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Kangra News: पितृ पक्ष कल से, चौथा और पांचवां श्राद्ध एक ही दिन
Fri, 25 Sep 2026 01:27 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Fri, 25 Sep 2026 01:27 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मशाला। हिंदू धर्म में पितरों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने और उनकी आत्मिक शांति का पावन पर्व पितृ पक्ष 26 सितंबर से शुरू होगा जो 10 अक्तूबर तक चलेगा। इन 15 दिनों में सनातन धर्मावलंबी पूर्वजों की शांति के लिए पिंडदान, तर्पण, दान-पुण्य और ब्राह्मण भोज करवाएंगे। इस वर्ष पंचांगीय गणना के अनुसार एक विशेष संयोग बन रहा है जिसके चलते चौथा और पांचवां श्राद्ध एक ही दिन यानी 30 सितंबर को किया जाएगा।
पंडित विपिन शर्मा के अनुसार, 30 सितंबर को दोपहर 2:50 बजे तक चतुर्थी तिथि रहेगी और उसके तुरंत बाद पंचमी तिथि शुरू हो जाएगी। अगले दिन पहली अक्तूबर को दोपहर के कुतुप व रौहिण मुहूर्त से पूर्व ही पंचमी समाप्त हो जाएगी। धर्मशास्त्रीय नियमों के तहत श्राद्ध कर्म दोपहर के समय ही किए जाने का विधान है, इसलिए चतुर्थी और पंचमी दोनों का श्राद्ध 30 सितंबर की दोपहर को ही संपन्न किया जाएगा। श्राद्ध और पूजा-पाठ के लिए दोपहर 12 बजे तक का समय सबसे उपयुक्त माना गया है।
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श्राद्ध कैलेंडर
26 सितंबर : पूर्णिमा श्राद्ध
27 सितंबर : पहला श्राद्ध (प्रतिपदा)
28 सितंबर : दूसरा श्राद्ध (द्वितीया)
29 सितंबर : तीसरा श्राद्ध (तृतीया)
30 सितंबर : चौथा व पांचवां श्राद्ध (चतुर्थी और पंचमी एक साथ)
1 अक्तूबर : छठा श्राद्ध (षष्ठी)
2 अक्तूबर : सातवां श्राद्ध (सप्तमी)
3 अक्तूबर : आठवां श्राद्ध (अष्टमी)
4 अक्तूबर : नौवां श्राद्ध (मातृ नवमी - दिवंगत माताओं व महिलाओं का श्राद्ध)
5 अक्तूबर : दसवां श्राद्ध (दशमी)
6 अक्तूबर : ग्यारहवां श्राद्ध (एकादशी)
7 अक्तूबर : बारहवां श्राद्ध (द्वादशी - संन्यासियों का श्राद्ध)
8 अक्तूबर : तेरहवां श्राद्ध (त्रयोदशी)
9 अक्तूबर : चौदहवां श्राद्ध (चतुर्दशी - अकाल या दुर्घटना में मृत व्यक्तियों का श्राद्ध)
10 अक्तूबर : सर्वपितृ अमावस्या (अज्ञात तिथि वाले सभी पूर्वजों का श्राद्ध)
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धर्मशाला। हिंदू धर्म में पितरों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने और उनकी आत्मिक शांति का पावन पर्व पितृ पक्ष 26 सितंबर से शुरू होगा जो 10 अक्तूबर तक चलेगा। इन 15 दिनों में सनातन धर्मावलंबी पूर्वजों की शांति के लिए पिंडदान, तर्पण, दान-पुण्य और ब्राह्मण भोज करवाएंगे। इस वर्ष पंचांगीय गणना के अनुसार एक विशेष संयोग बन रहा है जिसके चलते चौथा और पांचवां श्राद्ध एक ही दिन यानी 30 सितंबर को किया जाएगा।
पंडित विपिन शर्मा के अनुसार, 30 सितंबर को दोपहर 2:50 बजे तक चतुर्थी तिथि रहेगी और उसके तुरंत बाद पंचमी तिथि शुरू हो जाएगी। अगले दिन पहली अक्तूबर को दोपहर के कुतुप व रौहिण मुहूर्त से पूर्व ही पंचमी समाप्त हो जाएगी। धर्मशास्त्रीय नियमों के तहत श्राद्ध कर्म दोपहर के समय ही किए जाने का विधान है, इसलिए चतुर्थी और पंचमी दोनों का श्राद्ध 30 सितंबर की दोपहर को ही संपन्न किया जाएगा। श्राद्ध और पूजा-पाठ के लिए दोपहर 12 बजे तक का समय सबसे उपयुक्त माना गया है।
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श्राद्ध कैलेंडर
26 सितंबर : पूर्णिमा श्राद्ध
27 सितंबर : पहला श्राद्ध (प्रतिपदा)
28 सितंबर : दूसरा श्राद्ध (द्वितीया)
29 सितंबर : तीसरा श्राद्ध (तृतीया)
30 सितंबर : चौथा व पांचवां श्राद्ध (चतुर्थी और पंचमी एक साथ)
1 अक्तूबर : छठा श्राद्ध (षष्ठी)
2 अक्तूबर : सातवां श्राद्ध (सप्तमी)
3 अक्तूबर : आठवां श्राद्ध (अष्टमी)
4 अक्तूबर : नौवां श्राद्ध (मातृ नवमी - दिवंगत माताओं व महिलाओं का श्राद्ध)
5 अक्तूबर : दसवां श्राद्ध (दशमी)
6 अक्तूबर : ग्यारहवां श्राद्ध (एकादशी)
7 अक्तूबर : बारहवां श्राद्ध (द्वादशी - संन्यासियों का श्राद्ध)
8 अक्तूबर : तेरहवां श्राद्ध (त्रयोदशी)
9 अक्तूबर : चौदहवां श्राद्ध (चतुर्दशी - अकाल या दुर्घटना में मृत व्यक्तियों का श्राद्ध)
10 अक्तूबर : सर्वपितृ अमावस्या (अज्ञात तिथि वाले सभी पूर्वजों का श्राद्ध)