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दूसरे वर्ग पर आपत्ति जताने के बजाय सुनी जाए बात : मोहिंद्र सिंह
Mon, 05 Oct 2026 02:10 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Mon, 05 Oct 2026 02:10 AM IST
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धर्मशाला। कांगड़ा की राजनीति में जातीय प्रतिनिधित्व पर छिड़ी बहस के बीच अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समिति के सलाहकार मोहिंद्र सिंह ने राजपूत युवा शक्ति संघ के हालिया बयान पर कड़ा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर वर्ग को अपनी बात रखने, अपने अधिकारों की रक्षा करने और समस्याओं को सामने लाने का पूरा अधिकार है। किसी दूसरे वर्ग को इस पर आपत्ति जताने के बजाय उस आवाज को सुनना चाहिए, क्योंकि ओबीसी वर्ग के उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश का रास्ता पिछले लगभग 20 वर्षों से रुका हुआ है।
उन्होंने कहा कि यदि कोई वर्ग सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक हितों की आवाज उठाता है तो उसे ''जातीय राजनीति'' का नाम देकर कटघरे में खड़ा करना उचित नहीं है। सर्व समाज की बात करने वालों को यह समझना चाहिए कि सर्व समाज तभी मजबूत होगा, जब उसमें शामिल प्रत्येक वर्ग को बात कहने की बराबर स्वतंत्रता मिले।
उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में हर वर्ग को आवाज उठाने का समान हक है। यदि एक वर्ग को सर्व समाज के नाम पर राजनीतिक बात रखने का अधिकार है, तो दूसरे वर्ग को अपने मुद्दे उठाने से रोकने का कोई औचित्य नहीं बनता। लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति और अलग-अलग वर्गों की आवाज के लिए जगह होनी चाहिए।
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उन्होंने कहा कि ओबीसी वर्ग भी प्रदेश के सामाजिक ढांचे का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसके भीतर कई समुदाय आते हैं। ऐसे में यदि यह वर्ग प्रतिनिधित्व और अधिकारों की मांग करता है, तो इसे किसी अन्य वर्ग के खिलाफ अभियान के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
राजपूत युवा शक्ति संघ ने हाल ही में कांगड़ा के विधायक पवन काजल पर जातिगत राजनीति को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की नसीहत दी थी।
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उन्होंने कहा कि यदि कोई वर्ग सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक हितों की आवाज उठाता है तो उसे ''जातीय राजनीति'' का नाम देकर कटघरे में खड़ा करना उचित नहीं है। सर्व समाज की बात करने वालों को यह समझना चाहिए कि सर्व समाज तभी मजबूत होगा, जब उसमें शामिल प्रत्येक वर्ग को बात कहने की बराबर स्वतंत्रता मिले।
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उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में हर वर्ग को आवाज उठाने का समान हक है। यदि एक वर्ग को सर्व समाज के नाम पर राजनीतिक बात रखने का अधिकार है, तो दूसरे वर्ग को अपने मुद्दे उठाने से रोकने का कोई औचित्य नहीं बनता। लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति और अलग-अलग वर्गों की आवाज के लिए जगह होनी चाहिए।
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उन्होंने कहा कि ओबीसी वर्ग भी प्रदेश के सामाजिक ढांचे का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसके भीतर कई समुदाय आते हैं। ऐसे में यदि यह वर्ग प्रतिनिधित्व और अधिकारों की मांग करता है, तो इसे किसी अन्य वर्ग के खिलाफ अभियान के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
राजपूत युवा शक्ति संघ ने हाल ही में कांगड़ा के विधायक पवन काजल पर जातिगत राजनीति को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की नसीहत दी थी।