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Kangra News: सड़क हादसे में मृत व्यक्ति के परिवार को मुआवजा देने के आदेश

Sun, 24 May 2026 05:02 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 24 May 2026 05:02 AM IST
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Order to give compensation to the family of the person who died in a road accident
हैदराबाद में वर्ष 2019 में हुई थी शाहपुर के रेहलु निवासी प्रशांत की मौत
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पत्नी और बेटे को बराबर दी जाएगी राशि, नाबालिग का हिस्सा एफडी में होगा जमा
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मशाला। सड़क हादसे में मृत व्यक्ति के परिवार को अदालत ने मुआवजा देने के आदेश दिए हैं। उपमंडल शाहपुर के रेहलु निवासी प्रशांत की वर्ष 2019 में हैदराबाद में सड़क हादसे में मौत हो गई थी। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण धर्मशाला के न्यायाधीश राजेश चौहान की अदालत ने प्रशांत के परिजनों को 16,14,500 रुपये मुआवजा देने का आदेश पारित किया है। अदालत ने यह राशि 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित याचिका दायर करने की तिथि से अदा करने के निर्देश दिए हैं। मुआवजा राशि पत्नी और बेटे को बराबर दी जाएगी और नाबालिग बेटे का हिस्सा एफडी में जमा होगा। जानकारी के अनुसार मृतक प्रशांत सिंह की पत्नी और बच्चों ने मोटर वाहन अधिनियम की धारा 166 के तहत मुआवजे के लिए याचिका दायर की थी। याचिका में बताया गया कि 20 दिसंबर 2019 को तड़के लगभग चार बजे हैदराबाद के काउलीगुड़ा चमन क्षेत्र में एक तेजरफ्तार ट्रक ने प्रशांत सिंह को टक्कर मार दी थी। हादसे में उनकी मौके पर ही मौत हो गई थी। इस संबंध में थाना अफजलगंज, हैदराबाद में एफआईआर दर्ज की गई थी।
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि ट्रक चालक ने वाहन को तेज गति और लापरवाही से चलाते हुए नियंत्रण खो दिया, जिसके कारण यह दुर्घटना हुई। हादसे के बाद चालक मौके से भाग गया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी मौत का कारण दुर्घटना से लगी चोटें बताया गया। मामले की सुनवाई के दौरान ट्रक चालक और मालिक अदालत में उपस्थित नहीं हुए, जिसके चलते उन्हें एकतरफा करार दिया गया। वहीं, बीमा कंपनी टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड ने दावा याचिका का विरोध किया, लेकिन अपने पक्ष में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकी।
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अदालत ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर माना कि दुर्घटना चालक की लापरवाही के कारण हुई और मृतक के आश्रित मुआवजे के हकदार हैं। न्यायाधिकरण ने बीमा कंपनी को दो माह के भीतर पूरी राशि अदा करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने यह भी निर्देश दिए कि नाबालिग आश्रित के हिस्से की राशि राष्ट्रीयकृत बैंक में एफडीआर के रूप में जमा करवाई जाएगी, जो उसके बालिग होने तक सुरक्षित रहेगी।
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