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Kangra News: ऐतिहासिक चौगान से करोड़ों का राजस्व, फिर भी रखरखाव में लापरवाही

Fri, 01 May 2026 12:36 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा Updated Fri, 01 May 2026 12:36 AM IST
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Historical Chaugan generates crores of rupees in revenue, yet there is negligence in its maintenance.
विनोद मेहरा,शहरवासी।
सुजानपुर (हमीरपुर)। हर पांच साल में नगर निकाय चुनाव के दौरान ऐतिहासिक चौगान के रखरखाव, विकास और उपयोग को लेकर बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी रहती है।
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वर्षों से यह मुद्दा राजनीतिक भाषणों में तो उठता है, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते। परिणामस्वरूप, वार्ड नंबर आठ में स्थित चौगान में साफ-सफाई, घास की कटाई, बैठने की व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
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चौगान में हर वर्ष राष्ट्र स्तरीय होली उत्सव का आयोजन किया जाता है, जिससे प्रशासन को करोड़ों रुपये का राजस्व प्राप्त होता है। दुकानों के आवंटन, स्टॉल, झूले और अन्य गतिविधियों से अच्छी खासी आय होती है।
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हालांकि, शहरवासियों का आरोप है कि करोड़ों रुपये के राजस्व होने के बावजूद चौगान के रखरखाव पर बहुत कम बजट खर्च किया जाता है। इस कारण चौगान के चारों ओर गंदगी, गड्ढे और जहरीली घास उगी हुई है। इसके अलावा, लावारिस पशुओं के जमघट से लोगों को सुबह-शाम सैर करने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
राजस्व में वृद्धि के बावजूद चौगान के रखरखाव में कमी पर शहरवासियों की नाराजगी बढ़ रही है और वे अधिकारियों से स्थायी समाधान की उम्मीद कर रहे हैं।

कोट्स

चौगान को साफ सुथरा बनाने के लिए कार्य किया जा रहा है। प्रत्येक वर्ष रखरखाव पर लाखों रुपये का बजट खर्च किया जाता है, ताकि ऐतिहासिक धरोहर की सुंदरता बनी रहे। -हर्षित शर्मा, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद सुजानपुर



महाराजा संसार चंद की विरासत में मिली धरोहर को संजोए रखने को लेकर कोई ठोस रणनीति अख्तियार नहीं हो पाई है, जिससे चौगान की हालात दयनीय बनी हुई है। प्रत्येक वर्ष रखरखाव को लेकर राजनीति की जाती है। -अरविंद कुमार, शहरवासी



चौगान की घास को महाराजा संसार चंद ने विदेशों से मंगवाया था। महाराजा जहां युद्ध अभ्यास करते थे, वहीं होली उत्सव को अपनी प्रजा के साथ मनाते थे। अब चौगान महज सामाजिक कार्यक्रमों के प्रयोग तक सीमित रह गया है। -तिलक रतन, शहरवासी



राष्ट्र स्तरीय होली मेले के दौरान चौगान से करोड़ों रुपये का राजस्व होता है। चौगान की सुंदरता को लेकर राजस्व का 20 फीसदी बजट खर्च होना चाहिए, ताकि लोगों को बेहतरीन सुविधाएं मिल सके। -अजीत सिंह, शहरवासी




चौगान शहर के केंद्र में स्थित है, ऐसे में सुबह-शाम सैर करने के लिए सैकड़ों लोग मैदान का रुख करते हैं, लेकिन अव्यवस्थाओं के चलते लोगों को परेशानी झेलनी पड़ती है। -विनोद मेहरा, शहरवासी

विनोद मेहरा,शहरवासी।

विनोद मेहरा,शहरवासी।

विनोद मेहरा,शहरवासी।

विनोद मेहरा,शहरवासी।

विनोद मेहरा,शहरवासी।

विनोद मेहरा,शहरवासी।

विनोद मेहरा,शहरवासी।

विनोद मेहरा,शहरवासी।

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