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पर्यटकों की दस्तक से गुलजार हुआ खबरू वाटरफॉल
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शाहपुर (कांगड़ा)। विधानसभा क्षेत्र शाहपुर की वोह घाटी में स्थित खबरू महादेव आस्था के साथ पर्यटन की दृष्टि से भी अपनी पहचान बना रहा है। क्षेत्र में ऊंचे पहाड़ों से कलकल बहता झरना गर्मी में लोगों को अपनी ओर खींच रहा है। हालांकि खबरू महादेव तक पहुंचने के लिए लगभग चार किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है, लेकिन यहां की सुंदरता पैदल सफर की थकान को पल भर में मिटा देती है। रोजाना सैकड़ों सैलानी खबरू महादेव की सुंदर वादियों का लुत्फ उठा रहे हैं।
मोरछ गांव के युवा तरसेम जरियाल ने बताया कि झरने के पास भगवान शिव का ऐतिहासिक मंदिर भी है। धार्मिक आयोजन पर पर्यटकों की संख्या और भी बढ़ जाती है। अब हिमाचल में धार्मिक स्थल खुलते ही यहां रोजाना हजारों सैलानी पहुंच रहे हैं। पर्यटकों के लिए ठहरने की व्यवस्था स्थानीय युवा कैंप और होम स्टे में करवाते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की ओर से खबरू महादेव में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। अगर सरकार भी प्रयास करती है तो यहां के स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा।
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क्या है झरने का ऐतिहासिक महत्व
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खबरू झरना हिमाचल का दूसरा सबसे ऊंचा झरना है। जनश्रुति के अनुसार इस झरने की आस्था पांडवों से भी जुड़ी हुई है। महाभारत के समय पांडव यहां भी कुछ समय के लिए रुके थे, जिसके साक्ष्य आज भी विराजमान है। इनमें से एक झरना भी है। बुजुर्गों की मानें तो इस झरने का निर्माण भीम ने द्रोपती के स्नान के लिए किया था। राधाष्टमी व जन्माष्ठमी के पर्व पर हजारों श्रद्धालु आस्था की पवित्र डुबकी लगाने यहां पहुंचते हैं।
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मोरछ गांव के युवा तरसेम जरियाल ने बताया कि झरने के पास भगवान शिव का ऐतिहासिक मंदिर भी है। धार्मिक आयोजन पर पर्यटकों की संख्या और भी बढ़ जाती है। अब हिमाचल में धार्मिक स्थल खुलते ही यहां रोजाना हजारों सैलानी पहुंच रहे हैं। पर्यटकों के लिए ठहरने की व्यवस्था स्थानीय युवा कैंप और होम स्टे में करवाते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की ओर से खबरू महादेव में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। अगर सरकार भी प्रयास करती है तो यहां के स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा।
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क्या है झरने का ऐतिहासिक महत्व
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खबरू झरना हिमाचल का दूसरा सबसे ऊंचा झरना है। जनश्रुति के अनुसार इस झरने की आस्था पांडवों से भी जुड़ी हुई है। महाभारत के समय पांडव यहां भी कुछ समय के लिए रुके थे, जिसके साक्ष्य आज भी विराजमान है। इनमें से एक झरना भी है। बुजुर्गों की मानें तो इस झरने का निर्माण भीम ने द्रोपती के स्नान के लिए किया था। राधाष्टमी व जन्माष्ठमी के पर्व पर हजारों श्रद्धालु आस्था की पवित्र डुबकी लगाने यहां पहुंचते हैं।
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