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जिला कांगड़ा में गेहूं की फसल पर पीला रतुआ बीमारी ने बोला धावा
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गेहूं की फसल के एक खेत मे पीला रतुआ बीमारी का सर्वेक्षण करती कृषि विभाग की टीम।
- फोटो : Kangra
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गेहूं की फसल को लगा पीला रतुआ रोग
जिले के कई खंडों में इस बीमारी का देखने को मिला असर, कृषि विभाग अलर्ट
विभाग की एक कमेटी ने आरंभ किया खेतों का सर्वेक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी
नगरोटा बगवां (कांगड़ा)। जिला कांगड़ा में गेहूं की फसल पर पीला रतुआ बीमारी ने धावा बोल दिया है। जिले के कई खंड इसकी चपेट में हैं। जिले में नगरोटा सूरियां, फतेहपुर, जवाली, लंबागांव, परागपुर और देहरा आदि में इस बीमारी का प्रकोप अधिक पाया गया है।
कृषि विभाग ने सारे जिले को इस बीमारी को लेकर अलर्ट पे रखा गया है। विभाग की जिला स्तरीय पीला रतुआ और करनाल बंद सर्वेक्षण कमेटी की ओर से प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर इस बीमारी के संक्रमण की तीव्रता का पता लगाया जा रहा है। जिला स्तरीय टीम में शामिल राज्य जैव नियंत्रण प्रयोगशाला हिमाचल प्रदेश के प्रभारी डॉ. गौरव सूद ने बताया कि टीम में उनके साथ शामिल धान एवं गेहूं अनुसंधान केंद्र मलां के वैज्ञानिक डॉ. सहित उपमन्यु तथा विषयवाद विशेषज्ञ परागपुर डॉ. उषा राणा ने शुक्रवार को परागपुर और देहरा विकास खंड के तहत वणी, स्लेटी, सरड डोमरी और द्रकाटा आदि क्षेत्रों में लगभग 12 हेक्टेयर क्षेत्र का सर्वेक्षण किया, जिसमें यूपी-2380, एस-308, डीपीडवलियु-621-50 और एचडी- 3086 आदी किस्में पिला रतुआ रोग से ग्रस्त पाई गई हैं। उन्होंने बताया कि यहां इस बीमारी की तीव्रता 10 से 80 प्रतिशत तक पाई गई है। टीम ने किसानों को मौसम की अनुकूलता को देखते हुए इस बीमारी से बचाव के लिए प्रोपिकानाजोल 25 ईसी दवाई की एक मिली लीटर प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करने की सलाह दी है। कमेटी ने सभी किसानों को सुझाव दिया गया है कि इस दवाई का 10-15 दिन में पुन: छिड़काव करें। उन्होंने बताया कि यह दवाई कृषि विभाग और ओपन मार्केट में संबंधित दवा विक्रेताओं के पास भी उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि इस बीमारी में गेहूं की फसल के पत्तों की पिछली तरफ धारीदार पीले रंग के पत्ते हो जाते हैं और हल्दी की तरह का पाउडर निकलता है।
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जिले के कई खंडों में इस बीमारी का देखने को मिला असर, कृषि विभाग अलर्ट
विभाग की एक कमेटी ने आरंभ किया खेतों का सर्वेक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी
नगरोटा बगवां (कांगड़ा)। जिला कांगड़ा में गेहूं की फसल पर पीला रतुआ बीमारी ने धावा बोल दिया है। जिले के कई खंड इसकी चपेट में हैं। जिले में नगरोटा सूरियां, फतेहपुर, जवाली, लंबागांव, परागपुर और देहरा आदि में इस बीमारी का प्रकोप अधिक पाया गया है।
कृषि विभाग ने सारे जिले को इस बीमारी को लेकर अलर्ट पे रखा गया है। विभाग की जिला स्तरीय पीला रतुआ और करनाल बंद सर्वेक्षण कमेटी की ओर से प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर इस बीमारी के संक्रमण की तीव्रता का पता लगाया जा रहा है। जिला स्तरीय टीम में शामिल राज्य जैव नियंत्रण प्रयोगशाला हिमाचल प्रदेश के प्रभारी डॉ. गौरव सूद ने बताया कि टीम में उनके साथ शामिल धान एवं गेहूं अनुसंधान केंद्र मलां के वैज्ञानिक डॉ. सहित उपमन्यु तथा विषयवाद विशेषज्ञ परागपुर डॉ. उषा राणा ने शुक्रवार को परागपुर और देहरा विकास खंड के तहत वणी, स्लेटी, सरड डोमरी और द्रकाटा आदि क्षेत्रों में लगभग 12 हेक्टेयर क्षेत्र का सर्वेक्षण किया, जिसमें यूपी-2380, एस-308, डीपीडवलियु-621-50 और एचडी- 3086 आदी किस्में पिला रतुआ रोग से ग्रस्त पाई गई हैं। उन्होंने बताया कि यहां इस बीमारी की तीव्रता 10 से 80 प्रतिशत तक पाई गई है। टीम ने किसानों को मौसम की अनुकूलता को देखते हुए इस बीमारी से बचाव के लिए प्रोपिकानाजोल 25 ईसी दवाई की एक मिली लीटर प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करने की सलाह दी है। कमेटी ने सभी किसानों को सुझाव दिया गया है कि इस दवाई का 10-15 दिन में पुन: छिड़काव करें। उन्होंने बताया कि यह दवाई कृषि विभाग और ओपन मार्केट में संबंधित दवा विक्रेताओं के पास भी उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि इस बीमारी में गेहूं की फसल के पत्तों की पिछली तरफ धारीदार पीले रंग के पत्ते हो जाते हैं और हल्दी की तरह का पाउडर निकलता है।
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