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Kangra News: चार साल से स्थायी एक्सईएन नहीं, एक जेई के पास चार वार्ड

Wed, 12 Aug 2026 02:01 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 12 Aug 2026 02:01 AM IST
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No permanent XEN for four years; one JE handling four wards.
धर्मशाला। स्मार्ट सिटी का तमगा हासिल कर चुके धर्मशाला नगर निगम में इंजीनियरिंग विंग की व्यवस्था बदहाल बनी हुई है। नगर निगम को पिछले चार वर्षों से स्थायी अधिशासी अभियंता (एक्सईएन) नहीं मिल सका है। हालात यह हैं कि लंबे समय से हिमुडा के अधिशासी अभियंता को अतिरिक्त कार्यभार सौंपकर काम चलाया जा रहा है।
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नगर निगम के इंजीनियरिंग विंग में अधिकारियों और कर्मचारियों की इस भारी कमी का सीधा असर शहर के विकास कार्यों और आम जनता की समस्याओं के समाधान पर साफ दिखाई देने लगा है। नगर निगम बनने के बाद शहर में विकास कार्यों का दायरा तो बढ़ा, लेकिन उसके अनुरूप इंजीनियरिंग स्टाफ की व्यवस्था नहीं हो सकी।
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स्थायी अधिशासी अभियंता न होने से महत्वपूर्ण विकास कार्यों की निगरानी, तकनीकी स्वीकृतियां, टेंडर प्रक्रिया और निर्माण कार्यों की मॉनिटरिंग जैसे काम अतिरिक्त जिम्मेदारी के सहारे चल रहे हैं। इसके अलावा नगर निगम के कुल 17 वार्डों के लिए जूनियर इंजीनियर (जेई) की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। पद खाली होने से स्थिति और भी खराब हो चुकी है। वर्तमान में उपलब्ध जेई में से एक के पास चार-चार वार्डों का जिम्मा है।
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ऐसे में एक अधिकारी के लिए चार वार्डों में चल रहे विकास कार्यों, सड़कों की स्थिति, नालियों, गलियों, भवन निर्माण और अन्य तकनीकी कार्यों की नियमित निगरानी करना बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। शहर में जगह-जगह सड़क टूटने और नालियों की शिकायतें सामने आ रही हैं, लेकिन पर्याप्त तकनीकी स्टाफ न होने से निगम के लिए समय पर अधिकारी उपलब्ध कराना मुश्किल हो रहा है।
चार साल बीत जाने के बावजूद नगर निगम में स्थायी अधिशासी अभियंता की तैनाती न होने से काम काज भी प्रभावित हो रहे हैं। निगम के पास शहर के विकास से जुड़े करोड़ों रुपये के काम हैं, लेकिन इनकी तकनीकी निगरानी के लिए ही स्थायी अधिकारी उपलब्ध नहीं है।

नगर निगम शहरवासियों से विभिन्न प्रकार के टैक्स और शुल्क वसूलता है, लेकिन इंजीनियरिंग जैसे महत्वपूर्ण विभाग में पर्याप्त स्टाफ न होना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
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