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Kangra News: कौलापुर पंचायत में पति और पत्नी ने ठोकी चुनावी ताल
Sat, 16 May 2026 08:11 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Sat, 16 May 2026 08:11 AM IST
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देहरागोपीपुर (कांगड़ा)। परागपुर विकास खंड के तहत आने वाली ग्राम पंचायत कौलापुर में इस बार पंचायत चुनाव एक बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। पंचायत के निवर्तमान उपप्रधान बीरेंद्र ठाकुर ने इस बार एक नई चुनावी रणनीति अपनाई है। उन्होंने खुद उपप्रधान पद के लिए और अपनी पत्नी अर्चना कुमारी को प्रधान पद के लिए मैदान में उतारा है।
यह पहली बार है जब पंचायत में कोई पति-पत्नी की जोड़ी एक साथ अलग-अलग शीर्ष पदों पर भाग्य आजमा रही है, जिससे पूरे क्षेत्र में यह मुकाबला चर्चा का केंद्र बन गया है। बीरेंद्र ठाकुर पिछले पांच कार्यकाल से लगातार पंचायत की सक्रिय राजनीति में हैं और इस बार वे छठी बार उपप्रधान पद के लिए चुनाव लड़ रहे हैं।
इस बार प्रधान पद महिला के लिए आरक्षित होने के कारण उन्होंने अपनी पत्नी अर्चना कुमारी को उम्मीदवार बनाया है। बीरेंद्र ठाकुर का परिवार क्षेत्र में एक मजबूत राजनीतिक पृष्ठभूमि रखता है। उनके दादा ठाकुर मेहर सिंह देहरा विधानसभा क्षेत्र से करीब (1952 से 1968) लगभग 15 वर्षों तक विधायक रह चुके हैं, जबकि उनके पिता महेंद्र सिंह ठाकुर भी लंबे समय तक पंचायत प्रधान रहे हैं। बीरेंद्र ठाकुर का कहना है कि उन्होंने पंचायत में विकास कार्यों की निरंतरता बनाए रखने और जनसेवा के उद्देश्य से ही इस बार यह संयुक्त पारिवारिक फैसला लिया है।
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यह पहली बार है जब पंचायत में कोई पति-पत्नी की जोड़ी एक साथ अलग-अलग शीर्ष पदों पर भाग्य आजमा रही है, जिससे पूरे क्षेत्र में यह मुकाबला चर्चा का केंद्र बन गया है। बीरेंद्र ठाकुर पिछले पांच कार्यकाल से लगातार पंचायत की सक्रिय राजनीति में हैं और इस बार वे छठी बार उपप्रधान पद के लिए चुनाव लड़ रहे हैं।
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इस बार प्रधान पद महिला के लिए आरक्षित होने के कारण उन्होंने अपनी पत्नी अर्चना कुमारी को उम्मीदवार बनाया है। बीरेंद्र ठाकुर का परिवार क्षेत्र में एक मजबूत राजनीतिक पृष्ठभूमि रखता है। उनके दादा ठाकुर मेहर सिंह देहरा विधानसभा क्षेत्र से करीब (1952 से 1968) लगभग 15 वर्षों तक विधायक रह चुके हैं, जबकि उनके पिता महेंद्र सिंह ठाकुर भी लंबे समय तक पंचायत प्रधान रहे हैं। बीरेंद्र ठाकुर का कहना है कि उन्होंने पंचायत में विकास कार्यों की निरंतरता बनाए रखने और जनसेवा के उद्देश्य से ही इस बार यह संयुक्त पारिवारिक फैसला लिया है।
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