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Kangra News: ऋण खाता बंद पर काटते रहे प्रीमियम, अब ब्याज सहित लौटानी होगी राशि

Fri, 06 Jun 2025 01:09 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा Updated Fri, 06 Jun 2025 01:09 AM IST
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Premium kept getting deducted on closing the loan account, now the amount will have to be returned along with interest
धर्मशाला। ऋण खाता बंद होने के बाद भी उपभोक्ता से ऋण रक्षा पॉलिसी का प्रीमियम काटने पर अब कंपनी को नौ फीसदी ब्याज सहित 51,093 रुपये लौटाने होंगे। साथ ही मुआवजे के तौर पर 20 हजार रुपये और मुकद्दमा शुल्क 10 हजार रुपये देना होगा। जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा, सदस्य नारायण ठाकुर और आरती सूद की अदालत ने यह फैसला सुनाया है। आयोग के समक्ष रविकांत निवासी पंजलेहड़ तहसील नगरोटा बगवां ने दर्ज करवाई शिकायत में कहा था कि उन्होंने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की शाखा घोड़व के पास 15 लाख रुपये के गृह ऋण के लिए आवेदन किया था। इसे 16 मार्च 2023 को एसबीआई ऋण रक्षा बीमा पॉलिसी देकर ऋण जारी किया गया। इसके तहत 180 महीने की समयावधि के लिए 1500 रुपये प्रति माह के प्रीमियम पर बीमा पॉलिसी प्रदान की गई थी। इसके बाद उपभोक्ता की ओर से 3 अप्रैल, 2023 को ऋण खाता बंद कर दिया और सभी देय का भुगतान कर दिया, लेकिन खाते को बंद करने के बाद ऋण रक्षा पॉलिसी को बंद नहीं किया और मासिक प्रीमियम काटा जाता रहा।
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शिकायतकर्ता की ओर से 25 अप्रैल, 2023 को शाखा प्रबंधक एसबीआई घोड़व को ऋण रक्षा पॉलिसी को रोकने के लिए एक ईमेल भेजा क्योंकि, उन्होंने बैंक में ऋण खाता बंद कर दिया था, जिस पर भी बैंक शाखा की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया। साथ ही उनके अनुरोध पर ऋण रक्षा बीमा पॉलिसी को बंद नहीं किया गया। इसके बाद 12 जून 2023 को एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस शाखा कांगड़ा में बीमा पॉलिसी को बंद करने के लिए फॉर्म जमा किया, लेकिन पॉलिसी के दस्तावेज उन्हें बिना किसी सूचना के डाक से वापस कर दिए गए।
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इस अवधि में उनके खाते से 1,32,500 रुपये की राशि काट ली, जो एक वर्ष की समाप्ति के बाद उन्हें वापस होनी थी। शिकायतकर्ता ने कहा कि एक वर्ष की समय अवधि समाप्त होने के बाद बैंक शाखा की ओर से 50,293 रुपये शिकायतकर्ता को वापस किए और 82,207 रुपये अनुचित रूप से काट लिए। अब आयोग के समक्ष पहुंची शिकायत में सभी तथ्यों को जांचने के बाद उपभोक्ता के पक्ष में आयोग ने फैसला सुनाया।
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