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लाहौल के जनजातीय समाज ने की थी रासबिहारी बोस की मदद : डॉ. सुनीता
Wed, 20 Nov 2024 07:30 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Wed, 20 Nov 2024 07:30 AM IST
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बोलीं, हिमाचल के असंख्य जनजातीय नायकों ने स्वतंत्रता संग्राम में किया था वीरतापूर्ण संघर्ष
केंद्रीय विश्वविद्यालय में स्वतंत्रता संग्राम के जनजातीय नायक विषय पर हुआ व्याख्यान
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मशाला। ब्रिटिश राज के खिलाफ स्वतंत्रता आंदोलन में रासबिहारी बोस रोहतांग दर्रा पार कर लाहौल के केलांग में पहुंचे थे। तब वे जनजातीय समाज से संबंधित टुकटुक लंबरदार के घर रुके थे। तब जनजातीय समाज के लोगों ने रास बिहारी बोस की काफी मदद की थी। बाद में उनकी स्मृति में प्रदेश सरकार ने 1969 में लाहौल में उनकी एक प्रतिमा भी स्थापित की। हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के जनजातीय अध्ययन केंद्र की ओर से मंगलवार को आयोजित व्याख्यान में डॉ. सुनीता ने यह बात कही।
सहायक आचार्य डॉ. सुनीता ने बताया कि ब्रिटिशर्स के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम में प्रदेश के नंत राम, जंगी राम, ठाकुर सेन नेगी, गिरिजा नेगी सहित असंख्य जनजातीय नायकों ने वीरतापूर्ण संघर्ष किया था। हिमाचल प्रदेश के इन जनजातीय नायकों पर शोध करने की आवश्यकता है, जिससे इनकी कहानियां समाज को प्रेरित करती रहें। उन्होंने बताया कि जनजातीय समुदाय समग्र भारतीय समाज की मूल आत्मा का एक अभिन्न हिस्सा रहे हैं। इनकी सभ्यता और संस्कृति उसी व्यापक सांस्कृतिक धारा का हिस्सा रहे हैं, जो भारत को उसकी विविधता में एकता की पहचान देते हैं। हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के जनजातीय अध्ययन केंद्र, इतिहास विभाग और विजुअल आर्ट्स विभाग की ओर से आयोजित भगवान बिरसा मुंडा व्याख्यानमाला के तृतीय सत्र में प्रो. मलकीत सिंह, प्रो. निरुपमा सिंह, सह आचार्य उदयभान सिंह, डॉ. जयप्रकाश सिंह, डॉ. चंद्रशेखर, करतार सिंह सहित अन्य शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने भाग लिया।
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केंद्रीय विश्वविद्यालय में स्वतंत्रता संग्राम के जनजातीय नायक विषय पर हुआ व्याख्यान
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मशाला। ब्रिटिश राज के खिलाफ स्वतंत्रता आंदोलन में रासबिहारी बोस रोहतांग दर्रा पार कर लाहौल के केलांग में पहुंचे थे। तब वे जनजातीय समाज से संबंधित टुकटुक लंबरदार के घर रुके थे। तब जनजातीय समाज के लोगों ने रास बिहारी बोस की काफी मदद की थी। बाद में उनकी स्मृति में प्रदेश सरकार ने 1969 में लाहौल में उनकी एक प्रतिमा भी स्थापित की। हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के जनजातीय अध्ययन केंद्र की ओर से मंगलवार को आयोजित व्याख्यान में डॉ. सुनीता ने यह बात कही।
सहायक आचार्य डॉ. सुनीता ने बताया कि ब्रिटिशर्स के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम में प्रदेश के नंत राम, जंगी राम, ठाकुर सेन नेगी, गिरिजा नेगी सहित असंख्य जनजातीय नायकों ने वीरतापूर्ण संघर्ष किया था। हिमाचल प्रदेश के इन जनजातीय नायकों पर शोध करने की आवश्यकता है, जिससे इनकी कहानियां समाज को प्रेरित करती रहें। उन्होंने बताया कि जनजातीय समुदाय समग्र भारतीय समाज की मूल आत्मा का एक अभिन्न हिस्सा रहे हैं। इनकी सभ्यता और संस्कृति उसी व्यापक सांस्कृतिक धारा का हिस्सा रहे हैं, जो भारत को उसकी विविधता में एकता की पहचान देते हैं। हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के जनजातीय अध्ययन केंद्र, इतिहास विभाग और विजुअल आर्ट्स विभाग की ओर से आयोजित भगवान बिरसा मुंडा व्याख्यानमाला के तृतीय सत्र में प्रो. मलकीत सिंह, प्रो. निरुपमा सिंह, सह आचार्य उदयभान सिंह, डॉ. जयप्रकाश सिंह, डॉ. चंद्रशेखर, करतार सिंह सहित अन्य शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने भाग लिया।
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