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जिला कांगड़ा में लड़कों से अधिक लड़कियां कुपोषित
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धर्मशाला। जिले में शून्य से पांच साल के बच्चों में लड़कों से ज्यादा लड़कियां
कुपोषण कि शिकार हैं। जिले में अप्रैल 2021 तक करीब 67,220 बच्चे शून्य से पांच साल की आयु तक के हैं, जिसमें से 3964 बच्चे कुपोषण का शिकार हुए हैं। इन कुपोषित बच्चों में से लड़कियों का आंकड़ा लड़कों से अधिक है।
महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से मिली जानकारी के अनुसार अप्रैल 2021 तक 1873 लड़कियां कुपोषित हैं, जबकी 1821 लड़के कुपोषण का शिकार हुए हैं।
बता दें कि सरकार और विभाग के तमाम प्रयासों के बावजूद इस समय जिला कांगड़ा में 5.5 प्रतिशत नन्हें बच्चे कुपोषित हैं, यानी एक हजार में से 55 बच्चे अभी भी कुपोषण से पीड़ित हो रहे हैं। इससे स्पष्ट होता है कि या तो कहीं सरकार की योजनाएं नहीं पहुंच रही हैं या फिर अभी भी लोगों में महिलाओं और समाज में जागरूकता की कमी है।
इस कारण हर साल कई बच्चों को मौत का सामना करना पड़ता है। क्योंकि बच्चों के शरीर को लंबे समय तक संतुलित आहार न मिलने से व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इस कारण वे आसानी से किसी भी बीमारी का शिकार हो सकता है।
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बता दें कि महिलाओं और समाज को कुपोषण मुक्त करने के लिए सरकार और विभाग की ओर से पहली से 30 सितंबर तक पोषण माह मनाया जा रहा है। इस दौरान विभाग की टामें और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और आशा वर्कर हर क्षेत्र में महिलाओं को पोषण के प्रति जागरूक कर रही हैं। वहीं, गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए सरकार की ओर से चलाई जा रही योजनाओं के बारे में जानकारी प्रदान की जा रही है, लेकिन आज भी कई गरीब परिवारों को इन सरकारी योजनाओं से वंचित रहना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार आज भी कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां न तो स्वास्थ्य सेवाएं सही से मिल पाती हैं और न ही सरकारी योजनाओं का लाभ मिल पाता है।
-बच्चों में कुपोषण को दूर करने के एक विशेष अभियान के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हर माह 10,11 और 12 तारीख को हर घर जाकर बच्चों के परिजनों को कुपोषण सेे दूर करने के लिए शिक्षित कर रही हैं। इसमें हर घर की परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए हर बच्चे को कुपोषण से दूर करने के उपाय बताए जा रहे हैं। इसके अलावा जिला कांगड़ा के कुल 4226 आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों का वजन और कद नापने के लिए मशीनें उपलब्ध करवा दी गई हैं, ताकी बच्चों की सही ढंग से मॉनिटरिंग हो सके। - रंजीत सिंह, जिला प्रोग्राण अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग, जिला कांगड़ा
उपमंडल वार बच्चों में कुपोषण की स्थिति
उपमंडल कुल बच्चे कुपोषित लड़के कुपोषिच लड़कियां
-----------------------------------------------
बैजनाथ 1702 25 24
भवारना - 5575 128 120
देहरा - 5454 173 155
धर्मशाला - 4795 389 376
फतेहपुर - 6884 72 79
इंदौरा - 8857 337 401
कांगड़ा - 947 52 61
लंबागांव - 3645 107 103
नगरोटा बगवां - 3795 179 151
नगरोटा सूरियां - 3851 75 88
नूरपुर - 7658 81 79
पंचरुखी - 2593 24 26
रैत - 2545 27 32
सुलह - 1703 33 41
परागपुर - 7216 119 137 ---------------------------------------------------
कुल - 67220 1821 1873
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कुपोषण कि शिकार हैं। जिले में अप्रैल 2021 तक करीब 67,220 बच्चे शून्य से पांच साल की आयु तक के हैं, जिसमें से 3964 बच्चे कुपोषण का शिकार हुए हैं। इन कुपोषित बच्चों में से लड़कियों का आंकड़ा लड़कों से अधिक है।
महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से मिली जानकारी के अनुसार अप्रैल 2021 तक 1873 लड़कियां कुपोषित हैं, जबकी 1821 लड़के कुपोषण का शिकार हुए हैं।
बता दें कि सरकार और विभाग के तमाम प्रयासों के बावजूद इस समय जिला कांगड़ा में 5.5 प्रतिशत नन्हें बच्चे कुपोषित हैं, यानी एक हजार में से 55 बच्चे अभी भी कुपोषण से पीड़ित हो रहे हैं। इससे स्पष्ट होता है कि या तो कहीं सरकार की योजनाएं नहीं पहुंच रही हैं या फिर अभी भी लोगों में महिलाओं और समाज में जागरूकता की कमी है।
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इस कारण हर साल कई बच्चों को मौत का सामना करना पड़ता है। क्योंकि बच्चों के शरीर को लंबे समय तक संतुलित आहार न मिलने से व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इस कारण वे आसानी से किसी भी बीमारी का शिकार हो सकता है।
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बता दें कि महिलाओं और समाज को कुपोषण मुक्त करने के लिए सरकार और विभाग की ओर से पहली से 30 सितंबर तक पोषण माह मनाया जा रहा है। इस दौरान विभाग की टामें और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और आशा वर्कर हर क्षेत्र में महिलाओं को पोषण के प्रति जागरूक कर रही हैं। वहीं, गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए सरकार की ओर से चलाई जा रही योजनाओं के बारे में जानकारी प्रदान की जा रही है, लेकिन आज भी कई गरीब परिवारों को इन सरकारी योजनाओं से वंचित रहना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार आज भी कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां न तो स्वास्थ्य सेवाएं सही से मिल पाती हैं और न ही सरकारी योजनाओं का लाभ मिल पाता है।
-बच्चों में कुपोषण को दूर करने के एक विशेष अभियान के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हर माह 10,11 और 12 तारीख को हर घर जाकर बच्चों के परिजनों को कुपोषण सेे दूर करने के लिए शिक्षित कर रही हैं। इसमें हर घर की परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए हर बच्चे को कुपोषण से दूर करने के उपाय बताए जा रहे हैं। इसके अलावा जिला कांगड़ा के कुल 4226 आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों का वजन और कद नापने के लिए मशीनें उपलब्ध करवा दी गई हैं, ताकी बच्चों की सही ढंग से मॉनिटरिंग हो सके। - रंजीत सिंह, जिला प्रोग्राण अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग, जिला कांगड़ा
उपमंडल वार बच्चों में कुपोषण की स्थिति
उपमंडल कुल बच्चे कुपोषित लड़के कुपोषिच लड़कियां
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बैजनाथ 1702 25 24
भवारना - 5575 128 120
देहरा - 5454 173 155
धर्मशाला - 4795 389 376
फतेहपुर - 6884 72 79
इंदौरा - 8857 337 401
कांगड़ा - 947 52 61
लंबागांव - 3645 107 103
नगरोटा बगवां - 3795 179 151
नगरोटा सूरियां - 3851 75 88
नूरपुर - 7658 81 79
पंचरुखी - 2593 24 26
रैत - 2545 27 32
सुलह - 1703 33 41
परागपुर - 7216 119 137 ---------------------------------------------------
कुल - 67220 1821 1873