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ईश्वर से प्रेम भय के कारण नहीं, श्रद्धा से हो : अतुल
Tue, 27 May 2025 05:08 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Tue, 27 May 2025 05:08 AM IST
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नाग मंदिर रक्कड़ में श्री शिव महापुराण कथा सुनते लोग। -स्रोत: आयोजक
रक्कड़ (कांगड़ा)। नाग मंदिर रक्कड़ में श्री शिव महापुराण कथा महोत्सव के तीसरे दिन कथावाचक अतुल कृष्ण महाराज ने कहा कि इस जगत में यदि कोई ऐसा है जिससे भय का कोई कारण नहीं, तो वह केवल ईश्वर है। बाकी सभी चीजें भय का कारण बन सकती हैं, लेकिन परमात्मा नहीं।
उन्होंने कहा कि भगवान से डरकर उपजा प्रेम सच्चा नहीं होता, क्योंकि उसमें कहीं न कहीं घृणा की छाया भी होती है। सच्ची भक्ति प्रेम और विश्वास से उपजती है। भक्ति की महिमा अनंत है और इसका फल कालातीत होता है। जब भक्ति का उदय होता है, तब अज्ञान स्वतः नष्ट हो जाता है।
अतुल कृष्ण महाराज ने कहा कि क्षुद्र चिंताओं में उलझने से हम विराट परमात्मा से दूर हो जाते हैं। चिंता नहीं, प्रभु का चिंतन करना चाहिए। जो व्यक्ति भगवान के आश्रय में रहकर भी उसके विधान से संतुष्ट नहीं, उसे तीनों लोकों में कहीं भी सुख नहीं मिल सकता। अपने पापों का फल अंततः स्वयं को ही भोगना पड़ता है।
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उन्होंने कहा कि परिवार के लोग हमारी कमाई तो खा सकते हैं, लेकिन अंतिम समय में कोई भी हमारे साथ नरक की यात्रा नहीं करेगा। इसलिए सद्कर्म करें और प्रभु के भजन में कभी भी आलस्य या प्रमाद न आने दें। इस अवसर पर कथा में देवर्षि नारद का मोह, देवी सती का चरित्र और भगवान शिव-पार्वती विवाह जैसे प्रसंगों का भावपूर्ण वाचन किया गया।
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उन्होंने कहा कि भगवान से डरकर उपजा प्रेम सच्चा नहीं होता, क्योंकि उसमें कहीं न कहीं घृणा की छाया भी होती है। सच्ची भक्ति प्रेम और विश्वास से उपजती है। भक्ति की महिमा अनंत है और इसका फल कालातीत होता है। जब भक्ति का उदय होता है, तब अज्ञान स्वतः नष्ट हो जाता है।
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अतुल कृष्ण महाराज ने कहा कि क्षुद्र चिंताओं में उलझने से हम विराट परमात्मा से दूर हो जाते हैं। चिंता नहीं, प्रभु का चिंतन करना चाहिए। जो व्यक्ति भगवान के आश्रय में रहकर भी उसके विधान से संतुष्ट नहीं, उसे तीनों लोकों में कहीं भी सुख नहीं मिल सकता। अपने पापों का फल अंततः स्वयं को ही भोगना पड़ता है।
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उन्होंने कहा कि परिवार के लोग हमारी कमाई तो खा सकते हैं, लेकिन अंतिम समय में कोई भी हमारे साथ नरक की यात्रा नहीं करेगा। इसलिए सद्कर्म करें और प्रभु के भजन में कभी भी आलस्य या प्रमाद न आने दें। इस अवसर पर कथा में देवर्षि नारद का मोह, देवी सती का चरित्र और भगवान शिव-पार्वती विवाह जैसे प्रसंगों का भावपूर्ण वाचन किया गया।