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इस साल बढ़ेगी बाढ़ और आग की घटनाएं
Updated Sun, 25 Feb 2018 09:52 PM IST
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सेब के साथ उम्दा होगी रबी-खरीफ की पैदावार
देवता गौतम ऋषि ने की सालाना भविष्यवाणी
इस साल बढ़ेंगी बाढ़ और आग की घटनाएं
45 दिनों के बाद गोशाल में खुले देवता के कपाट
अमर उजाला ब्यूरो
मनाली (कुल्लू)। इस साल घाटी में बाढ़ के साथ आग की घटनाएं अधिक होंगी। वहीं सेब की फसल के साथ रबी व खरीफ की फसलों की अच्छी पैदावार होने की उम्मीद है। रविवार को देवता गौतम ऋषि ने सालाना भविष्यवाणी में यह भविष्यवाणी की है। इस दौरान देवता के बंद पड़े मंदिर के कपाट 45 दिनों के बाद देवता गौतम ऋषि, ब्यास ऋषि और गोशाली नाग के कपाट खुले गए।
अब ग्रामीण अपने खेत खलियानों में अपना काम करने के साथ 45 दिनों से बंद पड़े टीवी और रेडियो सुन व देख सकेंगे। रविवार को देवता मुन ऋषि के पहुंचे के बाद गोशाल, शनाग, मझाच, बुरूआ, सोलंग, कोठी, रुआड, पचलान व कुलंग गांव के लोगों को हुजूम उमड़ा और अपने अधिष्ठाता के अन्य देवी देवताओं के दर्शन कर सुख-शांति का आशीर्वाद लिया।
देवता के कारदार हरि सिंह ठाकुर ने कहा कि सदियों से चली आ रही प्रथा के तहत देव कारज का निर्वहन किया गया। माघ संक्रांति को गौतम ऋषि की पिंडी को मिट्टी का लेप लगा कर देवता के मंदिर कपाट को बंद किया जाता है। परंपरा के अनुसार 45 दिनों तक उपरोक्त नौ गांव में न तो जमीन को कामकाज होगा और न ही टीवी व रेडियो को सुना जाता है। देवता ने सालाना भविष्यवाणी में आग व बाढ़ की घटनाएं होने तथा फसल व फसलों की अच्छी फसल होने का संकेत दिया है। जबकि सोना, चांदी व अन्य धातुओं के धाम बढने और दुर्घटनाएं कम होने की भविष्यवाणी की है।
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देवता गौतम ऋषि ने की सालाना भविष्यवाणी
इस साल बढ़ेंगी बाढ़ और आग की घटनाएं
45 दिनों के बाद गोशाल में खुले देवता के कपाट
अमर उजाला ब्यूरो
मनाली (कुल्लू)। इस साल घाटी में बाढ़ के साथ आग की घटनाएं अधिक होंगी। वहीं सेब की फसल के साथ रबी व खरीफ की फसलों की अच्छी पैदावार होने की उम्मीद है। रविवार को देवता गौतम ऋषि ने सालाना भविष्यवाणी में यह भविष्यवाणी की है। इस दौरान देवता के बंद पड़े मंदिर के कपाट 45 दिनों के बाद देवता गौतम ऋषि, ब्यास ऋषि और गोशाली नाग के कपाट खुले गए।
अब ग्रामीण अपने खेत खलियानों में अपना काम करने के साथ 45 दिनों से बंद पड़े टीवी और रेडियो सुन व देख सकेंगे। रविवार को देवता मुन ऋषि के पहुंचे के बाद गोशाल, शनाग, मझाच, बुरूआ, सोलंग, कोठी, रुआड, पचलान व कुलंग गांव के लोगों को हुजूम उमड़ा और अपने अधिष्ठाता के अन्य देवी देवताओं के दर्शन कर सुख-शांति का आशीर्वाद लिया।
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देवता के कारदार हरि सिंह ठाकुर ने कहा कि सदियों से चली आ रही प्रथा के तहत देव कारज का निर्वहन किया गया। माघ संक्रांति को गौतम ऋषि की पिंडी को मिट्टी का लेप लगा कर देवता के मंदिर कपाट को बंद किया जाता है। परंपरा के अनुसार 45 दिनों तक उपरोक्त नौ गांव में न तो जमीन को कामकाज होगा और न ही टीवी व रेडियो को सुना जाता है। देवता ने सालाना भविष्यवाणी में आग व बाढ़ की घटनाएं होने तथा फसल व फसलों की अच्छी फसल होने का संकेत दिया है। जबकि सोना, चांदी व अन्य धातुओं के धाम बढने और दुर्घटनाएं कम होने की भविष्यवाणी की है।
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