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दांत, बाल और नाखून को छोड़कर किसी भी अंग में हो सकती है टीबी : सीएमओ
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धर्मशाला। दांत, बाल और नाखून को छोड़कर शरीर के किसी भी हिस्से में टीबी की बीमारी हो सकती है। यह बीमारी 45 विभिन्न वर्गाें के मरीजों पर असर करती है, जिनमें बुजुर्ग सबसे ज्यादा इस बीमारी की चपेट में आते हैं। यह बात मुख्य चिकित्सा अधिकारी कांगड़ा डॉ. राजेश गुलेरी ने कही। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से टीबी की बीमारी को खत्म करने के लिए अभियान चलाया है और मरीजों की पहचान कर इलाज शुरू करवाया जा रहा है, ताकि वे आगे किसी अन्य व्यक्ति को संक्रमित न कर सकें।
उन्होंने बताया कि टीबी की बीमारी का सबसे अधिक असर मनुष्य के फेफड़ों पर पड़ता है। जिला कांगड़ा में इस वर्ष अभी तक 3,000 के करीब मरीजों को चिह्नित कर उन्हें टीबी की दवाई शुरू करवाई गई है। बीमारी पर अंकुश लगाने में इसलिए दिक्कत आ रही है, क्योंकि एक स्वस्थ्य मनुष्य में टीबी के लक्षण न होने के बाद भी उनमें टीबी का बैक्टीरिया पाया जा रहा है। ऐसे में इन स्वस्थ लोगों को यह बताना कि वे टीबी बीमारी से ग्रस्त हैं और दवाई शुरू करें, सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।
उन्होंने बताया कि 100 दिन अभियान के तहत जिला कांगड़ा में टीबी के मरीजों की पहचान के लिए कई स्वास्थ्य चिकित्सा केंद्रों में कैंपों का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें घर-द्वार पर ही उनके एक्सरे कर उनकी जांच की जा रही है।
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उन्होंने बताया कि टीबी की बीमारी का सबसे अधिक असर मनुष्य के फेफड़ों पर पड़ता है। जिला कांगड़ा में इस वर्ष अभी तक 3,000 के करीब मरीजों को चिह्नित कर उन्हें टीबी की दवाई शुरू करवाई गई है। बीमारी पर अंकुश लगाने में इसलिए दिक्कत आ रही है, क्योंकि एक स्वस्थ्य मनुष्य में टीबी के लक्षण न होने के बाद भी उनमें टीबी का बैक्टीरिया पाया जा रहा है। ऐसे में इन स्वस्थ लोगों को यह बताना कि वे टीबी बीमारी से ग्रस्त हैं और दवाई शुरू करें, सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।
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उन्होंने बताया कि 100 दिन अभियान के तहत जिला कांगड़ा में टीबी के मरीजों की पहचान के लिए कई स्वास्थ्य चिकित्सा केंद्रों में कैंपों का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें घर-द्वार पर ही उनके एक्सरे कर उनकी जांच की जा रही है।
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