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1905 के भूकंप से भी कांगड़ा ने नहीं सीखा सबक : प्रो. महाजन
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धर्मशाला। जिला कांगड़ा में 1905 में आए विनाशकारी भूकंप से भी लोगों ने सबक नहीं सीखा है। जिले में अभी भी बहुमंजिला इमारतों का निर्माण हो रहा है। इनमें से कई इमारतें तो भूकंप रोधी तकनीक को भी नजरअंदाज बन रही हैं। ऐसे में अगर जिला कांगड़ा में 1905 जैसी भूंकप रूपी त्रासदी आई तो जान-माल के रूप में भारी नुकसान झेलना पड़ेगा। यह बात हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय में पर्यावरण विज्ञान विभाग में प्रोफेसर और भूगर्भ वैज्ञानी प्रो. एके महाजन ने कही।
उन्होंने कहा कि चार अप्रैल 1905 को भूकंप त्रासदी से अभी तक जिले के लोग सीख नहीं ले पाए हैं। जिले में अभी भी बहुमंजिला इमारतें बन रही हैं और कंकरीट का जंगल तैयार हो रहा है। ऐसे में वर्ष 1905 में करीब 20 हजार लोग भूकंप में काल का ग्रास बने थे लेकिन अगर मौजूदा समय में 1905 जैसा भूकंप आया तो यह ज्यादा विनाशकारी होगा। जब भूकंप आया था उस वक्त पुराने व कच्चे मकान थे। इसके अलावा जहां मकानों की संख्या कम थी, वहीं उनमें रहने वाले लोग भी गिने चुने ही थे लेकिन अब वर्तमान में आबादी भी बढ़ गई है और कंकरीट का जंगल तैयार हो गया है। ऐसे में अगर एक इमारत ही गिरीं तो कई टन मलबा गिरेगा और कई लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ेगा। जमीन पर कंकरीट के कारण भार और दवाब बढ़ रहा है। अभी भी कांगड़ा में कम तीव्रता वाले भूकंप के झटके होते रहते हैं लेकिन जब यह तीव्रता सात या आठ तक भी पहुंचेगी तो भारी नुकसान हो सकता है। ऐसे में लोगों को अपने घर बनाते समय भूकंप रोधी तकनीक का इस्तेमाल करना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी तरह की परेशान न हो सके।
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उन्होंने कहा कि चार अप्रैल 1905 को भूकंप त्रासदी से अभी तक जिले के लोग सीख नहीं ले पाए हैं। जिले में अभी भी बहुमंजिला इमारतें बन रही हैं और कंकरीट का जंगल तैयार हो रहा है। ऐसे में वर्ष 1905 में करीब 20 हजार लोग भूकंप में काल का ग्रास बने थे लेकिन अगर मौजूदा समय में 1905 जैसा भूकंप आया तो यह ज्यादा विनाशकारी होगा। जब भूकंप आया था उस वक्त पुराने व कच्चे मकान थे। इसके अलावा जहां मकानों की संख्या कम थी, वहीं उनमें रहने वाले लोग भी गिने चुने ही थे लेकिन अब वर्तमान में आबादी भी बढ़ गई है और कंकरीट का जंगल तैयार हो गया है। ऐसे में अगर एक इमारत ही गिरीं तो कई टन मलबा गिरेगा और कई लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ेगा। जमीन पर कंकरीट के कारण भार और दवाब बढ़ रहा है। अभी भी कांगड़ा में कम तीव्रता वाले भूकंप के झटके होते रहते हैं लेकिन जब यह तीव्रता सात या आठ तक भी पहुंचेगी तो भारी नुकसान हो सकता है। ऐसे में लोगों को अपने घर बनाते समय भूकंप रोधी तकनीक का इस्तेमाल करना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी तरह की परेशान न हो सके।
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