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Kangra News: सिजेरियन के बाद नवजातों को टांडा और पठानकोट ले जाने की मजबूरी
Thu, 08 Oct 2026 03:25 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Thu, 08 Oct 2026 03:25 AM IST
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जसूर (कांगड़ा)। 200 बिस्तरों के सिविल अस्पताल नूरपुर में बाल रोग विशेषज्ञ और रेडियोलॉजिस्ट की कमी के कारण स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। नियुक्ति आदेश के बावजूद दो बाल रोग विशेषज्ञों ने ज्वाइन नहीं किया है।
अस्पताल में सिजेरियन प्रसव होते हैं लेकिन इसके बाद नवजात को विशेषज्ञ उपचार की जरूरत पड़ने पर परिजनों को टांडा या पठानकोट ले जाना पड़ता है। अस्पताल में डॉक्टरों के 34 पद स्वीकृत हैं, जबकि वर्तमान में महज 19 चिकित्सक ही सेवाएं दे रहे हैं।
सिजेरियन के बाद कई बार नवजात को सांस लेने में परेशानी, कम वजन या शरीर का तापमान नियंत्रित रखने जैसी स्थिति में तत्काल बाल रोग विशेषज्ञ की जरूरत पड़ती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नूरपुर में यह सुविधा नहीं होने के कारण नवजात को दूसरे अस्पताल ले जाना पड़ता है।
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वहां वार्मर या इन्क्यूबेटर की सुविधा लेने पर परिवारों को अतिरिक्त खर्च भी उठाना पड़ता है। जानकारी के अनुसार उपलब्ध विशेषज्ञों में फिजिशियन, स्त्री रोग विशेषज्ञ, एनेस्थीसिया, ऑर्थोपेडिक्स, जनरल सर्जरी, ईएनटी, मनोचिकित्सा, माइक्रोन्यूट्रींस और फॉरेंसिक मेडिसिन के चिकित्सक शामिल हैं।
विपन महाजन, रजनीश महाजन, सौरव, डॉ. संजीव गुलेरिया सहित लोगों का कहना है कि जवाली, फतेहपुर, इंदौरा और चुवाड़ी जैसे क्षेत्रों में बाल रोग विशेषज्ञ उपलब्ध हैं, जबकि नूरपुर जैसे बड़े अस्पताल में यह सुविधा नहीं है।
नूरपुर में 50 बिस्तरों वाले मातृ एवं शिशु अस्पताल (एमसीएच) की बिल्डिंग तैयार है लेकिन विशेषज्ञ न होने के कारण इसे प्रभावी ढंग से शुरू नहीं किया गया है। अस्पताल में रोजाना 500 से अधिक मरीज पहुंचते हैं और आसपास के कई क्षेत्रों के लोग भी उपचार के लिए इसी अस्पताल पर निर्भर हैं।
14 सितंबर को नियुक्ति आदेशों के तहत नूरपुर अस्पताल के लिए दो स्त्री रोग विशेषज्ञ, दो बाल रोग विशेषज्ञ और एक मनोचिकित्सक की तैनाती के आदेश जारी हुए थे। इनमें एक स्त्री रोग विशेषज्ञ और मनोचिकित्सक ने अस्पताल में कार्यभार संभाल लिया लेकिन दोनों बाल रोग विशेषज्ञ नूरपुर अस्पताल में ज्वाइन नहीं किया। -डॉ. अनुपमा शर्मा मेडिकल सुपरिटेंडेंट, नूरपुर अस्पताल
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अस्पताल में सिजेरियन प्रसव होते हैं लेकिन इसके बाद नवजात को विशेषज्ञ उपचार की जरूरत पड़ने पर परिजनों को टांडा या पठानकोट ले जाना पड़ता है। अस्पताल में डॉक्टरों के 34 पद स्वीकृत हैं, जबकि वर्तमान में महज 19 चिकित्सक ही सेवाएं दे रहे हैं।
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सिजेरियन के बाद कई बार नवजात को सांस लेने में परेशानी, कम वजन या शरीर का तापमान नियंत्रित रखने जैसी स्थिति में तत्काल बाल रोग विशेषज्ञ की जरूरत पड़ती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नूरपुर में यह सुविधा नहीं होने के कारण नवजात को दूसरे अस्पताल ले जाना पड़ता है।
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वहां वार्मर या इन्क्यूबेटर की सुविधा लेने पर परिवारों को अतिरिक्त खर्च भी उठाना पड़ता है। जानकारी के अनुसार उपलब्ध विशेषज्ञों में फिजिशियन, स्त्री रोग विशेषज्ञ, एनेस्थीसिया, ऑर्थोपेडिक्स, जनरल सर्जरी, ईएनटी, मनोचिकित्सा, माइक्रोन्यूट्रींस और फॉरेंसिक मेडिसिन के चिकित्सक शामिल हैं।
विपन महाजन, रजनीश महाजन, सौरव, डॉ. संजीव गुलेरिया सहित लोगों का कहना है कि जवाली, फतेहपुर, इंदौरा और चुवाड़ी जैसे क्षेत्रों में बाल रोग विशेषज्ञ उपलब्ध हैं, जबकि नूरपुर जैसे बड़े अस्पताल में यह सुविधा नहीं है।
नूरपुर में 50 बिस्तरों वाले मातृ एवं शिशु अस्पताल (एमसीएच) की बिल्डिंग तैयार है लेकिन विशेषज्ञ न होने के कारण इसे प्रभावी ढंग से शुरू नहीं किया गया है। अस्पताल में रोजाना 500 से अधिक मरीज पहुंचते हैं और आसपास के कई क्षेत्रों के लोग भी उपचार के लिए इसी अस्पताल पर निर्भर हैं।
14 सितंबर को नियुक्ति आदेशों के तहत नूरपुर अस्पताल के लिए दो स्त्री रोग विशेषज्ञ, दो बाल रोग विशेषज्ञ और एक मनोचिकित्सक की तैनाती के आदेश जारी हुए थे। इनमें एक स्त्री रोग विशेषज्ञ और मनोचिकित्सक ने अस्पताल में कार्यभार संभाल लिया लेकिन दोनों बाल रोग विशेषज्ञ नूरपुर अस्पताल में ज्वाइन नहीं किया। -डॉ. अनुपमा शर्मा मेडिकल सुपरिटेंडेंट, नूरपुर अस्पताल