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Kangra News: पांच दिन चलेगा गोरखाली समुदाय का टीका उत्सव
Tue, 20 Oct 2026 02:13 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Tue, 20 Oct 2026 02:13 AM IST
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सिद्धपुर (नोरबुलिंगा)। धर्मशाला क्षेत्र में गोरखाली समुदाय विजयादशमी पर्व को पारंपरिक उल्लास के साथ मनाने की तैयारियों में जुटा है। दाड़ी, खनियारा, सिद्धबाड़ी, योल, रामनगर, सिद्धपुर, चीलगाड़ी और श्याम नगर सहित 17 गांवों में बसे 25,000 से अधिक गोरखा परिवारों में उत्सव का माहौल है।
गोरखाली समुदाय के लिए दशहरा पांच दिवसीय सामाजिक और धार्मिक उत्सव है। नवरात्रि की घटस्थापना पर बोए गए जौ के जमरा (ज्वारे) की दशमी के दिन विशेष पूजा की जाती है। इस दिन परिवार के बुजुर्ग छोटे सदस्यों के माथे पर दही, चावल और लाल रंग से बना अक्षत टीका लगाते हैं।
सिर और कान पर जमरा रखकर सुख-समृद्धि व दीर्घायु का आशीर्वाद दिया जाता है। यह टीकोत्सव विजयादशमी से पूर्णिमा तक चलता है। इसमें शामिल होने के लिए बाहर रहने वाले लोग भी पैतृक गांव पहुंचते हैं।
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उत्सव के दौरान मेहमानों के लिए पारंपरिक नेपाली व्यंजन सेल रोटी और फिनी तैयार किए जाते हैं। हिमाचल पंचायत गोरखा एसोसिएशन के अध्यक्ष रविंद्र राणा ने बताया कि ब्रिटिश काल से भारतीय सेना में शौर्य का प्रतीक रहा यह समुदाय आज भी संस्कृति को सहेजे हुए है। यह पर्व नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध परंपराओं और जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम है। संवाद
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गोरखाली समुदाय के लिए दशहरा पांच दिवसीय सामाजिक और धार्मिक उत्सव है। नवरात्रि की घटस्थापना पर बोए गए जौ के जमरा (ज्वारे) की दशमी के दिन विशेष पूजा की जाती है। इस दिन परिवार के बुजुर्ग छोटे सदस्यों के माथे पर दही, चावल और लाल रंग से बना अक्षत टीका लगाते हैं।
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सिर और कान पर जमरा रखकर सुख-समृद्धि व दीर्घायु का आशीर्वाद दिया जाता है। यह टीकोत्सव विजयादशमी से पूर्णिमा तक चलता है। इसमें शामिल होने के लिए बाहर रहने वाले लोग भी पैतृक गांव पहुंचते हैं।
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उत्सव के दौरान मेहमानों के लिए पारंपरिक नेपाली व्यंजन सेल रोटी और फिनी तैयार किए जाते हैं। हिमाचल पंचायत गोरखा एसोसिएशन के अध्यक्ष रविंद्र राणा ने बताया कि ब्रिटिश काल से भारतीय सेना में शौर्य का प्रतीक रहा यह समुदाय आज भी संस्कृति को सहेजे हुए है। यह पर्व नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध परंपराओं और जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम है। संवाद