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Kangra News: त्रिलोकपुर मंदिर में आसान नहीं होगी भक्तों की राह

Mon, 22 Jul 2024 04:55 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा Updated Mon, 22 Jul 2024 04:55 AM IST
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The path of devotees will not be easy in Trilokpur temple
कोटला (कांगड़ा)। भगवान शिव के सावन माह शुरू हो गया और हर सोमवार को त्रिलोकपुर के प्राकृतिक शिव मंदिर में भोलेनाथ के दर पर भक्तों की श्रद्धा का महासागर उमड़ता है। इस बार शिव भक्तों की डगर आसान नहीं होगी। फोरलेन के निर्माण कार्य के चलते मंदिर का जाने वाले रास्ता ध्वस्त हो गया था और भक्तों का आने के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
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मंदिर के वरिष्ठ पुजारी महंत अविनाश गिर ने बताया कि फोरलेन निर्माण कार्य के दौरान मंदिर का रास्ता ध्वस्त हो गया था और फोरलेन निर्माण कंपनी ने नया रास्ता बनाने का वादा किया था। अब नए पुल सहित फोरलेन निर्माण कार्य भी लगभग पूरा हो गया है, लेकिन अभी तक मंदिर के लिए रास्ते का निर्माण कार्य नहीं हुआ है, लोग उबड़-खाबड़ रास्ते से मंदिर में पहुंच रहे हैं, जो कि लगातार धंस रहा है। इससे कभी भी कोई अनहोनी हो सकती है। उन्होंने प्रशासन से मंदिर के लिए रास्ते का निर्माण शीघ्र करने की मांग की है। फोरलेन निर्माण कंपनी के अधिकारी राजेश नैयर ने बताया कि फिलहाल रास्ते को लोगों के जाने के अनुरूप समतल कर दिया जाएगा और रास्ते का निर्माण कार्य पूरा होने में कुछ समय लगेगा।
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यह है दंतकथा
कहते हैं कि सतयुग में एक बार भगवान शंकर इस गुफा में एकांत पाकर तपस्या में लीन थे। जिस स्थान पर भोले शंकर बैठे थे, वहां दो सोने के स्तंभ थे। उनके आसपास सोना बिखरा पड़ा था। भगवान शिव के सिर पर सैकड़ों मुख वाला सर्प छतर की भांति उन्हें सुरक्षा प्रदान कर रहा था। भगवान शिव घोर तपस्या में लीन थे। अचानक एक गडरिया अपनी भेड़ों को चराता हुआ उधर आ निकला। उसने गुफा में साधु को तपस्या में लीन पाया और यह भी देखा कि साधु के चारों ओर सोना बिखरा पड़ा है। उसके मन में लालच आ गया। उसने सोचा साधु तो तपस्या में लीन है क्यों न सोना उठाकर ले जाऊं। गडरिए ने आसपास बिखरा सोना समेटा, लेकिन इससे उसका लालच और भी बढ़ गया और सोना निकालने के लिए उसने भगवान शंकर के साथ खड़े दोनों स्वर्ण के स्तंभों से भी सोना निकालना आरंभ कर दिया। इससे भगवान शंकर की तपस्या भंग हो गई। भगवान ने विचार किया कि जब सतयुग में आदमी का लालच इतना अधिक बढ़ गया तो फिर कलियुग में क्या हाल होगा। उन्होंने गडरिए को पत्थर होने का श्राप दे दिया। जो आज भी उसी मुद्रा में गुफा में मौजूद है। लोगों का मानना है कि भगवान शिव के ऊपर लटकने वाले सांपों के मुख से उस समय दूध टपकता था जो आज पानी बनकर टपकता है।
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