फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Kangra News ›   Patients craving calcium at the doorstep of a helpless system.

Kangra News: लाचार सिस्टम की चौखट पर कैल्शियम को तरस रहे मरीज

Wed, 05 Aug 2026 05:52 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 05 Aug 2026 05:52 AM IST
विज्ञापन
Patients craving calcium at the doorstep of a helpless system.
धर्मशाला। प्रदेश के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में कैल्शियम की दवा का संकट एक साल बाद भी दूर नहीं हो पाया है। टेंडर और सप्लाई के फेर में बजट फंसने से अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों की डिस्पेंसरी में लंबे समय से गोलियां उपलब्ध नहीं हैं। एक तरफ सरकार सुरक्षित मातृत्व के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी तरफ बुनियादी दवा की सप्लाई ठप होने से मरीजों की जेब पर भारी चपत लग रही है।
विज्ञापन

डॉक्टरों द्वारा पर्चे पर दवा लिखे जाने के बाद मरीज सरकारी काउंटरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन खाली हाथ लौटने पर उन्हें मजबूरी में निजी मेडिकल स्टोरों का रुख करना पड़ रहा है। सरकारी सप्लाई ठप होने का सबसे अधिक असर गर्भवती महिलाओं पर पड़ रहा है, जिन्हें चिकित्सकीय सलाह पर नियमित कैल्शियम की आवश्यकता होती है।
विज्ञापन

महिलाएं बार-बार दवा के लिए आशा कार्यकर्ताओं से भी संपर्क कर रही हैं, लेकिन उन्हें वहां से भी निराशा ही हाथ लग रही है। वहीं, हड्डियों की समस्या और कमजोरी से जूझ रहे बुजुर्ग मरीज भी अस्पताल में दवा न मिलने के कारण बाजार से महंगी दवाइयां खरीदने को मजबूर हैं। निजी मेडिकल स्टोरों में कैल्शियम का एक पत्ता 100 से 150 रुपये में मिल रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

इस वजह से गरीब वर्ग के उन मरीजों को सबसे ज्यादा आर्थिक परेशानी उठानी पड़ रही है, जिन्हें रोजाना इसका सेवन करना पड़ता है। लगातार एक साल से प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में सप्लाई ठप रहने से स्वास्थ्य विभाग की दवा खरीद और वितरण प्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।

सरकारी अस्पतालों में कैल्शियम की दवा नहीं आ रही है। नए टेंडर कब होंगे या हो गए हैं और कब दवा आएगी, इसके बारे में उच्च अधिकारी या सरकार ही स्पष्ट जानकारी दे सकती है। -डॉ. अनुराधा शर्मा, एमएस, क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला


इसलिए जरूरी है कैल्शियम
गर्भवती महिलाओं और गर्भस्थ शिशु की हड्डियों व दांतों के विकास के लिए कैल्शियम अनिवार्य है। इसकी कमी से मां में प्री-क्लैम्पसिया (उच्च रक्तचाप) और ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डियों की कमजोरी) का खतरा बढ़ जाता है। स्तनपान कराने वाली माताओं के दूध के जरिये बच्चे तक कैल्शियम पहुंचता है। आपूर्ति न होने पर मां के शरीर की हड्डियों से कैल्शियम घुलने लगता है, जिससे भविष्य में जोड़ों के दर्द की समस्या होती है। वहीं, बढ़ती उम्र के साथ हड्डियां भुरभुरी (ऑस्टियोपोरोसिस) होने लगती हैं। नियमित कैल्शियम न मिलने से फ्रैक्चर और जोड़ों में तेज दर्द का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed