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सीएम ने स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं पर तलब की रिपोर्ट
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धर्मशाला में गद्दी कल्याण बोर्ड की बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर।
- फोटो : Kangra
धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश गद्दी कल्याण बोर्ड की धर्मशाला में आयोजित बैठक में गद्दी जनजाति की संस्कृति, परंपरा और रीति-रिवाज का अस्तित्व बनाए रखने पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में सदस्यों ने कहा कि गदियाली परंपरा को शहरीकरण से बचाने के लिए गद्दी समुदाय का विकास पंचायतीराज विभाग के माध्यम से ही करवाया जाए।
बोर्ड की बैठक में अधिकतर विषय जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में सुविधाओं के अभाव से जुड़े थे। शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने चिंता जाहिर की है। इस पर उन्होंने अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की है। प्रदेश गद्दी कल्याण बोर्ड की बैठक के दौरान सदस्यों ने बताया कि धर्मशाला के खनियारा के रहने वाले बोलम राम की नौ माह पहले 295 भेड़-बकरियों की मौत हो गई थी। पटवारी ने जब रिपोर्ट बनाई तो उसमें सिर्फ 180 भेड़-बकरियों को ही दर्शाया गया था। एक भेड़ की कीमत 8000 रुपये आंकी गई थी। उस समय पोस्टमार्टम रिपोर्ट सहित सभी औपचारिकताएं पूरी की गई थीं। सदस्यों ने चिंता जताई कि आज नौ महीने बीत जाने के बाद भी बोलम राम को मुआवजा नहीं दिलाया गया है। इस पर मुख्यमंत्री ने चिंता जताई। उन्होंने डीसी कांगड़ा को जल्द पीड़ित परिवार को राहत दिलाने के निर्देश दिए। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कारण ही वर्ष 2003 में गद्दी समुदाय को विशेष जनजातीय का दर्जा दिया गया था। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि राज्य के सभी गद्दी समुदाय को पहले की तरह जनजातीय का दर्जा मिला है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1966 के बाद पंजाब से विलय होने वाले क्षेत्रों के गद्दी समुदाय को जनजातीय का दर्जा नहीं मिला। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जनजातीय क्षेत्र के लोगों को अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग में पर्याप्त प्रतिनिधित्व प्रदान करने पर विचार करेगी, ताकि अनुसूचित जनजाति की भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।
इस अवसर पर जनजातीय विकास मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा, विधायक बिक्रम सिंह जरियाल, जिया लाल कपूर, विशाल नैहरिया, वूलफेड के अध्यक्ष त्रिलोक कपूर, प्रधान सचिव जनजातीय विकास ओंकार शर्मा, विशेष सचिव जनजातीय विकास सीपी वर्मा, त्रिलोक जम्वाल, मुख्य सचिव राम सुभग सिंह, अतिरिक्त मुख्य सचिव और अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
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बैठक के मुख्य एजेंडा
1. भेड़ पालकों को आत्मरक्षा के लिए बंदूक लाइसेंस उपलब्ध करवाया जाए।
2. भेड़ पालकों के लिए पहाड़ से मैदानों की ओर आने वाले रूट पर शेड बनाए जाएं।
3. जनजातीय क्षेत्रों में जरूरी स्थानों पर सामुदायिक भवन बनाए जाएं।
4. तला से जनजातीय क्षेत्र चक्की तक सड़क का निर्माण।
5. नए भेड़ पालकों को परमिट जारी किया जाए।
6. भदरोया के वार्ड 10 एसटी मोहल्ला के नीलकंठ मंदिर तक पक्का रास्ता बनाया जाए।
7. भेड़-बकरियों की गंभीर बीमारी में इलाज के लिए मोबाइल यूनिट बनाई जाए।
8. ग्राम पंचायत डाढ की दो पंचायतें बनाई जाएं।
9. नूरपुर में जनजातीय भवन का निर्माण नदी से दूर किया जाए।
10. पालमपुर की खलेट पंचायत में श्मशानघाट बनाया जाए।
11. मशीनों द्वारा ऊन कटाई में भेड़ पालकों को आ रही समस्याएं दूर की जाएं।
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बोर्ड की बैठक में अधिकतर विषय जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में सुविधाओं के अभाव से जुड़े थे। शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने चिंता जाहिर की है। इस पर उन्होंने अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की है। प्रदेश गद्दी कल्याण बोर्ड की बैठक के दौरान सदस्यों ने बताया कि धर्मशाला के खनियारा के रहने वाले बोलम राम की नौ माह पहले 295 भेड़-बकरियों की मौत हो गई थी। पटवारी ने जब रिपोर्ट बनाई तो उसमें सिर्फ 180 भेड़-बकरियों को ही दर्शाया गया था। एक भेड़ की कीमत 8000 रुपये आंकी गई थी। उस समय पोस्टमार्टम रिपोर्ट सहित सभी औपचारिकताएं पूरी की गई थीं। सदस्यों ने चिंता जताई कि आज नौ महीने बीत जाने के बाद भी बोलम राम को मुआवजा नहीं दिलाया गया है। इस पर मुख्यमंत्री ने चिंता जताई। उन्होंने डीसी कांगड़ा को जल्द पीड़ित परिवार को राहत दिलाने के निर्देश दिए। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कारण ही वर्ष 2003 में गद्दी समुदाय को विशेष जनजातीय का दर्जा दिया गया था। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि राज्य के सभी गद्दी समुदाय को पहले की तरह जनजातीय का दर्जा मिला है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1966 के बाद पंजाब से विलय होने वाले क्षेत्रों के गद्दी समुदाय को जनजातीय का दर्जा नहीं मिला। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जनजातीय क्षेत्र के लोगों को अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग में पर्याप्त प्रतिनिधित्व प्रदान करने पर विचार करेगी, ताकि अनुसूचित जनजाति की भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।
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इस अवसर पर जनजातीय विकास मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा, विधायक बिक्रम सिंह जरियाल, जिया लाल कपूर, विशाल नैहरिया, वूलफेड के अध्यक्ष त्रिलोक कपूर, प्रधान सचिव जनजातीय विकास ओंकार शर्मा, विशेष सचिव जनजातीय विकास सीपी वर्मा, त्रिलोक जम्वाल, मुख्य सचिव राम सुभग सिंह, अतिरिक्त मुख्य सचिव और अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
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बैठक के मुख्य एजेंडा
1. भेड़ पालकों को आत्मरक्षा के लिए बंदूक लाइसेंस उपलब्ध करवाया जाए।
2. भेड़ पालकों के लिए पहाड़ से मैदानों की ओर आने वाले रूट पर शेड बनाए जाएं।
3. जनजातीय क्षेत्रों में जरूरी स्थानों पर सामुदायिक भवन बनाए जाएं।
4. तला से जनजातीय क्षेत्र चक्की तक सड़क का निर्माण।
5. नए भेड़ पालकों को परमिट जारी किया जाए।
6. भदरोया के वार्ड 10 एसटी मोहल्ला के नीलकंठ मंदिर तक पक्का रास्ता बनाया जाए।
7. भेड़-बकरियों की गंभीर बीमारी में इलाज के लिए मोबाइल यूनिट बनाई जाए।
8. ग्राम पंचायत डाढ की दो पंचायतें बनाई जाएं।
9. नूरपुर में जनजातीय भवन का निर्माण नदी से दूर किया जाए।
10. पालमपुर की खलेट पंचायत में श्मशानघाट बनाया जाए।
11. मशीनों द्वारा ऊन कटाई में भेड़ पालकों को आ रही समस्याएं दूर की जाएं।