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फूल बनकर जीवन जिएं, कांटे बनकर नहीं : अतुल कृष्ण
Thu, 20 Mar 2025 12:46 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Thu, 20 Mar 2025 12:46 AM IST
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न्याटी सुंही चम्बा पत्तन में चल रही भागवत कथा में उपस्थित महिलाएं। स्रोत: आयोजक
रक्कड़ (कांगड़ा)। जिसे भी आकाश की ऊंचाइयां छूनी हैं, उसे विनम्र होना ही पड़ेगा। परमात्मा जब भी मिलता है, झुकने वाले को मिलता है। अकड़ एवं अहंकार भक्त और भगवान के बीच की दूरी को बढ़ा देता है।
हमारे पास अभी जो कुछ भी है, वह तो कुछ भी नहीं है। उज्ज्वल भविष्य उनकी प्रतीक्षा कर रहा होता है जो ईश्वर की छत्रछाया में आगे बढ़ते हैं। यह अमृतवचन श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस में अतुल कृष्ण ने न्याटी सुंही, चंबा पत्तन में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि हम फूल बनकर जीवन जिएं, कांटे बनकर नहीं। फूलों की खुशबू हवा में बिखरकर सभी को आनंदित करती रहती है, जबकि कांटे नीरसता, दुख एवं पीड़ा लेकर बैठे हुए हैं। फूलों को चाहे कोई भी न देखे, कोई भी उनके पास से न गुजरे, तब भी वे निष्काम भाव से अपनी महक और सौंदर्य लुटाते रहते हैं।
भक्ति, भक्त और भगवान के बीच सेतु का काम करती है। जब भक्त अपने को परमात्मा के हाथ में छोड़ देता है, तभी वह सांसारिक इच्छाओं एवं अपेक्षाओं से मुक्त हो पाता है। कथा में श्रीवामन अवतार, मत्स्य अवतार, रामावतार एवं भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य का प्रसंग लोगों ने अत्यंत श्रद्धा से सुना। इस अवसर पर भगवान की झांकी भी निकाली गई। श्रीमद्भागवत कथा प्रतिदिन 11:00 से 2:00 बजे के बीच 22 मार्च तक जारी रहेगी।
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हमारे पास अभी जो कुछ भी है, वह तो कुछ भी नहीं है। उज्ज्वल भविष्य उनकी प्रतीक्षा कर रहा होता है जो ईश्वर की छत्रछाया में आगे बढ़ते हैं। यह अमृतवचन श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस में अतुल कृष्ण ने न्याटी सुंही, चंबा पत्तन में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि हम फूल बनकर जीवन जिएं, कांटे बनकर नहीं। फूलों की खुशबू हवा में बिखरकर सभी को आनंदित करती रहती है, जबकि कांटे नीरसता, दुख एवं पीड़ा लेकर बैठे हुए हैं। फूलों को चाहे कोई भी न देखे, कोई भी उनके पास से न गुजरे, तब भी वे निष्काम भाव से अपनी महक और सौंदर्य लुटाते रहते हैं।
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भक्ति, भक्त और भगवान के बीच सेतु का काम करती है। जब भक्त अपने को परमात्मा के हाथ में छोड़ देता है, तभी वह सांसारिक इच्छाओं एवं अपेक्षाओं से मुक्त हो पाता है। कथा में श्रीवामन अवतार, मत्स्य अवतार, रामावतार एवं भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य का प्रसंग लोगों ने अत्यंत श्रद्धा से सुना। इस अवसर पर भगवान की झांकी भी निकाली गई। श्रीमद्भागवत कथा प्रतिदिन 11:00 से 2:00 बजे के बीच 22 मार्च तक जारी रहेगी।
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