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निर्वासन में तिब्बतियों ने खड़ी की मजबूत लोकतांत्रिक व्यवस्था : पेंपा सेरिंग

Thu, 03 Sep 2026 06:32 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 03 Sep 2026 06:32 AM IST
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Tibetans have built a robust democratic system in exile: Penpa Tsering
मैक्लोडगंज में तिब्बती लोकतंत्र की 66वीं वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम में संबो​धित करते डायलॉग
धर्मशाला। केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (सीटीए) के अध्यक्ष पेंपा सेरिंग ने कहा कि पिछले 66 वर्षों में धर्मगुरु दलाई लामा के मार्गदर्शन में तिब्बतियों ने निर्वासन में एक मजबूत लोकतांत्रिक व्यवस्था खड़ी की है। लोकतंत्र तिब्बतियों की सबसे बड़ी ताकत और अधिनायकवाद के खिलाफ सबसे प्रभावी जवाब है।
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वे बुधवार को मैक्लोडगंज स्थित मुख्य बौद्ध मंदिर में तिब्बती लोकतंत्र दिवस की 66वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे। दलाई लामा के धर्मशाला लौटने की पूर्व संध्या पर आयोजित कार्यक्रम में सीटीए नेतृत्व, कर्मचारियों, मठवासी संस्थानों, विद्यार्थियों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
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सिक्योंग पेंपा सेरिंग ने समुदाय से लोकतांत्रिक संस्थाओं को सुदृढ़ करने, आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर एकजुट रहने और अपनी भाषा, संस्कृति व पहचान के संरक्षण के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया। समारोह में सीटीए के दो दीर्घकालिक कर्मचारियों को 25 वर्ष की सेवा पूरी करने पर सम्मानित किया गया।
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वहीं, सात पीएचडी शोधार्थियों को 20-20 हजार रुपये की सहायता राशि और बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 10 मेधावी विद्यार्थियों को गदेन फोद्रांग पुरस्कार प्रदान किए गए। इनमें 95 प्रतिशत से अधिक अंक लाने वाले चार विद्यार्थियों को उत्कृष्टता पुरस्कार मिला। कार्यक्रम के दौरान तिब्बती लोकतंत्र से संबंधित पुस्तकों का विमोचन हुआ और कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं।


चीन की सत्ता हिंसा पर निर्भर : वांग डैन
समारोह के मुख्यातिथि 1989 के तियानमेन चौक आंदोलन के प्रमुख कार्यकर्ता और डायलॉग चाइना के संस्थापक वांग डैन रहे। उन्होंने कहा कि निर्वासन में लोकतांत्रिक व्यवस्था स्थापित कर तिब्बतियों ने विश्व के सामने मिसाल पेश की है। दलाईलामा द्वारा राजनीतिक शक्तियों का क्रमिक हस्तांतरण और सिक्योंग व निर्वासित संसद का प्रत्यक्ष चुनाव ऐतिहासिक कदम हैं। वांग डैन ने चीनी कम्युनिस्ट पार्टी पर प्रहार करते हुए कहा कि बीजिंग की सत्ता हिंसा, झूठ और नियंत्रण पर टिकी है, जबकि तिब्बती व्यवस्था जनता के विश्वास और लोकतांत्रिक वैधता पर आधारित है। उन्होंने बताया कि निर्वासित चीनी लोकतंत्र समर्थक चीन कांग्रेस स्थापित करने की तैयारी में हैं, जिसमें एक हजार से अधिक संस्थापक निर्वाचकों ने भाग लिया है। भविष्य के लोकतांत्रिक चीन में तिब्बती पहचान, धर्म, संस्कृति और भाषा का पूरा सम्मान होना चाहिए।
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