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Kangra News: सुलयाली आयुर्वेदिक अस्पताल में जोंक चिकित्सा पद्धति शुरू

Thu, 01 May 2025 01:05 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा Updated Thu, 01 May 2025 01:05 AM IST
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Leech treatment system started in Sulyali Ayurvedic Hospital
जसूर(कांगड़ा)। आयुर्वेदिक अस्पताल सुलयाली में अब आयुर्वेद की प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों को पुनर्जीवित करते हुए जोंक चिकित्सा की शुरुआत की गई है। यह चिकित्सा पद्धति अनेक प्रकार के रोगों में लाभकारी सिद्ध होती है।
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विशेषकर त्वचा रोग, सूजन, रक्तसंचार की समस्याएं और व्रण चिकित्सा में इसका विशेष महत्व है। आयुर्वेदिक अस्पताल सुलयाली के आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. सन्नी जरियाल ने बताया कि जोंक चिकित्सा पंचकर्म चिकित्सा का एक महत्वपूर्ण अंग है, जिसे रक्तमोक्षण के नाम से जाना जाता है।
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इस प्रक्रिया में औषधीय गुणों वाली विशेष जोंकों का उपयोग करके शरीर से दूषित रक्त निकाला जाता है, जिससे रोगों में राहत मिलती है। यह पहल रोगियों को प्राकृतिक और दुष्प्रभाव रहित चिकित्सा उपलब्ध करवाने की दिशा में एक सार्थक कदम है। साथ ही यह हमारी सांस्कृतिक चिकित्सा धरोहर को पुनः प्रतिष्ठित करने का भी माध्यम है।
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गौर हो कि आयुर्वेदिक अस्पताल सुलयाली अब केवल एक वैकल्पिक चिकित्सा संस्थान नहीं, बल्कि कई मामलों में क्षेत्रवासियों की पहली पसंद बन चुका है। विशेष रूप से चमड़ी रोगों, बवासीर और पंचकर्म चिकित्सा लाभ के लिए चारों उपमंडलों के अलावा भटियात के लोग आयुर्वेद उपचार हेतु यहां आते हैं। सुलयाली अस्पताल प्रदेश में पपरोला आयुर्वेद कॉलेज के अलावा ऐसा आयुर्वेद संस्थान है, जहां रात्रि सेवा भी मरीजों के लिए उपलब्ध है।
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