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क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में खुली स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल
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अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में नवजात की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधा की पोल खुली वहीं गर्भवती महिला को सरकार की ओर से चलाई जा रही जननी शिशु सुरक्षा योजना का भी लाभ नहीं मिल पाया है। गर्भवती महिला को प्रसव के दौरान जो सुविधा उसे सरकारी अस्पताल में मिलनी चाहिए थी, उसके लिए उसे निजी अस्पताल जाना पड़ा। परिजनों का आरोप है कि गर्भवती महिला का जो अल्ट्रासाउंड करवाया गया उसे निजी अस्पताल से करवाने को कहा गया था। हालांकि, परिजनों ने इसका विरोध किया लेकिन चिकित्सक ने दो निजी अस्पतालों का नाम बताकर यहीं से ही अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए कहा। ऐसे में परिजनों ने उसी निजी अस्पताल से अल्ट्रासाउंड करवाया। ऐसे में परिजनों ने सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों का निजी अस्पतालों के साथ सांठगांठ होने का आरोप लगाया है। मृतक नवजात की बुआ चमना शर्मा, पिता राम कृष्ण शर्मा तथा चाचा चांद शर्मा ने कहा कि डिलीवरी होने से पहले गर्भवती महिला को दो दवाई की गोलियां दी गईं जो उन्होंने एक हजार रुपये में बाहर से निजी दुकान से खरीदीं। हालांकि, क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में दो-दो अल्ट्रासाउंड की मशीनें स्थापित की हैं। बावजूद इसके चिकित्सक ने परिजनों को निजी अस्पताल से ही अल्ट्रासाउंड करवाने का दबाव क्यों डाला। ऐसे में चिकित्सक की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा होता है। जिलावासी रमेश कुमार, प्रेम सिंह, भूप सिंह, देव राज, राकेश शर्मा, शेर सिंह तथा तिलक राज का कहना है कि एक ओर सरकार और स्वास्थ्य विभाग महिलाओं को सरकारी अस्पतालों में डिलीवरी की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर पात्र लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पाता है। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सुविधा के बावजूद मरीज बाहर से निजी अस्पतालों में महंगे दामों पर अल्ट्रासाउंड करवाने को विवश हैं। उधर, सीएमओ डॉ. सुशील चंद्र शर्मा ने कहा कि मामला ध्यान में आया है और इसकी जांच की जा रही है।
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कुल्लू। क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में नवजात की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधा की पोल खुली वहीं गर्भवती महिला को सरकार की ओर से चलाई जा रही जननी शिशु सुरक्षा योजना का भी लाभ नहीं मिल पाया है। गर्भवती महिला को प्रसव के दौरान जो सुविधा उसे सरकारी अस्पताल में मिलनी चाहिए थी, उसके लिए उसे निजी अस्पताल जाना पड़ा। परिजनों का आरोप है कि गर्भवती महिला का जो अल्ट्रासाउंड करवाया गया उसे निजी अस्पताल से करवाने को कहा गया था। हालांकि, परिजनों ने इसका विरोध किया लेकिन चिकित्सक ने दो निजी अस्पतालों का नाम बताकर यहीं से ही अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए कहा। ऐसे में परिजनों ने उसी निजी अस्पताल से अल्ट्रासाउंड करवाया। ऐसे में परिजनों ने सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों का निजी अस्पतालों के साथ सांठगांठ होने का आरोप लगाया है। मृतक नवजात की बुआ चमना शर्मा, पिता राम कृष्ण शर्मा तथा चाचा चांद शर्मा ने कहा कि डिलीवरी होने से पहले गर्भवती महिला को दो दवाई की गोलियां दी गईं जो उन्होंने एक हजार रुपये में बाहर से निजी दुकान से खरीदीं। हालांकि, क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में दो-दो अल्ट्रासाउंड की मशीनें स्थापित की हैं। बावजूद इसके चिकित्सक ने परिजनों को निजी अस्पताल से ही अल्ट्रासाउंड करवाने का दबाव क्यों डाला। ऐसे में चिकित्सक की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा होता है। जिलावासी रमेश कुमार, प्रेम सिंह, भूप सिंह, देव राज, राकेश शर्मा, शेर सिंह तथा तिलक राज का कहना है कि एक ओर सरकार और स्वास्थ्य विभाग महिलाओं को सरकारी अस्पतालों में डिलीवरी की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर पात्र लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पाता है। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सुविधा के बावजूद मरीज बाहर से निजी अस्पतालों में महंगे दामों पर अल्ट्रासाउंड करवाने को विवश हैं। उधर, सीएमओ डॉ. सुशील चंद्र शर्मा ने कहा कि मामला ध्यान में आया है और इसकी जांच की जा रही है।