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Kangra News: म्यूजियम का 22 साल से इंतजार, ‘धरोहर’ बनी शिलान्यास पट्टिका
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संग्रहालय बनाने के लिए 2003 में लगाई गई शिलान्यास पट्टिका। -संवाद
परागपुर (कांगड़ा)। देश के पहले घोषित धरोहर गांव परागपुर में एक अधूरी शिलान्यास पट्टिका अब खुद ही गांव की एक अजीबोगरीब धरोहर बन चुकी है। 22 साल पहले 13 जनवरी 2003 को लोहड़ी के भव्य समारोह में जिस संग्रहालय का सपना देखा गया था, वह आज भी एक शिलान्यास पट्टिका तक सिमटा हुआ है।
तत्कालीन केंद्रीय पर्यटन सचिव राठी झा ने बड़ी उम्मीदों के साथ इसका शिलान्यास किया था। केंद्र सरकार ने इसके लिए 25 लाख रुपये भी मंजूर किए थे। लेकिन दो दशकों से अधिक समय बीत जाने के बाद भी संग्रहालय केवल एक वादे की निशानी बनकर रह गया है, जो सरकारी उदासीनता का जीता-जागता प्रमाण है।
परागपुर अपनी प्राचीन हवेलियों, नक्काशीदार दरवाजों और ऐतिहासिक गलियों के लिए जाना जाता है, जो देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। एक संग्रहालय इन अमूल्य धरोहरों को सहेजने और गांव को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर एक विशिष्ट पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता था।
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इससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलता बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होते और हमारी समृद्ध संस्कृति अगली पीढ़ी के लिए संरक्षित रहती। मगर सरकारों की अनदेखी ने इस महत्वपूर्ण सपने को साकार होने से रोक दिया है। ग्रामीण तुरंत संग्रहालय का निर्माण शुरू करने की मांग कर रहे हैं, ताकि शिलान्यास पट्टिका केवल एक अधूरे वादे की निशानी बनकर न रह जाए, बल्कि एक जीवंत संग्रहालय के रूप ले सके।
केंद्र सरकार ने जिस नेक उद्देश्य से धन दिया था, वो अभी तक अधूरा है। हमारी मांग है कि परागपुर में म्यूजियम का निर्माण शीघ्र हो, ताकि हमारी सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी देख सके। -सुशील शर्मा, स्थानीय निवासी
यह शर्मनाक है कि एक ऐतिहासिक गांव को मिले गौरव को बनाए रखने के लिए सरकारें गंभीर नहीं हैं। केंद्र सरकार ने 2003 में धन स्वीकृत किया था, लेकिन म्यूजियम आज तक सपना बना हुआ है। -हंसराज शर्मा, स्थानीय निवासी
परागपुर की विरासत का म्यूजियम आवश्यक है। हमने कई बार सरकार और प्रशासन से आग्रह किया है, लेकिन कुछ नहीं हुआ। अब जनता में रोष बढ़ रहा है। जल्द म्यूजियम बनना चाहिए। -शिव शाह, संयोजक, युवा विकास मंडल परागपुर
म्यूजियम की जानकारी हमारे अभिलेखों में नहीं
इस मामले में जिला पर्यटन विकास अधिकारी विनय कुमार का बयान और भी चौंकाने वाला है। उन्होंने कहा कि परागपुर में किसी म्यूजियम के निर्माण की कोई जानकारी हमारे आधिकारिक अभिलेखों में उपलब्ध नहीं है। वास्तव में जब आपने इस विषय का उल्लेख किया, तभी हमें ज्ञात हुआ कि परागपुर में कोई म्यूजियम प्रस्तावित था। यह बयान सरकारी विभागों की उदासीनता और गैर-जिम्मेदारी को साफ तौर पर दिखाता है।
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तत्कालीन केंद्रीय पर्यटन सचिव राठी झा ने बड़ी उम्मीदों के साथ इसका शिलान्यास किया था। केंद्र सरकार ने इसके लिए 25 लाख रुपये भी मंजूर किए थे। लेकिन दो दशकों से अधिक समय बीत जाने के बाद भी संग्रहालय केवल एक वादे की निशानी बनकर रह गया है, जो सरकारी उदासीनता का जीता-जागता प्रमाण है।
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परागपुर अपनी प्राचीन हवेलियों, नक्काशीदार दरवाजों और ऐतिहासिक गलियों के लिए जाना जाता है, जो देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। एक संग्रहालय इन अमूल्य धरोहरों को सहेजने और गांव को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर एक विशिष्ट पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता था।
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इससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलता बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होते और हमारी समृद्ध संस्कृति अगली पीढ़ी के लिए संरक्षित रहती। मगर सरकारों की अनदेखी ने इस महत्वपूर्ण सपने को साकार होने से रोक दिया है। ग्रामीण तुरंत संग्रहालय का निर्माण शुरू करने की मांग कर रहे हैं, ताकि शिलान्यास पट्टिका केवल एक अधूरे वादे की निशानी बनकर न रह जाए, बल्कि एक जीवंत संग्रहालय के रूप ले सके।
केंद्र सरकार ने जिस नेक उद्देश्य से धन दिया था, वो अभी तक अधूरा है। हमारी मांग है कि परागपुर में म्यूजियम का निर्माण शीघ्र हो, ताकि हमारी सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी देख सके। -सुशील शर्मा, स्थानीय निवासी
यह शर्मनाक है कि एक ऐतिहासिक गांव को मिले गौरव को बनाए रखने के लिए सरकारें गंभीर नहीं हैं। केंद्र सरकार ने 2003 में धन स्वीकृत किया था, लेकिन म्यूजियम आज तक सपना बना हुआ है। -हंसराज शर्मा, स्थानीय निवासी
परागपुर की विरासत का म्यूजियम आवश्यक है। हमने कई बार सरकार और प्रशासन से आग्रह किया है, लेकिन कुछ नहीं हुआ। अब जनता में रोष बढ़ रहा है। जल्द म्यूजियम बनना चाहिए। -शिव शाह, संयोजक, युवा विकास मंडल परागपुर
म्यूजियम की जानकारी हमारे अभिलेखों में नहीं
इस मामले में जिला पर्यटन विकास अधिकारी विनय कुमार का बयान और भी चौंकाने वाला है। उन्होंने कहा कि परागपुर में किसी म्यूजियम के निर्माण की कोई जानकारी हमारे आधिकारिक अभिलेखों में उपलब्ध नहीं है। वास्तव में जब आपने इस विषय का उल्लेख किया, तभी हमें ज्ञात हुआ कि परागपुर में कोई म्यूजियम प्रस्तावित था। यह बयान सरकारी विभागों की उदासीनता और गैर-जिम्मेदारी को साफ तौर पर दिखाता है।