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Kangra News: रेडियोलॉजिस्ट तैनात, फिर भी अल्ट्रासाउंड सेवा बंद
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धर्मशाला। नागरिक अस्पताल कांगड़ा में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली से मरीजों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति होने के बावजूद करीब सात माह से अल्ट्रासाउंड सुविधा बंद पड़ी है। अल्ट्रासाउंड मशीन लंबे समय से खराब है। अब तक न तो उसकी मरम्मत करवाई जा सकी है और न ही नई मशीन उपलब्ध हो पाई है।
अस्पताल में करीब पांच वर्षों तक रेडियोलॉजिस्ट का पद रिक्त रहा। नवंबर, 2025 में विशेषज्ञ डॉक्टर की तैनाती के बाद लोगों को उम्मीद थी कि अल्ट्रासाउंड सेवा शुरू होगी और मरीजों को टांडा या निजी जांच केंद्रों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। स्थिति यह है कि विशेषज्ञ डॉक्टर होने के बावजूद रेडियोलॉजिस्ट फिलहाल केवल सामान्य ओपीडी सेवाएं ही दे पा रहीं हैं। अल्ट्रासाउंड सुविधा बंद होने से सबसे ज्यादा दिक्कत गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को उठानी पड़ रही है। मरीजों को मजबूरी में निजी केंद्रों पर 800 से 1000 रुपये खर्चकर जांच करवानी पड़ रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टर और आधुनिक मशीनें उपलब्ध होने के बावजूद यदि सेवाएं शुरू नहीं होंगी तो आम लोगों का भरोसा स्वास्थ्य व्यवस्था से उठ जाएगा। कई मरीजों ने आरोप लगाया कि गरीब परिवार निजी जांच केंद्रों का खर्च वहन नहीं कर पा रहे हैं जिससे उनके इलाज में देरी हो रही है।
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नई अल्ट्रासाउंड मशीन के लिए सरकार से बजट मांगा गया है। साथ ही किसी अन्य संस्थान से मशीन उपलब्ध कराने के विकल्प तलाशे जा रहे हैं। सरकार से मशीन से लिए बजट मिलने के बाद नई अल्ट्रासाउंड मशीन स्थापित कर दी जाएगी। -डॉ. विवेक करोल, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, धर्मशाला
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अस्पताल में करीब पांच वर्षों तक रेडियोलॉजिस्ट का पद रिक्त रहा। नवंबर, 2025 में विशेषज्ञ डॉक्टर की तैनाती के बाद लोगों को उम्मीद थी कि अल्ट्रासाउंड सेवा शुरू होगी और मरीजों को टांडा या निजी जांच केंद्रों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। स्थिति यह है कि विशेषज्ञ डॉक्टर होने के बावजूद रेडियोलॉजिस्ट फिलहाल केवल सामान्य ओपीडी सेवाएं ही दे पा रहीं हैं। अल्ट्रासाउंड सुविधा बंद होने से सबसे ज्यादा दिक्कत गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को उठानी पड़ रही है। मरीजों को मजबूरी में निजी केंद्रों पर 800 से 1000 रुपये खर्चकर जांच करवानी पड़ रही है।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टर और आधुनिक मशीनें उपलब्ध होने के बावजूद यदि सेवाएं शुरू नहीं होंगी तो आम लोगों का भरोसा स्वास्थ्य व्यवस्था से उठ जाएगा। कई मरीजों ने आरोप लगाया कि गरीब परिवार निजी जांच केंद्रों का खर्च वहन नहीं कर पा रहे हैं जिससे उनके इलाज में देरी हो रही है।
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नई अल्ट्रासाउंड मशीन के लिए सरकार से बजट मांगा गया है। साथ ही किसी अन्य संस्थान से मशीन उपलब्ध कराने के विकल्प तलाशे जा रहे हैं। सरकार से मशीन से लिए बजट मिलने के बाद नई अल्ट्रासाउंड मशीन स्थापित कर दी जाएगी। -डॉ. विवेक करोल, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, धर्मशाला