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एक सप्ताह में दोषी नहीं पकड़े तो होगा आंदोलन : विहिप
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बरियाल (कांगड़ा)। पौंग झील के किनारे स्थित जवाली विधानसभा हलके के विभिन्न गांवों में विस्फोट से हुई चार गायों की मौत को लेकर विश्व हिंदू परिषद उग्र हो गई है। विश्व हिंदू परिषद ने सत्संग प्रमुख सुरेश गुलेरिया के नेतृत्व में वीरवार को नगरोटा सूरियां में तहसीलदार के माध्यम से सरकार और प्रशासन को ज्ञापन भेजकर चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर विस्फोट लगाने वाले लोगों को पकड़ा नहीं गया तो विश्व हिंदू परिषद सरकार और प्रशासन के खिलाफ आंदोलन शुरू कर देगी।
एडवोकेट अरविंद जंवाल ने कहा कि विस्फोटक पदार्थ से अवैध शिकार की आड़ में गोवंश को निशाना बनाया जा रहा है जो एक संगीन अपराध है। इस पर प्रशासन को कड़ा संज्ञान लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि जहां यह घटना हुई है, वह सारा क्षेत्र वेटलैंड के किनारे पड़ता है। इस तरह की पशु क्रूरता सहन नहीं की जाएगी। इस तरह की पशु क्रूरता को रोकने के साथ पौंग झील में विचरण कर रहे प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा भी बनी रहे।
जंवाल ने कहा कि पुलिस जिला नूरपुर के एएसपी धर्मचंद वर्मा भी जांच की जा रही है, का बयान देकर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं। एक सप्ताह से भी ज्यादा समय बीतने के बाद विस्फोटक पदार्थ से पशु क्रूरता जैसी दुर्घटना को अंजाम देने वालों पर पुलिस कोई भी कार्रवाई नहीं कर पाई है। उन्होंने एएसपी से पूछा है कि क्या इस मामले में कार्रवाई एक जगह पर ही होगी या फिर जहां-जहां गायों की मौत हुई है, वहां पर भी ऐसी कार्रवाई होगी? इस मौके पर ज्ञापन देने वालों में लक्ष्मीकांत, सुखपाल, विनोद, जसवंत, शामशरूप, मनीष, राजेश, आयुष आदि उपस्थित रहे।
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एडवोकेट अरविंद जंवाल का कहना है कि विस्फोटक सामग्री से वन्यजीवों और पशुओं की हत्या के जुर्म में पशु क्रूरता अधिनियम 1960 के तहत अभियुक्त को 10 साल की सजा या जुर्माना या दोनों ही हो सकते हैं। विस्फोटक अधिनियम 1908 के तहत बिना लाइसेंस के विस्फोटक पदार्थ पकड़े जाने पर दोषी को 10 साल या कठोर आजीवन कारावास का प्रावधान है।
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एडवोकेट अरविंद जंवाल ने कहा कि विस्फोटक पदार्थ से अवैध शिकार की आड़ में गोवंश को निशाना बनाया जा रहा है जो एक संगीन अपराध है। इस पर प्रशासन को कड़ा संज्ञान लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि जहां यह घटना हुई है, वह सारा क्षेत्र वेटलैंड के किनारे पड़ता है। इस तरह की पशु क्रूरता सहन नहीं की जाएगी। इस तरह की पशु क्रूरता को रोकने के साथ पौंग झील में विचरण कर रहे प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा भी बनी रहे।
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जंवाल ने कहा कि पुलिस जिला नूरपुर के एएसपी धर्मचंद वर्मा भी जांच की जा रही है, का बयान देकर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं। एक सप्ताह से भी ज्यादा समय बीतने के बाद विस्फोटक पदार्थ से पशु क्रूरता जैसी दुर्घटना को अंजाम देने वालों पर पुलिस कोई भी कार्रवाई नहीं कर पाई है। उन्होंने एएसपी से पूछा है कि क्या इस मामले में कार्रवाई एक जगह पर ही होगी या फिर जहां-जहां गायों की मौत हुई है, वहां पर भी ऐसी कार्रवाई होगी? इस मौके पर ज्ञापन देने वालों में लक्ष्मीकांत, सुखपाल, विनोद, जसवंत, शामशरूप, मनीष, राजेश, आयुष आदि उपस्थित रहे।
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एडवोकेट अरविंद जंवाल का कहना है कि विस्फोटक सामग्री से वन्यजीवों और पशुओं की हत्या के जुर्म में पशु क्रूरता अधिनियम 1960 के तहत अभियुक्त को 10 साल की सजा या जुर्माना या दोनों ही हो सकते हैं। विस्फोटक अधिनियम 1908 के तहत बिना लाइसेंस के विस्फोटक पदार्थ पकड़े जाने पर दोषी को 10 साल या कठोर आजीवन कारावास का प्रावधान है।