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उपजातियों के साथ गद्दी शब्द नहीं जोड़ा तो विधानसभा का करेंगे घेराव : महिंद्र
Tue, 18 Nov 2025 08:39 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Tue, 18 Nov 2025 08:39 AM IST
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धर्मशाला। हिमालयन गद्दी यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि गद्दी समुदाय की छह उपजातियों के साथ गद्दी शब्द नहीं जोड़ा गया तो वे आगामी शीतकालीन सत्र के दौरान तपोवन में विधानसभा का घेराव करेंगे। यूनियन ने स्पष्ट किया कि अगर सरकार ने सत्र से पहले यूनियन पदाधिकारियों को वार्ता के लिए नहीं बुलाया तो लोग धरना-प्रदर्शन और गिरफ्तारी देने के लिए भी तैयार है।
सोमवार को धर्मशाला में पत्रकार वार्ता में हिमालयन गद्दी यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष मोहिंद्र सिंह ने कहा कि गद्दी समुदाय की यह मांग पिछले 23 वर्षों से लंबित है। गद्दी समुदाय की 13 उपजातियों में से छह हाली, धोगरी, बाड़ी, सिप्पी, रिहाड़े और लोहार को भू-अभिलेख में गद्दी शब्द जोड़े जाने की सिफारिशें कई बार हो चुकी हैं। गद्दी शब्द न जुड़ने से इन जातियों के लोग अपने अधिकारों से वंचित हो रहे हैं।
प्रदेशाध्यक्ष ने बताया कि सरकार ने इस संबंध में तीन से पांच बार सर्वे करवाए हैं। विभिन्न संस्थानों और संगठनों ने भी उपजातियों के साथ गद्दी शब्द जोड़ने को उचित ठहराया है, लेकिन इसके बावजूद सरकार की ओर से कार्रवाई नहीं की जा रही है। मोहिंद्र सिंह ने दावा किया कि कांगड़ा-चंबा सहित पूरे प्रदेश में गद्दी समुदाय की आबादी करीब आठ लाख है, जो राज्य के 15 से 16 विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव परिणामों को प्रभावित करने की क्षमता रखती है।
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यूनियन ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से मांग की है कि सरकार इस महत्वपूर्ण विषय पर शीघ्र और ठोस कदम उठाए, ताकि समुदाय को उनका वर्षों से लंबित हक मिल सके।
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सोमवार को धर्मशाला में पत्रकार वार्ता में हिमालयन गद्दी यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष मोहिंद्र सिंह ने कहा कि गद्दी समुदाय की यह मांग पिछले 23 वर्षों से लंबित है। गद्दी समुदाय की 13 उपजातियों में से छह हाली, धोगरी, बाड़ी, सिप्पी, रिहाड़े और लोहार को भू-अभिलेख में गद्दी शब्द जोड़े जाने की सिफारिशें कई बार हो चुकी हैं। गद्दी शब्द न जुड़ने से इन जातियों के लोग अपने अधिकारों से वंचित हो रहे हैं।
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प्रदेशाध्यक्ष ने बताया कि सरकार ने इस संबंध में तीन से पांच बार सर्वे करवाए हैं। विभिन्न संस्थानों और संगठनों ने भी उपजातियों के साथ गद्दी शब्द जोड़ने को उचित ठहराया है, लेकिन इसके बावजूद सरकार की ओर से कार्रवाई नहीं की जा रही है। मोहिंद्र सिंह ने दावा किया कि कांगड़ा-चंबा सहित पूरे प्रदेश में गद्दी समुदाय की आबादी करीब आठ लाख है, जो राज्य के 15 से 16 विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव परिणामों को प्रभावित करने की क्षमता रखती है।
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यूनियन ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से मांग की है कि सरकार इस महत्वपूर्ण विषय पर शीघ्र और ठोस कदम उठाए, ताकि समुदाय को उनका वर्षों से लंबित हक मिल सके।