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Kangra News: थायराइड टेस्ट की मशीन खराब, क्रस्ना लैब में तीसरे दिन मिल रही रिपोर्ट
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मंडी। बजट का अभाव सेहत के लिए चुनौती बन रहा है। जोनल अस्पताल मंडी की सरकारी लैब में लंबे समय से थायराइड, एंटीबॉडी और गठिया रोग से संबंधित टेस्टों की सुविधा मरीजों को नहीं मिल पा रही है। एंटी सीसीपी टेस्ट यानी की सुविधा न होने से मरीजों को निजी लैब और निजी अस्पतालों में महंगे दामों पर टेस्ट करवाने पड़ रहे हैं। गठिया और थायराइड से ग्रसित रोजाना कई मरीज अस्पताल पहुंचते हैं लेकिन इन रोेगों से संबंधित टेस्ट की सुविधा अस्पताल में नहीं मिल रही है। इसके चलते ये मरीज क्रस्ना लैब में टेस्ट करवाते हैं। यहां कुछ औपचारिकताओं के बाद मरीजों को थायराइड टेस्ट सुविधा मिल रही है लेकिन उसकी रिपोर्ट के लिए मरीजों को 3-4 दिन का इंतजार करना पड़ता है क्योंकि टेस्ट जांच के लिए कंपनी की ओर से सैंपल को किसी दूसरी लैब में भेजा जाता है। एमएस डॉ. धर्म सिंह वर्मा का कहना है कि थायराइड मशीन को दुरुस्त करवाने के लिए संबंधित कंपनी को कई बार पत्राचार किया है। कंपनी की ओर से भेजे इंजीनियर मशीन को दुरुस्त करने के लिए लाखों का बजट बता रहे हैं। थायराइड व एंटी सीसीपी टेस्ट को लेकर विभागीय पत्राचार चल रहा है।
बजट न होने के कारण बेकार पड़ी मशीन
जोनल अस्पताल मंडी में लंबे समय से थायराइड टेस्ट की मशीन खराब पड़ी है। इसको दुरुस्त करवाने में अस्पताल प्रबंधन बजट का रोना रो रहा है। प्रबंधन का कहना है कि संबंधित कंपनी के इंजीनियर इसे दुरुस्त करने के लिए लाखों का बजट बनाते हैं, जबकि उसमें कुछ राशि और डालकर अस्पताल के लिए नई मशीन खरीदी जा सकती है। उधर, एंटीबॉडी व गठिया रोग से संबंधित एंटी सीसीपी टेस्ट के लिए मरीजों को 15 किलोमीटर दूर नेरचौक या फिर आईजीएमसी शिमला व चंडीगढ़ के चक्कर काटने पड़ते हैं।
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बजट न होने के कारण बेकार पड़ी मशीन
जोनल अस्पताल मंडी में लंबे समय से थायराइड टेस्ट की मशीन खराब पड़ी है। इसको दुरुस्त करवाने में अस्पताल प्रबंधन बजट का रोना रो रहा है। प्रबंधन का कहना है कि संबंधित कंपनी के इंजीनियर इसे दुरुस्त करने के लिए लाखों का बजट बनाते हैं, जबकि उसमें कुछ राशि और डालकर अस्पताल के लिए नई मशीन खरीदी जा सकती है। उधर, एंटीबॉडी व गठिया रोग से संबंधित एंटी सीसीपी टेस्ट के लिए मरीजों को 15 किलोमीटर दूर नेरचौक या फिर आईजीएमसी शिमला व चंडीगढ़ के चक्कर काटने पड़ते हैं।
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