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Kangra News: चिकित्सकों का इंतजार बढ़ा रहा मर्ज, रोते बीमार बच्चे संभाला हुए मुश्किल

Wed, 28 Feb 2024 02:33 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा Updated Wed, 28 Feb 2024 02:33 AM IST
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The wait for doctors is increasing, it is difficult to handle crying sick children
धर्मशाला। चिकित्सकों के इंतजार में बीमार रोते बच्चों को संभालने में माताओं को मंगलवार को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। मंगलवार सुबह 9:30 से 12 बजे तक माताओं ने अपने बच्चों को बहला फुसला कर टाला। अस्पताल में आए बूढ़े मरीजों को लंबे समय तक एक जगह बैठने पर दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई मरीजों ने व्हीलचेयर में टूटी टांग के साथ डॉक्टरों का इंतजार किया। साथ ही कई मरीजाें ने लंबे इंतजार के बाद निजी अस्पतालों का रुख कर लिया। कई मरीज अपने तीमारदारों संग घर वापस लौट गए।
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क्षेत्रीय अस्पताल में पेनडाउन हड़ताल के आठवें दिन भी अस्पताल में सुबह 9:30 बजे से 12 बजे तक मरीजों की भीड़ लगी रही, जिसमें बहुत से मरीजों को इंतजार करना पड़ा। मंगलवार को अस्पताल में लगभग 800 की ओपीडी रही है। मरीजों और तीमारदारों की भीड़ के कारण अस्पताल में काफी हलचल रही।
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बाक्स:
घरोह से रमा ने बताया कि वह सुबह 9:30 से अपने बीमार बच्चे की जांच करवाने आई थी परंतु हड़ताल के कारण उन्हें काफी समय तक डॉक्टरों का इंतजार करना पड़ा। उनका कहना है कि वह अपने बच्चे का इलाज बाल चिकित्सक से लंबे समय से करवा रही है परंतु लंबे समय के इंतजार के समय उनके बच्चे ने उन्हें काफी परेशान किया।
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सिहुंता से प्रीतम चंद ने बताया कि वह सुबह 10 बजे से अस्पताल में एक स्थान में बैठ कर अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। हड़ताल के कारण उन्हें उनके कामकाज में भी देरी हुई। उन्होंने बताया कि वह सुबह उठते से ही अस्पताल के लिए निकले हैं, लेकिन हड़ताल से अनजान होने के कारण उन्हें परेशानी हुई।
चीलगाड़ी से प्रकाश सिंह अपने पोते के कान की जांच के लिए सुबह 9 बजे से अस्पताल पहुंचे हुए थे, जिससे उन्हें काफी समय तक इंतजार करना पड़ा। उनका कहना है कि इतनी देर इंतजार करना उन्हें समय की बर्बादी प्रतीत हुई।

चंतड़ु से सन्नी अपनी टूटी टांग की जांच करवाने के लिए सुबह 9 बजे से अस्पताल पंहुचे थे, परंतु हड़ताल के कारण भीड़ में उन्हें अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा। व्हीलचेयर में बैठे सन्नी ने तीन घंटे भीड़ में अपनी टांग को बचाते इंतजार किया।


घरोह से हुकुम चंद ने बताया कि सुबह 8 बजे से वह अपनी आंखों की जांच करवाने आए हैं परंतु हड़ताल के कारण उन्हें लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा। 80 वर्ष के हुकुम चंद का कहना है कि बुढ़ापे के कारण लंबे समय तक बैठा नहीं जाता।
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