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Kangra News: ऋण रिकवरी मामलों से बैंक प्रबंध निदेशक को बाहर रखना गलत

Wed, 24 Jul 2024 03:52 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 24 Jul 2024 03:52 AM IST
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It is wrong to keep the bank managing director out of loan recovery cases.
धर्मशाला। ऋण रिकवरी के मामलों में बैंक प्रबंधक को बाहर रखना गलत है। जब ऋण के मामलों को मंजूरी देने वाले कमेटी में बैंक प्रबंधक शामिल होते हैं तो रिकवरी की जिम्मेवारी भी तय हो। यह प्रस्ताव कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक मुख्यालय धर्मशाला के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने ध्वनिमत से पारित किया है। दरअसल केसीसी बैंक का एनपीए 7.10 फीसदी है।
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पूर्व में बैंक प्रबंधन ने कई लोगों को गलत तरीके से ऋण की स्वीकृति प्रदान की हुई है। बैंक के करोड़ों रुपये डिफाल्टरों के पास फंसे हुए हैं। बार-बार नोटिस के बाद भी रिकवरी नहीं हो पा रही। ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जिसमें एक व्यक्ति को नियमों के विपरीत 40 करोड़ रुपये ऋण आवंटित किया गया था, लेकिन अब संबंधित व्यक्ति ऋण की किस्तों का भुगतान नहीं कर रहा। बीओडी ने इस मामले को हिमाचल प्रदेश सहकारी सभाएं विभाग के सहायक पंजीयक (एआर) के पास रिकवरी के लिए भेजा। एआर ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए कहा था कि ऋण राशि को यह तो बैंक प्रबंधन चुकाए या गारंटर या वह बैंक निदेशक मंडल के सदस्य, जिन्होंने इस भारी भरकम ऋण को मंजूरी प्रदान की थी।
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एआर के इस फैसले पर पूर्व के प्रबंध निदेशक ने हिमाचल प्रदेश सहकारी सभाएं विभाग के पंजीयक (आरसीएस) के समक्ष अपील की और मामले की सुनवाई के बाद आरसीएस ने रिकवरी के मामलों से बैंक के एमडी को बाहर कर दिया। अब बीओडी ने यह पाया कि जब ऋण स्वीकृति के मामलों में बैंक का एमडी शामिल होता है तो रिकवरी से उन्हें बाहर रखना गलत है। क्योंकि ऋण स्वीकृति समिति में बैंक बोर्ड के निदेशक, एमडी बतौर निदेशक और महाप्रबंधक बतौर सचिव शामिल होते हैं। यह समिति जांचने-परखने के बाद ही ऋण को स्वीकृति प्रदान करती है।
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बैंक अधिकारी की जिम्मेदारी सुनिश्चित की जाए
इसी तरह बोडीओ ने यह भी फैसला लिया है कि जिन मामलों में ऋण की रिकवरी नहीं हो रही, उन मामलों की जांच-पड़ताल की जाए कि यह ऋण किस अधिकारी ने स्वीकृत किए हैं, ऐसे मामलों में बैंक अधिकारी की जिम्मेदारी भी सुनिश्चित की जाए, ताकि बैंक को लाभ की स्थिति में लाया जा सके। बीओडी ने उस सुझाव का भी विरोध किया, जिसमें डिफाल्टरों के ऋण मामलों को ओटीसी (वन टाइम सेटलमेंट) और दिवालिया घोषित करने की योजना थी।

कोट्स:
केसीसी बैंक की बोओडी में करीब पांच दर्जन से अधिक मामलों पर चर्चा हुई है, लेकिन प्रमुख तौर पर बीओडी ने आरसीएस के उस फैसले का विरोध किया, जिसमें बैंक एमडी को रिकवरी के मामलों से बाहर किया गया था। बीओडी ने प्रस्ताव पारित किया है और जल्द ही बैंक एमडी को भी रिकवरी के मामलों में शामिल किया जाएगा, चूंकि ऋण स्वीकृति समिति में एमडी शामिल होते हैं।
-कुलदीप सिंह पठानिया, चेयरमैन, केसीसी बैंक।
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