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Kangra News: तीन माह में 17 में से तीन वार्डों में ही सभा
Fri, 09 Oct 2026 05:40 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Fri, 09 Oct 2026 05:40 AM IST
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धर्मशाला। नगर निगम धर्मशाला के नए सदन का तीन माह का कार्यकाल पूरा हो चुका है लेकिन 17 वार्डों में से अभी तक महज तीन में ही वार्ड सभाएं हो सकी हैं।
वहीं, शेष वार्डों में स्थानीय मुद्दों पर लोगों की सामूहिक भागीदारी के लिए तय व्यवस्था सक्रिय नहीं हो पाई है। इससे सड़क, नालियों, पेयजल, सफाई, स्ट्रीट लाइट, पार्किंग सहित अन्य स्थानीय समस्याओं पर वार्ड स्तर पर चर्चा का मंच नहीं बन पाया है।
निगम सूत्रों के अनुसार अब तक मैक्लोडगंज, भागसूनाग और बड़ोल वार्ड में ही वार्ड सभाएं आयोजित हुई हैं। नए सदन के कामकाज शुरू होने के बाद उम्मीद थी कि वार्ड सभाओं और समितियों के माध्यम से स्थानीय समस्याओं को चिह्नित कर उनके समाधान की प्रक्रिया को गति मिलेगी। हालांकि, तीन माह बाद भी अधिकांश वार्डों में यह व्यवस्था शुरू नहीं हो सकी है।
वार्ड समितियों को स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों और जनसमस्याओं पर चर्चा का माध्यम माना जाता है। इनके गठन से संबंधित वार्ड के मुद्दों को प्राथमिकता के आधार पर निगम के समक्ष रखने की व्यवस्था मजबूत हो सकती है। वहीं, वार्ड सभाओं में स्थानीय लोग सीधे अपनी समस्याएं और सुझाव रख सकते हैं।
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अब शेष वार्डों में वार्ड सभाएं आयोजित होने और समितियों के गठन के बाद ही वार्ड स्तर पर स्थानीय मुद्दों पर व्यवस्थित चर्चा का सिलसिला आगे बढ़ पाएगा।
नगर निगम धर्मशाला के महापौर शमशेर सिंह नैहरिया ने बताया कि तीन वार्डों में वार्ड सभाओं का आयोजन किया जा चुका है और इनमें वार्ड समितियों का गठन भी हो चुका है। अन्य वार्डों के पार्षद जैसे ही अपने वार्ड में वार्ड सभा करवाने की सहमति देंगे, वहां भी सभा आयोजित कर दी जाएगी।
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वहीं, शेष वार्डों में स्थानीय मुद्दों पर लोगों की सामूहिक भागीदारी के लिए तय व्यवस्था सक्रिय नहीं हो पाई है। इससे सड़क, नालियों, पेयजल, सफाई, स्ट्रीट लाइट, पार्किंग सहित अन्य स्थानीय समस्याओं पर वार्ड स्तर पर चर्चा का मंच नहीं बन पाया है।
निगम सूत्रों के अनुसार अब तक मैक्लोडगंज, भागसूनाग और बड़ोल वार्ड में ही वार्ड सभाएं आयोजित हुई हैं। नए सदन के कामकाज शुरू होने के बाद उम्मीद थी कि वार्ड सभाओं और समितियों के माध्यम से स्थानीय समस्याओं को चिह्नित कर उनके समाधान की प्रक्रिया को गति मिलेगी। हालांकि, तीन माह बाद भी अधिकांश वार्डों में यह व्यवस्था शुरू नहीं हो सकी है।
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वार्ड समितियों को स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों और जनसमस्याओं पर चर्चा का माध्यम माना जाता है। इनके गठन से संबंधित वार्ड के मुद्दों को प्राथमिकता के आधार पर निगम के समक्ष रखने की व्यवस्था मजबूत हो सकती है। वहीं, वार्ड सभाओं में स्थानीय लोग सीधे अपनी समस्याएं और सुझाव रख सकते हैं।
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अब शेष वार्डों में वार्ड सभाएं आयोजित होने और समितियों के गठन के बाद ही वार्ड स्तर पर स्थानीय मुद्दों पर व्यवस्थित चर्चा का सिलसिला आगे बढ़ पाएगा।
नगर निगम धर्मशाला के महापौर शमशेर सिंह नैहरिया ने बताया कि तीन वार्डों में वार्ड सभाओं का आयोजन किया जा चुका है और इनमें वार्ड समितियों का गठन भी हो चुका है। अन्य वार्डों के पार्षद जैसे ही अपने वार्ड में वार्ड सभा करवाने की सहमति देंगे, वहां भी सभा आयोजित कर दी जाएगी।