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चीन पारंपरिक रूप से बौद्ध देश : दलाईलामा
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धर्मशाला। तिब्बती धर्मगुरु दलाईलामा ने कहा कि चीन पारंपरिक रूप से एक बौद्ध देश है। चीन और भारत के बीच आम संस्कृति है। भारत ने अपने लोकतंत्र को लगातार संरक्षित किया। मैं गर्व से लोगों को बताता हूं कि मैं भारत का बेटा हूं। मेरा दिमाग भारतीय सोच से भरा है। मेरे शरीर का पोषण भारतीय चावल, दाल और रोटी से होता है।
दलाईलामा ने मंगलवार को तीन दिन की ऑनलाइन टीचिंग शुरू की। पहले दिन उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी, बनारस विवि सहित कई छात्रों को अहिंसा का पाठ पढ़ाने के साथ उनके कई प्रश्नों का जवाब दिया। दलाईलामा ने कहा कि उन्होंने भारत में 60 साल से अधिक समय बिताया है। जब पहली बार शरणार्थी के रूप में पहुंचे तो दुखी होने का कारण था। चीन और भारत दुनिया के सबसे अधिक जनसंख्या वाले देश हैं। चीन ने सभी प्रकार के उतार-चढ़ाव का सामना किया है।
उन्होंने कहा कि कठिनाइयों का सामना करने में प्राचीन भारतीय ज्ञान ने मदद की है। मैं जहां भी जाता हूं और जब भी जाता हूं, लोगों को अहिंसा और करुणा के बारे में बताता हूं। आज मैं भारत सरकार का सबसे लंबा मेहमान हूं। भारत की सरकार और लोगों ने तिब्बती समुदाय की देखभाल की। धर्मनिरपेक्ष तरीके से मैं प्राचीन भारतीय ज्ञान को पुनर्जीवित करने के लिए कृतसंकल्प हूं।
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दलाईलामा ने मंगलवार को तीन दिन की ऑनलाइन टीचिंग शुरू की। पहले दिन उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी, बनारस विवि सहित कई छात्रों को अहिंसा का पाठ पढ़ाने के साथ उनके कई प्रश्नों का जवाब दिया। दलाईलामा ने कहा कि उन्होंने भारत में 60 साल से अधिक समय बिताया है। जब पहली बार शरणार्थी के रूप में पहुंचे तो दुखी होने का कारण था। चीन और भारत दुनिया के सबसे अधिक जनसंख्या वाले देश हैं। चीन ने सभी प्रकार के उतार-चढ़ाव का सामना किया है।
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उन्होंने कहा कि कठिनाइयों का सामना करने में प्राचीन भारतीय ज्ञान ने मदद की है। मैं जहां भी जाता हूं और जब भी जाता हूं, लोगों को अहिंसा और करुणा के बारे में बताता हूं। आज मैं भारत सरकार का सबसे लंबा मेहमान हूं। भारत की सरकार और लोगों ने तिब्बती समुदाय की देखभाल की। धर्मनिरपेक्ष तरीके से मैं प्राचीन भारतीय ज्ञान को पुनर्जीवित करने के लिए कृतसंकल्प हूं।
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