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Kangra News: कॉरपोरेट भारत छोड़ों के नारे... धर्मशाला में गरजे किसान
Tue, 11 Aug 2026 08:55 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Tue, 11 Aug 2026 08:55 AM IST
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धर्मशाला में मांगों को लेकर रैली निकालकर प्रदर्शन करते हुए किसान सभा के सदस्य। अमर उजाला
धर्मशाला। कॉरपोरेट भारत छोड़ो के नारे के साथ संयुक्त किसान मोर्चा और अखिल भारतीय किसान सभा के आह्वान पर सोमवार को हिमाचल और जम्मू-कश्मीर के सांबा जिला कमेटी के कार्यकर्ताओं ने धर्मशाला में रैली निकाली। किसान सभा के सदस्यों ने डाकघर परिसर से उपायुक्त कार्यालय तक रोष रैली निकाली और केंद्र व राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
इसके उपरांत एडीसी कांगड़ा के माध्यम से देश के राष्ट्रपति को अपनी मांगों का एक ज्ञापन पत्र सौंपा। रैली की अगुवाई कर रहे राज्य कमेटी सदस्य शोकीन कपूर, जिला अध्यक्ष जगदीश, धर्मशाला ब्लॉक अध्यक्ष प्रताप सिंह और साहित्यकार पंकज दर्शी ने बताया कि 28 व 29 जुलाई को दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय अधिवेशन में विदेशी कंपनियों और बड़े कॉरपोरेट घरानों के खिलाफ कॉरपोरेट भारत छोड़ो का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया था।
किसान नेताओं ने कहा कि 9 अगस्त 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन की तर्ज पर ही देश के प्राकृतिक और कृषि संसाधनों को कॉरपोरेट हाथों में जाने से बचाने के लिए एक और देशव्यापी आंदोलन की जरूरत है। किसान नेताओं ने हिमाचल प्रदेश में किसानों के पुश्तैनी कब्जों को तुरंत नियमित करने, वन संरक्षण कानून 1980 में आवश्यक संशोधन करने तथा भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते को रद्द करने की मांग रखी।
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इसके साथ ही सभी फसलों के लिए ‘सी-2 प्लस 50 फीसदी’ के फॉर्मूले से की कानूनी गारंटी देने, किसान आत्महत्या मामलों में पीड़ित परिवार को 25 लाख रुपये मुआवजा देने, चारों श्रम संहिताओं को रद्द करने और श्रमिकों के लिए 42 हजार रुपये प्रतिमाह न्यूनतम वेतन तय करने की बात कही। किसान संगठनों ने एफसीआई को मजबूत करने, कृषि में एफडीआई पर रोक लगाने, बिजली संशोधन विधेयक 2025 को निरस्त करने और स्मार्ट मीटर जबरन लगाने की प्रक्रिया को तुरंत बंद करने की मांग दोहराई।
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इसके उपरांत एडीसी कांगड़ा के माध्यम से देश के राष्ट्रपति को अपनी मांगों का एक ज्ञापन पत्र सौंपा। रैली की अगुवाई कर रहे राज्य कमेटी सदस्य शोकीन कपूर, जिला अध्यक्ष जगदीश, धर्मशाला ब्लॉक अध्यक्ष प्रताप सिंह और साहित्यकार पंकज दर्शी ने बताया कि 28 व 29 जुलाई को दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय अधिवेशन में विदेशी कंपनियों और बड़े कॉरपोरेट घरानों के खिलाफ कॉरपोरेट भारत छोड़ो का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया था।
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किसान नेताओं ने कहा कि 9 अगस्त 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन की तर्ज पर ही देश के प्राकृतिक और कृषि संसाधनों को कॉरपोरेट हाथों में जाने से बचाने के लिए एक और देशव्यापी आंदोलन की जरूरत है। किसान नेताओं ने हिमाचल प्रदेश में किसानों के पुश्तैनी कब्जों को तुरंत नियमित करने, वन संरक्षण कानून 1980 में आवश्यक संशोधन करने तथा भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते को रद्द करने की मांग रखी।
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इसके साथ ही सभी फसलों के लिए ‘सी-2 प्लस 50 फीसदी’ के फॉर्मूले से की कानूनी गारंटी देने, किसान आत्महत्या मामलों में पीड़ित परिवार को 25 लाख रुपये मुआवजा देने, चारों श्रम संहिताओं को रद्द करने और श्रमिकों के लिए 42 हजार रुपये प्रतिमाह न्यूनतम वेतन तय करने की बात कही। किसान संगठनों ने एफसीआई को मजबूत करने, कृषि में एफडीआई पर रोक लगाने, बिजली संशोधन विधेयक 2025 को निरस्त करने और स्मार्ट मीटर जबरन लगाने की प्रक्रिया को तुरंत बंद करने की मांग दोहराई।

धर्मशाला में मांगों को लेकर रैली निकालकर प्रदर्शन करते हुए किसान सभा के सदस्य। अमर उजाला