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मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने के लिए बनाए कानून : विहिप
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नूरपुर के केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू को मांग पत्र सौंपते हुए विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारी (ज
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नूरपुर (कांगड़ा)। विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारियों ने सोमवार को नूरपुर में केंद्रीय संसदीय मामलों एवं अल्पसंख्यक मंत्री किरेन रिजिजू को मांग पत्र सौंपा। इसमें मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कर हिंदू समाज को प्रबंधन सौंपने हेतु संसद में कानून बनाने की मांग की। इस मौके पर सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज और विधायक रणवीर सिंह निक्का भी मौजूद रहे।
इस दौरान विहिप प्रांत के सह-मंत्री उदय पठानिया, जिलाध्यक्ष अभिनय सोंधी, विभाग मंत्री सुनील दत्त, प्रांत मातृ शक्ति सह-संयोजिका रीता, जिला मंत्री ममता शर्मा, जिला बजरंग दल के सह-संयोजक रंजीत सिंह ने मंदिर प्रबंधन समिति में केवल आस्थावान हिंदू भक्तों, संतों और स्थानीय श्रद्धालुओं को शामिल करने की भी मांग की है।
ज्ञापन में सरकारी दखल की समाप्त कर राज्य सरकारों के मंदिर बंदोबस्ती विभागों का हस्तक्षेप तुरंत बंद करने की मांग की, मंदिर की संपत्ति का उपयोग मंदिर की आय और संपत्तियों का उपयोग केवल मंदिर के जीर्णोद्धार, वैदिक पाठशालाओं, गोशालाओं और हिंदू धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए सुनिश्चित किया जाए।
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मंदिरों में गैर-हिंदुओं की नियुक्ति पर रोक लगाने और मंदिरों के प्रबंधन और सेवाओं में गैर-हिंदुओं की भूमिका समाप्त की भी मांग रखी। उन्होंने कहा कि मंदिरों को धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के तहत अपनी परंपराओं के अनुसार कार्य करने की स्वतंत्रता दी जाए। धार्मिक स्थलों (मस्जिद-चर्च) की तरह मंदिरों को भी स्वतंत्रता मिले। मंदिरों के धन का उपयोग धर्मनिरपेक्ष कार्यों में न किया जाए।
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इस दौरान विहिप प्रांत के सह-मंत्री उदय पठानिया, जिलाध्यक्ष अभिनय सोंधी, विभाग मंत्री सुनील दत्त, प्रांत मातृ शक्ति सह-संयोजिका रीता, जिला मंत्री ममता शर्मा, जिला बजरंग दल के सह-संयोजक रंजीत सिंह ने मंदिर प्रबंधन समिति में केवल आस्थावान हिंदू भक्तों, संतों और स्थानीय श्रद्धालुओं को शामिल करने की भी मांग की है।
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ज्ञापन में सरकारी दखल की समाप्त कर राज्य सरकारों के मंदिर बंदोबस्ती विभागों का हस्तक्षेप तुरंत बंद करने की मांग की, मंदिर की संपत्ति का उपयोग मंदिर की आय और संपत्तियों का उपयोग केवल मंदिर के जीर्णोद्धार, वैदिक पाठशालाओं, गोशालाओं और हिंदू धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए सुनिश्चित किया जाए।
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मंदिरों में गैर-हिंदुओं की नियुक्ति पर रोक लगाने और मंदिरों के प्रबंधन और सेवाओं में गैर-हिंदुओं की भूमिका समाप्त की भी मांग रखी। उन्होंने कहा कि मंदिरों को धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के तहत अपनी परंपराओं के अनुसार कार्य करने की स्वतंत्रता दी जाए। धार्मिक स्थलों (मस्जिद-चर्च) की तरह मंदिरों को भी स्वतंत्रता मिले। मंदिरों के धन का उपयोग धर्मनिरपेक्ष कार्यों में न किया जाए।