{"_id":"6ab57fc8825b5a157a0f9328","slug":"state-of-urology-at-tanda-test-appointments-being-given-for-a-year-later-kangra-news-c-95-1-kng1045-257484-2026-09-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"टांडा में यूरोलॉजी का हाल: एक साल बाद की मिल रही जांच की तारीख","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
टांडा में यूरोलॉजी का हाल: एक साल बाद की मिल रही जांच की तारीख
विज्ञापन
धर्मशाला। डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल टांडा के यूरोलॉजी विभाग में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। विभाग में विशेषज्ञों की कमी के चलते ओपीडी जांच के लिए वेटिंग लिस्ट (इंतजार सूची) करीब एक साल तक पहुंच गई है। इसके चलते दूरदराज के क्षेत्रों से उम्मीद लेकर टांडा पहुंचने वाले गंभीर मरीजों की दिक्कतें बढ़ गई हैं।
मौजूदा समय में यूरोलॉजी विभाग का जिम्मा मात्र दो विशेषज्ञ चिकित्सकों के कंधों पर है। सीमित स्टाफ के कारण सप्ताह में केवल दो दिन ही ओपीडी संचालित हो पा रही है। शेष दिनों में चिकित्सक ऑपरेशनों और अन्य आपात चिकित्सा सेवाओं में व्यस्त रहते हैं। नतीजतन, नए मरीजों के साथ-साथ फॉलोअप जांच के लिए आने वाले पुराने रोगियों को भी बारी के लिए महीनों इंतजार करना पड़ रहा है।
कांगड़ा के अलावा चंबा, हमीरपुर, ऊना और मंडी जिले से प्रतिदिन सैकड़ों मरीज किडनी, मूत्राशय, प्रोस्टेट और मूत्र मार्ग की गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए टांडा आते हैं। मजबूरी में कई मरीज भारी खर्च उठाकर निजी अस्पतालों का रुख कर रहे हैं।
विज्ञापन
-- -- -- --
इन बीमारियों का होता है इलाज
यूरोलॉजी विभाग में किडनी की पथरी, प्रोस्टेट का बढ़ना, पेशाब की नली में रुकावट या संकुचन, मूत्राशय की पथरी, पेशाब में खून आना, बार-बार पेशाब की समस्या तथा प्रजनन तंत्र से जुड़े रोगों का इलाज किया जाता है। इसके अलावा किडनी, मूत्राशय और प्रोस्टेट कैंसर की जांच, सर्जरी सहित एंडोस्कोपी, सिस्टोस्कोपी व लेजर तकनीक से ऑपरेशन किए जाते हैं।
-- -- -- -- -- -
टांडा के यूरोलॉजी विभाग में वर्तमान में केवल दो विशेषज्ञ चिकित्सक ही सेवाएं दे रहे हैं। इसी कारण ओपीडी और सर्जरी की वेटिंग बढ़ रही है तथा मरीजों को लंबी तारीखें मिल रही हैं। सरकार और उच्चाधिकारियों को रिक्त पदों व इस समस्या से लिखित रूप में अवगत करवा दिया गया है। -डॉ. मिलाप शर्मा, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज टांडा
विज्ञापन
मौजूदा समय में यूरोलॉजी विभाग का जिम्मा मात्र दो विशेषज्ञ चिकित्सकों के कंधों पर है। सीमित स्टाफ के कारण सप्ताह में केवल दो दिन ही ओपीडी संचालित हो पा रही है। शेष दिनों में चिकित्सक ऑपरेशनों और अन्य आपात चिकित्सा सेवाओं में व्यस्त रहते हैं। नतीजतन, नए मरीजों के साथ-साथ फॉलोअप जांच के लिए आने वाले पुराने रोगियों को भी बारी के लिए महीनों इंतजार करना पड़ रहा है।
विज्ञापन
कांगड़ा के अलावा चंबा, हमीरपुर, ऊना और मंडी जिले से प्रतिदिन सैकड़ों मरीज किडनी, मूत्राशय, प्रोस्टेट और मूत्र मार्ग की गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए टांडा आते हैं। मजबूरी में कई मरीज भारी खर्च उठाकर निजी अस्पतालों का रुख कर रहे हैं।
विज्ञापन
इन बीमारियों का होता है इलाज
यूरोलॉजी विभाग में किडनी की पथरी, प्रोस्टेट का बढ़ना, पेशाब की नली में रुकावट या संकुचन, मूत्राशय की पथरी, पेशाब में खून आना, बार-बार पेशाब की समस्या तथा प्रजनन तंत्र से जुड़े रोगों का इलाज किया जाता है। इसके अलावा किडनी, मूत्राशय और प्रोस्टेट कैंसर की जांच, सर्जरी सहित एंडोस्कोपी, सिस्टोस्कोपी व लेजर तकनीक से ऑपरेशन किए जाते हैं।
टांडा के यूरोलॉजी विभाग में वर्तमान में केवल दो विशेषज्ञ चिकित्सक ही सेवाएं दे रहे हैं। इसी कारण ओपीडी और सर्जरी की वेटिंग बढ़ रही है तथा मरीजों को लंबी तारीखें मिल रही हैं। सरकार और उच्चाधिकारियों को रिक्त पदों व इस समस्या से लिखित रूप में अवगत करवा दिया गया है। -डॉ. मिलाप शर्मा, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज टांडा