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Kangra News: ओबीसी आरक्षण 19 वर्ष बाद भी अधर में, महासभा ने जताया रोष
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मंदल में घृत बाहती चांग महासभा की बैठक के दौरान उपस्थित सदस्य। स्रोत: सभा
धर्मशाला। भारतीय क्षत्रीय घृत बाहती चाहंग महासभा ने आरोप लगाया कि हिमाचल प्रदेश में आज तक 20 जनवरी 2006 से प्रभावी हुए 93वें संविधान संशोधन को लागू नहीं किया गया है। 19 वर्ष गुजर जाने के बावजूद ओबीसी वर्ग की इस मूलभूत मांग को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
महासभा की धर्मशाला इकाई की बैठक रविवार को ग्राम पंचायत मंदल में अध्यक्ष सुदर्शन अंगारिया की अध्यक्षता में हुई। इसमें महासचिव अशोक काजल, कोषाध्यक्ष मदन लाल चौधरी, जियालाल, अभी चंद, श्रीचंद कमिश्नर, मोहर सिंह, रमेश चौधरी, रणजीत सिंह, मोहन सिंह सहित बड़ी संख्या में सदस्य मौजूद रहे।
बैठक में सदस्यों ने कहा कि 20 जनवरी 2006 से प्रभावी हुए 93वें संविधान संशोधन में केंद्र और राज्य सरकारों के शैक्षणिक संस्थानों में ओबीसी वर्ग को आरक्षण का प्रावधान किया गया था। मगर हिमाचल प्रदेश में आज तक इस प्रावधान को लागू नहीं किया गया। महासभा लंबे समय से संशोधन को लागू करने की मांग कर रही है, ओबीसी वर्ग की इस मूलभूत मांग को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
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महासभा ने भाजपा और कांग्रेस दोनों पर ही वादाखिलाफी का आरोप लगाया और कहा कि प्रदेश की किसी भी सरकार ने ओबीसी वर्ग के हितों को गंभीरता से नहीं लिया। बैठक में यह प्रस्ताव पारित किया गया कि मौजूदा परिस्थितियों में प्रदेश में एक थर्ड फ्रंट की आवश्यकता है, ताकि ओबीसी सहित वंचित वर्गों की आवाज को मजबूती से उठाया जा सके।
20 सितंबर को पैदल मार्च और रैली
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि प्रदेश सरकार के विरोध में 20 सितंबर को कांगड़ा से धर्मशाला तक पैदल मार्च किया जाएगा। इस दौरान एक विशाल रैली का आयोजन कर सरकार पर दबाव बनाया जाएगा। इस रैली का संचालन ओबीसी संगठन के शौरभ और चौधरी रामलाल करेंगे। महासभा के नेताओं ने कहा कि जब तक ओबीसी आरक्षण लागू नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
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महासभा की धर्मशाला इकाई की बैठक रविवार को ग्राम पंचायत मंदल में अध्यक्ष सुदर्शन अंगारिया की अध्यक्षता में हुई। इसमें महासचिव अशोक काजल, कोषाध्यक्ष मदन लाल चौधरी, जियालाल, अभी चंद, श्रीचंद कमिश्नर, मोहर सिंह, रमेश चौधरी, रणजीत सिंह, मोहन सिंह सहित बड़ी संख्या में सदस्य मौजूद रहे।
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बैठक में सदस्यों ने कहा कि 20 जनवरी 2006 से प्रभावी हुए 93वें संविधान संशोधन में केंद्र और राज्य सरकारों के शैक्षणिक संस्थानों में ओबीसी वर्ग को आरक्षण का प्रावधान किया गया था। मगर हिमाचल प्रदेश में आज तक इस प्रावधान को लागू नहीं किया गया। महासभा लंबे समय से संशोधन को लागू करने की मांग कर रही है, ओबीसी वर्ग की इस मूलभूत मांग को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
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महासभा ने भाजपा और कांग्रेस दोनों पर ही वादाखिलाफी का आरोप लगाया और कहा कि प्रदेश की किसी भी सरकार ने ओबीसी वर्ग के हितों को गंभीरता से नहीं लिया। बैठक में यह प्रस्ताव पारित किया गया कि मौजूदा परिस्थितियों में प्रदेश में एक थर्ड फ्रंट की आवश्यकता है, ताकि ओबीसी सहित वंचित वर्गों की आवाज को मजबूती से उठाया जा सके।
20 सितंबर को पैदल मार्च और रैली
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि प्रदेश सरकार के विरोध में 20 सितंबर को कांगड़ा से धर्मशाला तक पैदल मार्च किया जाएगा। इस दौरान एक विशाल रैली का आयोजन कर सरकार पर दबाव बनाया जाएगा। इस रैली का संचालन ओबीसी संगठन के शौरभ और चौधरी रामलाल करेंगे। महासभा के नेताओं ने कहा कि जब तक ओबीसी आरक्षण लागू नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।