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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Kangra News ›   It's not the speed of the clock, it's the queue of patients that determines discharge.

Kangra News: घड़ी की रफ्तार नहीं, मरीजों की कतार तय कर रही छुट्टी

Sun, 19 Apr 2026 08:12 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 19 Apr 2026 08:12 AM IST
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It's not the speed of the clock, it's the queue of patients that determines discharge.
टांडा अस्पताल में शाम छह बजे तक ओपीडी के बाहर खड़े मरीज। स्रोत: अमर उजाला - फोटो : संवाद
धर्मशाला। सरकारी अस्पतालों में अक्सर शाम 4 बजते ही ओपीडी में सन्नाटा पसरना आम हैं, लेकिन डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय मेडिकल कॉलेज (टांडा) के चिकित्सक सेवाभाव की नई इबारत लिख रहे हैं। यहां डॉक्टरों के लिए ड्यूटी का समय नहीं, बल्कि बाहर कतार में खड़ा आखिरी मरीज मायने रखता है। यही कारण है कि निर्धारित समय बीतने के घंटों बाद भी यहां के ओपीडी ब्लॉक में मरीजों की जांच जारी रहती है।
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टांडा मेडिकल कॉलेज के नेफ्रोलॉजी, गैस्ट्रो-हैपाटोलॉजी, मेडिसिन, इंडक्रोनोलॉजी, कैंसर और कार्डियोलॉजी जैसे विभागों में यह नजारा आम है। स्टाफ की कमी और मरीजों के भारी दबाव के बावजूद विशेषज्ञ चिकित्सक तब तक अपनी कुर्सी नहीं छोड़ते, जब तक अंतिम मरीज को देख न लिया जाए। कई बार यह प्रक्रिया रात 6 से 7 बजे तक खिंच जाती है।
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दूर-दराज से आने वाले मरीजों को बिना इलाज वापस न जाना पड़े, इसके लिए डॉक्टर अपनी थकान को दरकिनार कर सेवा में जुटे रहते हैं। चेकअप के लिए आए सुरेश कुमार, प्रदीप शर्मा, विधि चंद, सुरेंद्र ठाकुर और विकास का कहना है कि टांडा के डॉक्टरों का धैर्य काबिल-ए-तारीफ है। जहां अक्सर सरकारी व्यवस्था पर सवाल उठते हैं, वहीं टांडा का यह वर्क कल्चर जनता के विश्वास को मजबूत कर रहा है।
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बता दें कि टांडा मेडिकल कॉलेज प्रदेश के पांच जिलों के प्रमुख स्वास्थ्य संस्थानों में शुमार हैं। यहां कांगड़ा जिला ही नहीं बल्कि, चंबा, मंडी, हमीरपुर और ऊना से भी लोग उपचार के लिए पहुंचे हैं। ऐसे में मरीजों को भारी दबाव को देखते हुए विशेषज्ञ देर शाम तक ओपीडी में बैठकर लोगों को राहत प्रदान कर रहे हैं।



टांडा मेडिकल कॉलेज कांगड़ा ही नहीं, बल्कि हमीरपुर, चंबा और मंडी जैसे जिलों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ है। मरीजों का भारी दबाव होने के बावजूद हमारे चिकित्सक पूरी प्रतिबद्धता के साथ अपनी बेहतरीन सेवाएं दे रहे हैं। -डॉ. विवेक सूद, अध्यक्ष, टांडा मेडिकल कॉलेज टीचर्स वेलफेयर एसोसिएशन


अस्पताल में आने वाला हर मरीज एक नई उम्मीद के साथ आता है। उनकी उचित देखभाल करना हमारा परम नैतिक दायित्व है। यह हमारे चिकित्सकों का जज्बा ही है कि वे समय की परवाह किए बिना देर रात तक मरीजों के उपचार में जुटे रहते हैं। -डॉ. मिलाप शर्मा, प्रधानाचार्य, टांडा मेडिकल कॉलेज

टांडा अस्पताल में शाम छह बजे तक ओपीडी के बाहर खड़े मरीज। स्रोत: अमर उजाला

टांडा अस्पताल में शाम छह बजे तक ओपीडी के बाहर खड़े मरीज। स्रोत: अमर उजाला- फोटो : संवाद

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