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Kangra News: टैक्सी से मायके न ले जाने पर रूठी पत्नी तीन साल में टूटा विवाह, अब हुआ तलाक
Mon, 20 Apr 2026 01:55 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Mon, 20 Apr 2026 01:55 AM IST
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धर्मशाला। छोटी-छोटी जिद जब रिश्तों पर भारी पड़ जाएं, तो उनका अंजाम कितना बड़ा हो सकता है, इसका उदाहरण देहरा में सामने आया है। मामूली आय वाले पति पर बार-बार टैक्सी से मायके ले जाने का दबाव, रोज के झगड़े और अलगाव ने आखिरकार एक हंसते-खेलते घर को उजाड़ दिया। तीन साल तक खिंचे इस रिश्ते को अब अदालत ने खत्म कर दिया है।
देहरा स्थित फैमिली कोर्ट ने एक अहम फैसले में पति को पत्नी से तलाक की डिक्री प्रदान की है। अदालत ने यह निर्णय पत्नी द्वारा किए गए क्रूर व्यवहार और लंबे समय से पति का परित्याग करने के आधार पर सुनाया। फरवरी 2022 में पंजाब के होशियारपुर में यह विवाह बड़े अरमानों के साथ संपन्न हुआ था। लेकिन शादी के दो महीने बाद ही रिश्ते में दरार आनी शुरू हो गई। पति ने अदालत में बताया कि उसकी पत्नी बार-बार टैक्सी से मायके जाने की जिद करती थी, जबकि उसकी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वह हर बार यह खर्च उठा सके।
पति ने बताया कि पत्नी की इस जिद के चलते घर में रोजाना झगड़े होने लगे। बात-बात पर विवाद, तनाव और यहां तक कि आत्महत्या की धमकियों ने हालात और बिगाड़ दिए। उसने यह भी बताया कि पत्नी लंबे समय से मायके में रह रही थी और उसने सुलह के सभी प्रयासों को ठुकरा दिया। रिश्ते को बचाने के लिए पंचायत स्तर पर भी कई बार प्रयास किए गए, लेकिन समाधान नहीं निकल सका।
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सुनवाई के दौरान पत्नी के कोर्ट में उपस्थित न होने पर अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर एकतरफा कार्रवाई की। अपने फैसले में अदालत ने स्पष्ट टिप्पणी की कि जब वैवाहिक संबंधों में सम्मान और साथ रहने की इच्छा समाप्त हो जाए, तो ऐसे रिश्ते को जबरन बनाए रखना किसी के लिए भी सुरक्षित या उचित नहीं है। इसी आधार पर विवाह को औपचारिक रूप से समाप्त करने का आदेश दिया गया।
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देहरा स्थित फैमिली कोर्ट ने एक अहम फैसले में पति को पत्नी से तलाक की डिक्री प्रदान की है। अदालत ने यह निर्णय पत्नी द्वारा किए गए क्रूर व्यवहार और लंबे समय से पति का परित्याग करने के आधार पर सुनाया। फरवरी 2022 में पंजाब के होशियारपुर में यह विवाह बड़े अरमानों के साथ संपन्न हुआ था। लेकिन शादी के दो महीने बाद ही रिश्ते में दरार आनी शुरू हो गई। पति ने अदालत में बताया कि उसकी पत्नी बार-बार टैक्सी से मायके जाने की जिद करती थी, जबकि उसकी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वह हर बार यह खर्च उठा सके।
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पति ने बताया कि पत्नी की इस जिद के चलते घर में रोजाना झगड़े होने लगे। बात-बात पर विवाद, तनाव और यहां तक कि आत्महत्या की धमकियों ने हालात और बिगाड़ दिए। उसने यह भी बताया कि पत्नी लंबे समय से मायके में रह रही थी और उसने सुलह के सभी प्रयासों को ठुकरा दिया। रिश्ते को बचाने के लिए पंचायत स्तर पर भी कई बार प्रयास किए गए, लेकिन समाधान नहीं निकल सका।
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सुनवाई के दौरान पत्नी के कोर्ट में उपस्थित न होने पर अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर एकतरफा कार्रवाई की। अपने फैसले में अदालत ने स्पष्ट टिप्पणी की कि जब वैवाहिक संबंधों में सम्मान और साथ रहने की इच्छा समाप्त हो जाए, तो ऐसे रिश्ते को जबरन बनाए रखना किसी के लिए भी सुरक्षित या उचित नहीं है। इसी आधार पर विवाह को औपचारिक रूप से समाप्त करने का आदेश दिया गया।