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अंधेरा छटने से पहले मुंह मीठा कर नववर्ष का आगाज
Updated Sun, 18 Mar 2018 10:07 PM IST
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अंधेरा छटने से पहले मुंह
मीठा कर नववर्ष का आगाज
कुल्लू में हर्षोल्लास से साथ मनाया नव संवत का पर्व
अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। जिला में रविवार को नव संवत का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। नव संवत पर लोगों ने अंधेरा छंटने से पहले ही मुंह मीठा कर नववर्ष की शुरूआत की। लोगों ने एक-दूसरे को नववर्ष की शुभकामनाएं दीं। नववर्ष की शुभकामनाओं का सिलसिला दिनभर चलता रहा। पर्व के मौके पर पारंपरिक मीठे व्यंजन भी तैयार किए गए। देवी-देवताओं की विशेष पूजा आराधना के बाद मेहमानों को पारंपरिक व्यंजन परोसे गए।
गौर रहे कि विक्रम संवत 2075 प्रारंभ होते ही भारतीय नव संवत शुरू हुआ है। इस दिन से नववर्ष की शुरूआत मानी जाती है। धार्मिक अनुष्ठानों, मांगलिक कार्यों, व्रत, उपवास, शादी-विवाह, तीज, त्यौहार आदि तिथियां विक्रमी संवत के अनुसार ही निर्धारित होती हैं। खराहल घाटी के सुनील राणा, नरेश कुमार, मणिकर्ण घाटी के गुरदयाल सिंह, देवराज, सैंज के बुद्धि सिंह, बंजार के दीनदया ठाकुर और केवलू ने कहा कि नव संवत को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। लोगों ने एक दिन पहले ही तैयारियां कर रखी थी। सुबह अंधेरा छटने से पहले लोगों ने मुंह मीठा कर साल की शुरूआत की। मान्यता है कि नए साल की शुरूआत मीठे से करने पर सालभर खुशहाली बनी रहती है। वहीं पर्व को लेकर पारंपरिक पकवान भी तैयार किए गए।
जिला देवी देवता कारदार संघ के अध्यक्ष दोतराम ठाकुर ने कहा कि नव संवत का आगाज होते ही घाटी में विरशु मेलों का आगाज भी हो गया है। नववर्ष के मौके पर ब्राह्मणों ने अपने-अपने यजमानों के घर जाकर सालभर का भविष्य सुनाया।
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मीठा कर नववर्ष का आगाज
कुल्लू में हर्षोल्लास से साथ मनाया नव संवत का पर्व
अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। जिला में रविवार को नव संवत का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। नव संवत पर लोगों ने अंधेरा छंटने से पहले ही मुंह मीठा कर नववर्ष की शुरूआत की। लोगों ने एक-दूसरे को नववर्ष की शुभकामनाएं दीं। नववर्ष की शुभकामनाओं का सिलसिला दिनभर चलता रहा। पर्व के मौके पर पारंपरिक मीठे व्यंजन भी तैयार किए गए। देवी-देवताओं की विशेष पूजा आराधना के बाद मेहमानों को पारंपरिक व्यंजन परोसे गए।
गौर रहे कि विक्रम संवत 2075 प्रारंभ होते ही भारतीय नव संवत शुरू हुआ है। इस दिन से नववर्ष की शुरूआत मानी जाती है। धार्मिक अनुष्ठानों, मांगलिक कार्यों, व्रत, उपवास, शादी-विवाह, तीज, त्यौहार आदि तिथियां विक्रमी संवत के अनुसार ही निर्धारित होती हैं। खराहल घाटी के सुनील राणा, नरेश कुमार, मणिकर्ण घाटी के गुरदयाल सिंह, देवराज, सैंज के बुद्धि सिंह, बंजार के दीनदया ठाकुर और केवलू ने कहा कि नव संवत को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। लोगों ने एक दिन पहले ही तैयारियां कर रखी थी। सुबह अंधेरा छटने से पहले लोगों ने मुंह मीठा कर साल की शुरूआत की। मान्यता है कि नए साल की शुरूआत मीठे से करने पर सालभर खुशहाली बनी रहती है। वहीं पर्व को लेकर पारंपरिक पकवान भी तैयार किए गए।
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जिला देवी देवता कारदार संघ के अध्यक्ष दोतराम ठाकुर ने कहा कि नव संवत का आगाज होते ही घाटी में विरशु मेलों का आगाज भी हो गया है। नववर्ष के मौके पर ब्राह्मणों ने अपने-अपने यजमानों के घर जाकर सालभर का भविष्य सुनाया।
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