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रैला में जलते अंगारों पर चले देवता के गूर
Updated Wed, 06 Sep 2017 09:28 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
सैंज (कुल्लू)। देवभूमि कुल्लू देव परंपराओं के लिए विश्व में प्रसिद्ध है। ऐसी ही एक परंपरा का निर्वहन सैंज घाटी के रैला में देवता लक्ष्मी नारायण के सम्मान में किया गया। देवता लक्ष्मी नारायण का हूम पर्व रैला में धूमधाम से मनाया गया। मेले में देवता का माता आशापुरी के साथ भव्य मिलन हुआ। देवमिलन को देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ी। इसके बाद हूम पर्व का शुभारंभ हुआ। सैकड़ों लोगों ने मशाल जलाकर हूम पर्व में भाग लिया। देवता के मैदान में अश्लील गालियों से बुरी शक्तियों को दूर भगाने की परंपरा निभाई गई। इस दौरान अद्भुत नजारा देखने को मिला। देवता के गूरों ने जलती आग पर चलकर दैवीय शक्ति का साक्षात्कार करवाया। गूरों को जलते अंगारों के बीच चलते देखकर हर किसी की आंखें दंग रह गई। पुजारी कल्याण संघ खंड बंजार के अध्यक्ष मनोहर लाल शर्मा, गूर तमेश्वर शर्मा, पालसरा यान सिंह नेगी, जुगतराम धामी, रमेश धामी ने कहा कि देवता के कई गूरों जलती आग की लपटों के बीच चलकर देवशक्ति का अहसास दिलाया। हूम का आयोजन प्रतिवर्ष भादो माह में किया जाता है। देवता के मुख्य कारकून व्रत रखकर लक्ष्मी नारायण का श्रृंगार करते हैं। परंपरा के अनुसार बुरी शक्तियों को भगाने के लिए हूम पर्व का आयोजन किया गया। वहीं हूम पर्व के दौरान रैला गांव में भंडारे का आयोजन भी हुआ, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर देवता से आशीर्वाद लिया।
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सैंज (कुल्लू)। देवभूमि कुल्लू देव परंपराओं के लिए विश्व में प्रसिद्ध है। ऐसी ही एक परंपरा का निर्वहन सैंज घाटी के रैला में देवता लक्ष्मी नारायण के सम्मान में किया गया। देवता लक्ष्मी नारायण का हूम पर्व रैला में धूमधाम से मनाया गया। मेले में देवता का माता आशापुरी के साथ भव्य मिलन हुआ। देवमिलन को देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ी। इसके बाद हूम पर्व का शुभारंभ हुआ। सैकड़ों लोगों ने मशाल जलाकर हूम पर्व में भाग लिया। देवता के मैदान में अश्लील गालियों से बुरी शक्तियों को दूर भगाने की परंपरा निभाई गई। इस दौरान अद्भुत नजारा देखने को मिला। देवता के गूरों ने जलती आग पर चलकर दैवीय शक्ति का साक्षात्कार करवाया। गूरों को जलते अंगारों के बीच चलते देखकर हर किसी की आंखें दंग रह गई। पुजारी कल्याण संघ खंड बंजार के अध्यक्ष मनोहर लाल शर्मा, गूर तमेश्वर शर्मा, पालसरा यान सिंह नेगी, जुगतराम धामी, रमेश धामी ने कहा कि देवता के कई गूरों जलती आग की लपटों के बीच चलकर देवशक्ति का अहसास दिलाया। हूम का आयोजन प्रतिवर्ष भादो माह में किया जाता है। देवता के मुख्य कारकून व्रत रखकर लक्ष्मी नारायण का श्रृंगार करते हैं। परंपरा के अनुसार बुरी शक्तियों को भगाने के लिए हूम पर्व का आयोजन किया गया। वहीं हूम पर्व के दौरान रैला गांव में भंडारे का आयोजन भी हुआ, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर देवता से आशीर्वाद लिया।