अपना भोजन ग्रहण करता है।
इस संबंध में बागवानी विभाग की सलाह के मुताबिक घाटी के बागवान इन दिनों इस कीट से निजात पाने के लिए ट्री ऑयल की स्प्रे करने में अपने बगीचों में जुटे हुए हैं। घाटी के बागवान अमित कुमार, ज्ञान ठाकुर, मोहर सिंह, चमन ठाकुर, जयचंद, अशोक ठाकुर, युवराज ठाकुर और बुद्धि प्रकाश शर्मा आदि के अनुसार सेन होज स्केल कीट के पनपने से पौधों को काफी नुकसान झेलना पड़ता है और सेब की गुणवत्ता पर भी इस का प्रभाव पड़ता है।
विज्ञापन
विशेषज्ञों का कहना है कि जिस पौधे पर इस कीट का अधिक प्रकोप होता है। उसकी छाल पर पपड़ियां जमी रहती हैं। ऐसा ज्ञात होता है कि तने और टहनियों पर राख बिखेरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि कीट के अधिक प्रकोप से पौधा सूख भी जाता है। समय पर इस दवा का छिड़काव करना अति आवश्यक है। वहीं इस संबंध में फलोत्पादक मंडल कुल्लू के अध्यक्ष राजगीर महंत के अनुसार इस कीट के नियंत्रण के लिए फलोत्पादक मंडल हर साल ट्री ऑयल नामक दवा बागवानों बाजार से किफायती दरों पर मुहैया करता है।
विज्ञापन
गरम और सूखे मौसम में एक मादा कीट तीन करोड़ कीड़े पैदा करती हैं। इस कीट को मारने के लिए विभाग की ओर से बागवानों को अनुमोदित ट्री ऑयल की स्प्रे करने की सलाह दी है।- डॉ. आरके शर्मा उपनिदेशक बागवानी विभाग, कुल्लू