फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Kangra News ›   Vegetable production is ruined due to bad weather

Kangra News: मौसम की मार से सब्जी उत्पादन चौपट

Wed, 23 Jul 2025 01:17 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा Updated Wed, 23 Jul 2025 01:17 AM IST
विज्ञापन
Vegetable production is ruined due to bad weather
जसूर (कांगड़ा)। सब्जी उत्पादन के लिए प्रसिद्ध नूरपुर जनपद इस बार बेमौसम बारिश की चपेट में आ गया है। जसूर क्षेत्र से सटी बरंडा, रिट, सुखार, भलाख और रप्पड़ आदि पंचायतों में खेतों में जलभराव के चलते सब्जी की बेलें सड़ गईं और उत्पादन लगभग ठप हो गया। इससे न केवल किसान हताश हैं, बल्कि आम उपभोक्ता की रसोई पर भी असर पड़ा है। हर साल बरसात के मौसम में ये क्षेत्र करेला, घिया, खीरा, भिंडी, रामतोरी और पंडोल आदि की भरपूर पैदावार के लिए जाना जाता था। इनकी बिक्री पंजाब, जम्मू-कश्मीर और आसपास के राज्यों की मंडियों में खूब होती थी। विशेष रूप से खीरे की मिठास और गुणवत्ता की मांग काफी अधिक रहती थी, लेकिन इस बार मानसून समय से करीब दो सप्ताह पहले सक्रिय हो गया, जिससे भारी बारिश और जलभराव ने फसलों को तबाह कर दिया।
विज्ञापन


पानी से भरे खेतबारिश के कारण खेतों में पानी भरा रहा और उसकी निकासी न होने से सब्जियों की जड़ों को भारी नुकसान पहुंचा। बेलों पर फूल तो लग रहे हैं, लेकिन फल बनने से पहले ही झड़ रहे हैं। करेले और खीरे की फसलें समय से पहले खराब हो गईं। किसान कमल, सूरम सिंह, अशोक, प्रदीप और विजय सहित अन्य ने बताया कि जहां इस मौसम में उन्हें आमदनी का बड़ा सहारा मिलता था, इस बार उन्हें घाटा झेलना पड़ा है।
विज्ञापन

बढ़ते दामों ने बिगाड़ा बजट
कम उत्पादन का सीधा असर सब्जियों की कीमतों पर पड़ा है। भिंडी और रामतोरी 80–100 रुपये, घिया 60–80 रुपये, शिमला मिर्च और हरी बींस 120 रुपये, गोभी 100–120 रुपये और मटर 180 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। इससे आम आदमी की रसोई का बजट पूरी तरह से डगमगा गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

राहत दे सरकार : सुरेश
भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष सुरेश पठानिया ने बताया कि किसान पूरी तरह टूट चुके हैं और अब सरकार से राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं। उनका कहना है कि मौसम की मार की भरपाई के लिए तात्कालिक सहायता और मुआवजा बहुत जरूरी है।

विशेषज्ञों की सलाह
बेमौसम बरसात के चलते खेतों में पानी भरा रहा, जिससे घिये, करेले और खीरे की जड़ों को नुकसान पहुंचा। किसानों को सलाह दी जाती है कि खेतों में जल निकासी की समुचित व्यवस्था करें, ताकि बेलों को नुकसान से बचाया जा सके। डॉ. शैलेश सूद, विषयविज्ञानी, जाच्छ हॉर्टिकल्चर यूनिवर्सिटी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed