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Kangra News: छोटा भंगाल में 35 हेक्टेयर भूमि पर लगेंगे जापानी फल के बगीचे
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धर्मशाला। जिले के दुर्गम क्षेत्र छोटा भंगाल में जापानी फल की बागवानी का विस्तार किया जाएगा। एचपी शिवा परियोजना के दूसरे चरण में 35 हेक्टेयर भूमि पर बगीचे विकसित करने की योजना है।
इसके लिए अंदरली मलां, कोठी कोहड़ और बनोग क्षेत्र का चयन किया गया है। पहले चरण में 15 हेक्टेयर भूमि पर काम किया जा चुका है। अगले साल फरवरी से जमीन समतल करने, सिंचाई और बाड़बंदी का काम शुरू होगा। दिसंबर 2027 में पौधरोपण किया जाएगा।
परियोजना का उद्देश्य किसानों को पारंपरिक खेती के साथ व्यावसायिक बागवानी से जोड़ना और उनकी आय के अतिरिक्त साधन विकसित करना है।
पहले चरण में शामिल 15 हेक्टेयर भूमि के करीब 50 फीसदी हिस्से में पौधरोपण हो चुका है। शेष क्षेत्र में दिसंबर में पौधे लगाए जाएंगे। दूसरे चरण के विस्तार से अधिक किसानों को फल उत्पादन और आधुनिक बागवानी तकनीक अपनाने का अवसर मिलेगा।
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पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में सहायक
जापानी फल को पर्सिमन भी कहा जाता है। यह अपने मीठे स्वाद और पौष्टिक गुणों के लिए जाना जाता है। विटामिन, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर यह फल स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है। इसमें मौजूद फाइबर पाचन क्रिया को बेहतर बनाने और कब्ज से बचाव में मदद कर सकता है।
दूसरे चरण में छोटा भंगाल के तीन क्षेत्रों की 35 हेक्टेयर भूमि पर जापानी फल के बगीचे विकसित करने की योजना है। इसमें भूमि विकास, सिंचाई और पौधों की सुरक्षा जैसी सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जाएगा। डॉ. अलक्ष पठानिया, उपनिदेशक, उद्यान विभाग कांगड़ा
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इसके लिए अंदरली मलां, कोठी कोहड़ और बनोग क्षेत्र का चयन किया गया है। पहले चरण में 15 हेक्टेयर भूमि पर काम किया जा चुका है। अगले साल फरवरी से जमीन समतल करने, सिंचाई और बाड़बंदी का काम शुरू होगा। दिसंबर 2027 में पौधरोपण किया जाएगा।
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परियोजना का उद्देश्य किसानों को पारंपरिक खेती के साथ व्यावसायिक बागवानी से जोड़ना और उनकी आय के अतिरिक्त साधन विकसित करना है।
पहले चरण में शामिल 15 हेक्टेयर भूमि के करीब 50 फीसदी हिस्से में पौधरोपण हो चुका है। शेष क्षेत्र में दिसंबर में पौधे लगाए जाएंगे। दूसरे चरण के विस्तार से अधिक किसानों को फल उत्पादन और आधुनिक बागवानी तकनीक अपनाने का अवसर मिलेगा।
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पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में सहायक
जापानी फल को पर्सिमन भी कहा जाता है। यह अपने मीठे स्वाद और पौष्टिक गुणों के लिए जाना जाता है। विटामिन, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर यह फल स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है। इसमें मौजूद फाइबर पाचन क्रिया को बेहतर बनाने और कब्ज से बचाव में मदद कर सकता है।
दूसरे चरण में छोटा भंगाल के तीन क्षेत्रों की 35 हेक्टेयर भूमि पर जापानी फल के बगीचे विकसित करने की योजना है। इसमें भूमि विकास, सिंचाई और पौधों की सुरक्षा जैसी सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जाएगा। डॉ. अलक्ष पठानिया, उपनिदेशक, उद्यान विभाग कांगड़ा