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Kangra News: संघर्ष समिति की दो टूक, गगल में पेड़ों को काटा तो शुरू करेंगे चिपको आंदोलन
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बैठक के दौरान उपस्थित गगल हवाई अड्डा संघर्ष समिति के सदस्य। स्त्रोत-समिति
कहा, प्रदेश सरकार के पास गगल हवाई अड्डे के विस्तार की अभी तक पुख्ता रूपरेखा नहीं
मांझी खड्ड पर बनने वाले पुल की भी लगातार बदली जा रही लंबाई और चौड़ाई
संवाद न्यूज एजेंसी
गगल (कांगड़ा)। गगल एयरपोर्ट की हवाई पट्टी की जद में आने वाले पेड़ों का कटान शुरू किया तो संघर्ष सिमिति चिपको आंदोलन शुरू करेगी। इसकी जिम्मेदारी प्रदेश सरकार की होगी। यह फैसला गगल एयरपोर्ट संघर्ष समिति के प्रधान रजनीश मोना और सचिव हंसराज ने शनिवार को हुई बैठक के दौरान लिया।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार के पास गगल एयरपोर्ट के विस्तारीकरण के लेकर कोई भी योजना नहीं है। सरकार हवा में ही गगल एयरपोर्ट का विस्तार कर रही है, जबकि धरातल पर इसके विस्तार के लिए कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि गगल एयरपोर्ट के निर्माण को लेकर रोजाना नई-नई बातें सामने आ रही हैं।
इस संबंध में वैपकोस लिमिटेड ने टूरिज्म विभाग हिमाचल प्रदेश के निदेशक को अवगत करवाया है कि मांझी खड्ड पर पुल का निर्माण पहले प्लान के अनुसार 140 मीटर गुणा 380 मीटर था, जिसे कि अब वैपकोस कंपनी 350 मीटर गुणा 380 मीटर बनाने की योजना बना रही है। एक योजना में यह भी दर्शाया गया है कि पुल 100 मीटर गुणा 390 मीटर बनना है। उन्होंने कहा कि इससे पता चलता है कि प्रदेश सरकार के पास अभी भी पुल को लेकर कोई पुख्ता प्लान और दस्तावेज नहीं हैं।
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उन्होंने कहा कि अगर मांझी खड्ड पर पुल का निर्माण हुआ भी तो उसे भरने के लिए करोड़ों घन फीट मलबे की जरूरत होगी, जिसके लिए अन्य स्थानों पर अधिग्रहण किया जाएगा, जो कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाएगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की यह भी रिपोर्ट है कि हवाई अड्डा का अभी कोई भी प्लान केंद्रीय संस्थाओं की ओर से स्वीकृत नहीं किया गया है।
उन्होंने कहा कि सूचना है कि एयरपोर्ट की रेंज में आनी वाले तीन बड़ी पहाड़ियों की चोटियों को भी काटा जाएगा, जिसके लिए प्रदेश सरकार से मंजूरी चाहिए। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के लोग एयरपोर्ट के विस्तारीकरण के पक्ष में नहीं हैं। ऐसे में प्रदेश सरकार को अपना हठ छोड़ कर लोगों की भलाई के लिए सोचना चाहिए।
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मांझी खड्ड पर बनने वाले पुल की भी लगातार बदली जा रही लंबाई और चौड़ाई
संवाद न्यूज एजेंसी
गगल (कांगड़ा)। गगल एयरपोर्ट की हवाई पट्टी की जद में आने वाले पेड़ों का कटान शुरू किया तो संघर्ष सिमिति चिपको आंदोलन शुरू करेगी। इसकी जिम्मेदारी प्रदेश सरकार की होगी। यह फैसला गगल एयरपोर्ट संघर्ष समिति के प्रधान रजनीश मोना और सचिव हंसराज ने शनिवार को हुई बैठक के दौरान लिया।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार के पास गगल एयरपोर्ट के विस्तारीकरण के लेकर कोई भी योजना नहीं है। सरकार हवा में ही गगल एयरपोर्ट का विस्तार कर रही है, जबकि धरातल पर इसके विस्तार के लिए कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि गगल एयरपोर्ट के निर्माण को लेकर रोजाना नई-नई बातें सामने आ रही हैं।
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इस संबंध में वैपकोस लिमिटेड ने टूरिज्म विभाग हिमाचल प्रदेश के निदेशक को अवगत करवाया है कि मांझी खड्ड पर पुल का निर्माण पहले प्लान के अनुसार 140 मीटर गुणा 380 मीटर था, जिसे कि अब वैपकोस कंपनी 350 मीटर गुणा 380 मीटर बनाने की योजना बना रही है। एक योजना में यह भी दर्शाया गया है कि पुल 100 मीटर गुणा 390 मीटर बनना है। उन्होंने कहा कि इससे पता चलता है कि प्रदेश सरकार के पास अभी भी पुल को लेकर कोई पुख्ता प्लान और दस्तावेज नहीं हैं।
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उन्होंने कहा कि अगर मांझी खड्ड पर पुल का निर्माण हुआ भी तो उसे भरने के लिए करोड़ों घन फीट मलबे की जरूरत होगी, जिसके लिए अन्य स्थानों पर अधिग्रहण किया जाएगा, जो कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाएगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की यह भी रिपोर्ट है कि हवाई अड्डा का अभी कोई भी प्लान केंद्रीय संस्थाओं की ओर से स्वीकृत नहीं किया गया है।
उन्होंने कहा कि सूचना है कि एयरपोर्ट की रेंज में आनी वाले तीन बड़ी पहाड़ियों की चोटियों को भी काटा जाएगा, जिसके लिए प्रदेश सरकार से मंजूरी चाहिए। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के लोग एयरपोर्ट के विस्तारीकरण के पक्ष में नहीं हैं। ऐसे में प्रदेश सरकार को अपना हठ छोड़ कर लोगों की भलाई के लिए सोचना चाहिए।