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रेडीमेड कपड़ा व्यापारी बोले, सरकार का जीएसटी बढ़ाना नहीं है न्यायसंगत
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धर्मशाला। जनवरी 2022 से जीएसटी परिषद की रेडीमेड कपड़ों पर इनवटेंड ड्यूटी स्ट्रक्चर में सुधार की घोषणा के बाद कपड़ा कारोबारियों में भारी रोष है। इससे एक हजार रुपये से कम कीमत वाले रेडीमेड गारमेंट (सिले वस्त्र) महंगे हो जाएंगे। दुकानदारों के साथ अब ग्राहकों को रेडीमेड कपड़ों के अधिक दाम चुकाने होंगे। पहले कोरोना लॉकडाउन में दुकानें बंद होने और इसके बाद कारोबार में मंदी के चलते कारोबार पहले ही 10 से 20 फीसदी रह गया था। अब जब हालात सामान्य होने के साथ कारोबार पटरी पर लौटने लगा था तो जीएसटी परिषद के इस निर्णय ने रेडीमेड गारमेंट और कपड़ा कारोबारियों को झटका दिया है।
जीएसटी बढ़ाने के फैसले को लिया जाए वापस
कोतवाली बाजार व्यापार मंडल के प्रधान नरेंद्र जंबाल ने कहा कि पेट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोतरी से पहले ही सभी चीजों के दाम बढ़े हैं और अब कपड़े महंगे होने से कारोबारियों के साथ आम लोगों को अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। कोरोना के कारण पहले ही रेडीमेड गारमेंट और कपड़ा कारोबार मंदी के दौर से गुजर रहा है। सरकार इस फैसले को वापस लेकर कपड़ा कारोबारियों को राहत नहीं देती है तो उन्हें मजबूरन सड़कों पर उतरना पड़ेगा।
जीएसटी में वृद्धि करने को कोई मतलब नहीं
शिल्ला स्थित लव गारमेंट के मालिक विकास ठाकुर ने कहा कि अगस्त माह में सरकार को सबसे ज्यादा जीएसटी आया है और इसके बाद दोबारा जीएसटी में वृद्धि करने को कोई मतलब नहीं बनता है। रेडीमेड कपड़ा पर जीएसटी में बढ़ोतरी करने से केंद्र सरकार आम आदमी पर अतिरिक्त दबाव डाल रही है।
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जीएसटी थोपने को निर्णय पूरी तरह गलत
धर्मशाला में गुरुद्वारा रोड पर दुकान चलाने वाले मनीष अरोड़ा ने कहा कि रेडीमेड कपड़ों का कारोबार पहले ही मंदी के दौर से गुजर रहा है। कोरोना काल के बाद बाजार में रेडीमेड कपड़ों को 10 से 15 फीसदी ही काम रहा है। उस पर अब जीएसटी थोपने को निर्णय गलत है। सरकार को रेडीमेड कपड़ा कारोबारियों के बारे में सोचना चाहिए और इस निर्णय को जल्द वापस लेना चाहिए।
मंदी के दौर से गुजर रही कपड़ा कारोबार
राहुल गारमेंट के मालिक राहुल भाटिया का कहना है कि कपड़ों पर जीएसटी बढ़ाना न्यायसंगत नही है। कोरोना के कारण कपड़ा कारोबार पहले ही मंदी की मार झेल रहा है और अब जीएसटी को बढ़ाने से कारोबारियों की कमर तोड़ने वाला काम किया जा रहा है। इसके अलावा आम लोगों का भी अब ज्यादा पैसे देने होंगे।
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जीएसटी बढ़ाने के फैसले को लिया जाए वापस
कोतवाली बाजार व्यापार मंडल के प्रधान नरेंद्र जंबाल ने कहा कि पेट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोतरी से पहले ही सभी चीजों के दाम बढ़े हैं और अब कपड़े महंगे होने से कारोबारियों के साथ आम लोगों को अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। कोरोना के कारण पहले ही रेडीमेड गारमेंट और कपड़ा कारोबार मंदी के दौर से गुजर रहा है। सरकार इस फैसले को वापस लेकर कपड़ा कारोबारियों को राहत नहीं देती है तो उन्हें मजबूरन सड़कों पर उतरना पड़ेगा।
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जीएसटी में वृद्धि करने को कोई मतलब नहीं
शिल्ला स्थित लव गारमेंट के मालिक विकास ठाकुर ने कहा कि अगस्त माह में सरकार को सबसे ज्यादा जीएसटी आया है और इसके बाद दोबारा जीएसटी में वृद्धि करने को कोई मतलब नहीं बनता है। रेडीमेड कपड़ा पर जीएसटी में बढ़ोतरी करने से केंद्र सरकार आम आदमी पर अतिरिक्त दबाव डाल रही है।
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जीएसटी थोपने को निर्णय पूरी तरह गलत
धर्मशाला में गुरुद्वारा रोड पर दुकान चलाने वाले मनीष अरोड़ा ने कहा कि रेडीमेड कपड़ों का कारोबार पहले ही मंदी के दौर से गुजर रहा है। कोरोना काल के बाद बाजार में रेडीमेड कपड़ों को 10 से 15 फीसदी ही काम रहा है। उस पर अब जीएसटी थोपने को निर्णय गलत है। सरकार को रेडीमेड कपड़ा कारोबारियों के बारे में सोचना चाहिए और इस निर्णय को जल्द वापस लेना चाहिए।
मंदी के दौर से गुजर रही कपड़ा कारोबार
राहुल गारमेंट के मालिक राहुल भाटिया का कहना है कि कपड़ों पर जीएसटी बढ़ाना न्यायसंगत नही है। कोरोना के कारण कपड़ा कारोबार पहले ही मंदी की मार झेल रहा है और अब जीएसटी को बढ़ाने से कारोबारियों की कमर तोड़ने वाला काम किया जा रहा है। इसके अलावा आम लोगों का भी अब ज्यादा पैसे देने होंगे।