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Kangra News: परागपुर का मसोट बनेगा संस्कृत ग्राम
Mon, 14 Oct 2024 03:23 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Mon, 14 Oct 2024 03:23 AM IST
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केंद्रीय संस्कृत विश्वद्यालय बलाहर में संस्कृत भारती के उत्तर क्षेत्रीय प्रशिक्षण प्रमुख संजीव
परागपुर (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के परागपुर के निकटवर्ती गांव मसोट को जल्द ही संस्कृत ग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा। प्रदेश का ये पहला संस्कृत गांव होगा। इसके तहत मसोट गांव में लोगों को घर-घर जाकर संस्कृत सिखाई जाएगी। इसके लिए गांव में विशेष शिविर लगाए जाएंगे।
संस्कृत ग्राम परियोजना केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय की एक महत्वाकांक्षी योजना के तहत लागू की जा रही है। इस परियोजना के लिए केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के बलाहर स्थित वेदव्यास परिसर में शनिवार और रविवार को दो-दिवसीय कार्यशाला भी आयोजित की गई, जिसमें हिमाचल के विभिन्न जिलों से 62 कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के बलाहर कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी और परिसर निदेशक प्रो. सत्यम कुमारी के मार्गदर्शन में हुई कार्यशाला का संचालन बीएड विभाग के शिक्षक डॉ. सत्यदेव ने किया। इस परियोजना का उद्देश्य केवल मसोट गांव के विकास को बढ़ावा देना नहीं है, बल्कि संस्कृत भाषा और संस्कृति को भी समृद्ध करना है।
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स्वयंसेवी संगठन संस्कृत भारती के उत्तर क्षेत्रीय प्रशिक्षण प्रमुख संजीव कुमार ने कहा कि उनका संगठन इस परियोजना को लागू करने में पूरा सहयोग देगा। उन्होंने कहा कि परियोजना न केवल मसोट गांव के विकास में मदद करेगी, बल्कि संस्कृत भाषा और संस्कृति को भी बढ़ावा देगी। इसमें लोगों के संस्कृत सीखने के साथ नैतिक मुल्यों, संस्कारों और साफ-सफाई के प्रति भी जागरूक किया जाएगा। बड़ों से कैसे बात करनी है या बर्ताव करना है इसके बारे में भी लोगों को अवगत करवाया जाएगा।
मसोट गांव के निवासी इस परियोजना से उत्साहित हैं और उनका मानना है कि यह पहल उनके गांव को भारत के मानचित्र पर महत्वपूर्ण स्थान दिलाएगी।
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संस्कृत ग्राम परियोजना केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय की एक महत्वाकांक्षी योजना के तहत लागू की जा रही है। इस परियोजना के लिए केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के बलाहर स्थित वेदव्यास परिसर में शनिवार और रविवार को दो-दिवसीय कार्यशाला भी आयोजित की गई, जिसमें हिमाचल के विभिन्न जिलों से 62 कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
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केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के बलाहर कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी और परिसर निदेशक प्रो. सत्यम कुमारी के मार्गदर्शन में हुई कार्यशाला का संचालन बीएड विभाग के शिक्षक डॉ. सत्यदेव ने किया। इस परियोजना का उद्देश्य केवल मसोट गांव के विकास को बढ़ावा देना नहीं है, बल्कि संस्कृत भाषा और संस्कृति को भी समृद्ध करना है।
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स्वयंसेवी संगठन संस्कृत भारती के उत्तर क्षेत्रीय प्रशिक्षण प्रमुख संजीव कुमार ने कहा कि उनका संगठन इस परियोजना को लागू करने में पूरा सहयोग देगा। उन्होंने कहा कि परियोजना न केवल मसोट गांव के विकास में मदद करेगी, बल्कि संस्कृत भाषा और संस्कृति को भी बढ़ावा देगी। इसमें लोगों के संस्कृत सीखने के साथ नैतिक मुल्यों, संस्कारों और साफ-सफाई के प्रति भी जागरूक किया जाएगा। बड़ों से कैसे बात करनी है या बर्ताव करना है इसके बारे में भी लोगों को अवगत करवाया जाएगा।
मसोट गांव के निवासी इस परियोजना से उत्साहित हैं और उनका मानना है कि यह पहल उनके गांव को भारत के मानचित्र पर महत्वपूर्ण स्थान दिलाएगी।